Latest Updates
-
गर्मियों में क्यों आता है ज्यादा गुस्सा? जानें इसके पीछे का साइंस और माइंड को कूल रखने के 10 आसान तरीके -
क्या तरबूज का सफेद हिस्सा खा सकते हैं? कब्ज और वेट लॉस समेत इन 5 बीमारियों से मिलेगा छुटकारा -
Divyanka Tripathi के घर से आई डबल गुडन्यूज, Vivek Dahiya ने शेयर की जुड़वां बेटों के जन्म की खुशखबरी -
क्या कोरोना जैसा लॉकडाउन फिर लगेगा? इबोला पर देश में हाई अलर्ट, सरकार और DGCA की सख्त एडवाइजरी जारी -
Dhaba Style Without Gravy Aloo Gobi Recipe: घर पर बनाएं चटपटी और खिली-खिली सब्जी -
Lauki Vs Tori: लौकी या तोरी, गर्मियों में सेहत के लिए कौन-सी सब्जी है ज्यादा फायदेमंद? जानें -
Ekadashi Udyapan Rules: क्या एकादशी व्रत का उद्यापन करना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहता है शास्त्र? -
Bank Holidays in June: जून में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक, प्लान बनाने से पहले चेक कर लें छुट्टियों की लिस्ट -
Bada Mangal 2026: आज चौथे बड़े मंगल पर जरूर पढ़ें बाबा नीम करौली के ये अनमोल विचार, बदल जाएगी किस्मत -
UP Dhaba Style Poori Aloo Recipe: घर पर बनाएं यूपी के मशहूर ढाबे जैसा स्वाद
साउथ के सुपरस्टार शिवा राजकुमार की अमेरिका में हुई सर्जरी, इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे
Actor Shiva Rajkumar Health Update: कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता शिवा राजकुमार को 25 दिसंबर को अमेरिका में भर्ती कराया गया। लंबे समय से ब्लैडर कैंसर से जूझ रहे अभिनेता की स्थिति बिगड़ने पर सर्जरी करनी पड़ी। उनके परिवार और डॉक्टरों ने हेल्थ अपडेट देते हुए बताया कि सर्जरी सफल रही और अब उनकी हालत स्थिर है।
शिवा राजकुमार के स्वास्थ्य को लेकर उनके फैंस काफी चिंतित थे, लेकिन उनकी तेजी से हो रही रिकवरी की खबर ने सभी को राहत दी है। शिवा राजकुमार की सर्जरी के बाद उनकी हालत स्थिर है। डॉ. मुरुगेश मनोहरन ने बताया कि सर्जरी के दौरान उनका ब्लैडर हटाना पड़ा, लेकिन यह प्रक्रिया सफल रही।
डॉक्टर ने कहा, "वह अब पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। पहली सर्जरी सफल रही और कुछ दिनों के रेस्ट के बाद वह पूरी तरह ठीक हो जाएंगे।" आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ब्लैडर कैंसर और कितनी खतरनाक होती है ये बीमारी?

मूत्राशय का कैंसर
ब्लैडर कैंसर मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) की झिल्ली में कोशिकाओं के अनियंत्रित बढ़ने से होता है। यह झिल्ली यूरिन को संग्रहित करने का काम करती है। कैंसर शुरुआती स्तर पर केवल झिल्ली की सतह को प्रभावित करता है, लेकिन समय के साथ यह मूत्राशय की दीवार और अन्य अंगों में फैल सकता है।
ब्लैडर कैंसर के लक्षण
ब्लैडर कैंसर के लक्षणों में सबसे आम है यूरिन का लाल या खून से युक्त होना, जिसमें दर्द नहीं भी हो सकता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द और यूरिन के साथ छोटे-छोटे मांस के टुकड़े आना एडवांस स्टेज का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, यूरिन में जलन या यूरिन रुकने जैसी समस्याएं भी इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। यदि इनमें से कोई लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें, क्योंकि शुरुआती पहचान से इलाज अधिक प्रभावी होता है।
किन लोगों को ब्लैडर कैंसर से होता है ज्यादा खतरा
- ब्लैडर कैंसर के जोखिम कारकों में सबसे प्रमुख है अधिक स्मोकिंग करना, जिससे टॉक्सिन्स ब्लैडर में जमा हो जाते हैं। लंबे समय तक ब्लैडर में स्टोन का बने रहना और बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होना भी खतरे को बढ़ाता है।
- कपड़े रंगने जैसे काम करने वाले लोग, जिनका संपर्क केमिकल्स से अधिक होता है, ब्लैडर कैंसर के उच्च जोखिम में होते हैं।
- अत्यधिक सैकरीन या आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सेवन भी इसका एक कारण हो सकता है।
- 60-70 साल की उम्र के लोगों में यह बीमारी अधिक देखी जाती है। एल्कोहल इसका संभावित कारण हो सकता है, लेकिन इसकी भूमिका उतनी बड़ी नहीं मानी जाती।
कितनी खतरनाक है ये बीमारी
ब्लैडर कैंसर 0 से 4 स्टेज तक विकसित होता है, प्रत्येक स्टेज के साथ बीमारी की गंभीरता बढ़ती है।
स्टेज 0: यह कैंसर मूत्राशय की भीतरी परत में सीमित होता है।
स्टेज 1: कैंसर मूत्राशय की परत के नीचे स्थित संयोजी ऊतक में फैलता है।
स्टेज 2: यह मूत्राशय की दीवार की मांसपेशियों तक बढ़ने लगता है।
स्टेज 3: मांसपेशियों के माध्यम से कैंसर वसा की परत में प्रवेश करता है और महिलाओं में प्रोस्टेट, गर्भाशय या योनि तक फैल सकता है।
स्टेज 4: यह कैंसर पेट की दीवार, कूल्हों, हड्डियों, और फेफड़ों तक फैल जाता है, जिससे बीमारी और जटिल हो जाती है।
हर स्टेज में कैंसर का इलाज और प्रबंधन अलग-अलग होता है।
ब्लैडर कैंसर का इलाज
ब्लैडर कैंसर का इलाज विभिन्न स्टेज और कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
सर्जरी: शुरुआती स्टेज में ट्यूमर को हटाने के लिए TURBT (Transurethral Resection of Bladder Tumor) किया जाता है, और एडवांस स्टेज में साइस्टेक्टोमी (मूत्राशय को हटाना) किया जा सकता है।
कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने या सर्जरी के बाद कैंसर की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए दी जाती है।
इम्यूनोथेरेपी: BCG थैरेपी मूत्राशय में दी जाती है।
रेडिएशन: जब सर्जरी संभव न हो, तो रेडिएशन उपचार का उपयोग किया जाता है।
टार्गेटेड थैरेपी: यह कैंसर की विशेष कोशिकाओं को लक्षित करता है।
ब्लैडर कैंसर मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
- यूरोथेलियल कार्सिनोमा (Transitional Cell Carcinoma): यह सबसे सामान्य प्रकार है, जो मूत्राशय की अंदरूनी परत (यूरोथेलियम) से उत्पन्न होता है। यह कैंसर आसानी से फैल सकता है और गुर्दे और मूत्रमार्ग को प्रभावित कर सकता है।
- स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma): यह कम सामान्य होता है और आमतौर पर लंबे समय तक जलन या संक्रमण की वजह से विकसित होता है।
- एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma): यह कैंसर मूत्राशय की ग्रंथियों से उत्पन्न होता है और यह काफी दुर्लभ है।
इसके अलावा, दुर्लभ प्रकार जैसे स्मॉल सेल कार्सिनोमा और सारकोमा भी होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications