Latest Updates
-
World Thalassemia Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व थैलेसीमिया दिवस? जानें इसका महत्व और इस साल की थीम -
Mother's Day 2026: डिलीवरी के बाद हर महिला को करने चाहिए ये योगासन, जल्दी रिकवरी में मिलेगी मदद -
Mother's Day 2026: मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, 50 के बाद जरूर करवाएं उनके ये 5 जरूरी टेस्ट -
Mother’s Day Special: बेटे की जिद्द ने 70 साल की उम्र में मां को दी हिम्मत, वायरल हैं Weightlifter Mummy -
कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम? जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए किया गया नॉमिनेट -
सुबह खाली पेट भीगी हुई किशमिश खाने से सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे, कब्ज से लेकर एनीमिया से मिलेगी राहत -
Rabindranath Tagore Jayanti 2026 Quotes: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती के मौके पर शेयर करें उनके ये अनमोल विचार -
Aaj Ka Rashifal 7 May 2026: आज धनु और कर्क राशि के लिए बड़ा दिन, पढ़ें सभी 12 राशियों का हाल -
Aaj Ka Rashifal 6 May 2026: मिथुन और कन्या राशि वालों की चमकेगी किस्मत, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान -
Mother's Day पर मां का मुंह कराएं मीठा, बिना ओवन और बिना अंडे के घर पर तैयार करें बेकरी जैसा मैंगो केक
बुढ़ापे में भी लोहे की तरह मजबूत रहेंगे घुटने, Madhuri Dixit के पति डॉ. नेने ने बताए ये 6 टिप्स
6 Golden Rules for Strong Knees : माधुरी दीक्षित के पति और मशहूर कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. श्रीराम नेने न सिर्फ एक विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को हेल्थ टिप्स देकर जागरूक भी कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर घुटनों की सेहत को लेकर बेहद अहम सलाह साझा की, जिसमें उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "मजबूत घुटने, मजबूत ज़िंदगी"। उन्होंने बताया कि अगर आप चाहते हैं कि भविष्य में घुटनों में दर्द से न जूझना पड़े, तो अभी से उनकी देखभाल शुरू कर दें।
डॉ. नेने ने समझाया कि सिर्फ 1 किलो एक्स्ट्रा वजन आपके घुटनों पर 4 किलो दबाव बढ़ा देता है। ऐसे में वजन नियंत्रण से लेकर मसल्स स्ट्रेंथनिंग तक कई ऐसे उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर घुटनों को हेल्दी रखा जा सकता है। आइए जानते हैं उनकी बताई 6 महत्वपूर्ण टिप्स:

1. समझदारी से एक्सरसाइज चुनें
घुटनों को दुरुस्त रखने के लिए एक्टिव रहना जरूरी है, लेकिन इसमें समझदारी भी जरूरी है। डॉ. नेने बताते हैं कि साइकिल चलाना, स्विमिंग और टहलना जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज आपके घुटनों के लिए फायदेमंद होती हैं क्योंकि ये ज़्यादा प्रेशर नहीं डालतीं।
इसके विपरीत, जंप स्क्वैट्स या तेज दौड़ना जैसी हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज से घुटनों पर अत्यधिक तनाव पड़ता है, जिससे उनके घिसने की आशंका बढ़ जाती है।
खासतौर पर साइक्लिंग करने से सिनोवियल फ्लूइड का निर्माण बढ़ता है, जो घुटनों के जोड़ को लुब्रिकेट करता है और मूवमेंट को आसान बनाता है।
2. वजन नियंत्रित करें
एक्स्ट्रा वजन आपके जोड़ों पर सीधा असर डालता है। हर एक किलो अतिरिक्त वजन, घुटनों पर चार गुना ज्यादा दबाव डालता है। डॉ. नेने कहते हैं कि वजन को नियंत्रण में रखना घुटनों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है।
इसके लिए वे सलाह देते हैं कि व्यक्ति स्वस्थ और संतुलित आहार लें, जिसमें फाइबर, प्रोटीन और कम फैट शामिल हो। साथ ही हर दिन कम से कम 30 मिनट टहलना या हल्की फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।
3. सपोर्टिंग मसल्स बनाएं
घुटनों के आसपास की मसल्स - खासकर क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और पिंडलियां (काफ मसल्स) - आपके घुटनों को सहारा देती हैं।
डॉ. नेने बताते हैं कि हफ्ते में कम से कम 2-3 बार स्क्वैट्स, लेग लिफ्ट्स और कर्ल्स जैसी एक्सरसाइज करके इन मसल्स को मजबूत किया जा सकता है।
साथ ही, अच्छी बॉडी पोस्टर बनाए रखना भी घुटनों पर अनावश्यक तनाव नहीं पड़ने देता।
4. सही जूते पहनें
आपके जूते भी आपके घुटनों की सेहत पर असर डालते हैं। डॉ. नेने सलाह देते हैं कि आर्क सपोर्ट वाले गद्देदार जूते पहनें जो चलने में आरामदायक हों।
ऊंची एड़ी के जूते, फ्लैट स्लिपर्स या घिसे हुए स्नीकर्स से बचें क्योंकि ये घुटनों की अलाइन्मेंट को बिगाड़ सकते हैं, जिससे दर्द या चोट की आशंका बढ़ जाती है।
5. RICE मेथड अपनाएं
यदि घुटने में चोट लग जाए तो उसे नजरअंदाज न करें। डॉ. नेने कहते हैं कि तुरंत RICE प्रोटोकॉल अपनाएं:
Rest (आराम): घुटने को आराम दें।
Ice (बर्फ): सूजन कम करने के लिए 15-20 मिनट तक बर्फ लगाएं।
Compression (दबाव): पट्टी बांधें ताकि सूजन न बढ़े।
Elevation (ऊंचा रखें): पैर को थोड़ा ऊंचा रखें ताकि खून का बहाव सामान्य रहे।
6. नियमित स्ट्रेच करें (Stretch Regularly)
कड़ी मांसपेशियां घुटनों पर अतिरिक्त तनाव डालती हैं। इसलिए हर दिन कम से कम 5 मिनट स्ट्रेचिंग को ज़रूर दें।
क्वाड स्ट्रेच, काफ स्ट्रेच और हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच खड़े होकर करने से घुटनों में लचीलापन आता है और दर्द की संभावना कम होती है। स्ट्रेचिंग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और चोट लगने की आशंका भी घटती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications