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Mahasudarshan Kadha: मेडिकल साइंस पर भारी है आयुर्वेद का ये सदियों पुराना काढ़ा, बुखार और इंफेक्शन का है काल
Mahasudarshan Kaadha Benefits: अगर आपको जल्दी ठंड पकड़ जाती है या बार-बार बुखार आ जाता है, तो आपको सदियो पुराने महासुदर्शन काढ़े का सेवन करना चाहिए। ये कोई साधारण काढ़ा नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में शायद ही ऐसा कोई रोग होगा जिसमें इस काढ़े का प्रयोग न हो। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, वृहद्त्रयी, शारंगधर संहिता, बहुत से ग्रंथों में इस काढ़े का उल्लेख मिलता है।
यह काढ़ा 53 जड़ी बूटियों से मिलकर तैयार होता है। यह काढ़ा सुदर्शन चक्र की तरह शरीर की रक्षा करता है। इसलिए, इसे महासुदर्शन काढ़ा भी कहते हैं।
महासुदर्शन काढ़े से पहले इसका चूर्ण बनाना पड़ता है जिसमें सम भाग में 53 जड़ी बूटियां और इन सभी के आधा भाग करके चिरायता औषधि का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया जाता है।

इन 53 जड़ी बूटियों को होता है इस्तेमाल
महासुदर्शन काढ़े से पहले इसका चूर्ण बनाना पड़ता है जिसमें सम भाग में 53 जड़ी बूटियां और इन सभी के आधा भाग करके चिरायता औषधि का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया जाता है। बैद्यनाथ के आयुर्वेद सार संग्रह के मुताबिक इस काढ़े में चिरायता के साथ हरीतिकी, बहेड़ा। आंवला, हल्दी, दारुहल्दी, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, कचूर, सोंठ, कलि मिर्च, पीपल (पिप्पली), पीपलामूल, मुर्वा, गिलोय, धमासा, कुटकी, पित्तपापड़ा, नागरमोथा, त्रायमाड़, नेत्रबला, अजवायन, इन्द्र्जौं, भारंगी, सहजन के बीज, शुद्ध फिटकरी, बच, दालचीनी, कमल के फूल, उशीर, सफ़ेद चन्दन, अतीस, बलामूल, शालपर्णी, वायविडंग, तगर, चित्रकमूल, देवदारु, चव्य, पटोलपत्र, कालमेघ, करंज की मींगी, लौंग, वंशलोचन, कमल फूल, काकोली, तेजपत्र, जावित्री, और तालीसपत्र जैसी जूड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता है।
काढ़ा कैसे बनाएं
इन सभी जड़ी बूटियों को अच्छी तरह कूटे, इसका चूर्ण ना ज्यादा बारीक और ना ज्यादा मोटे , लगभग जौ के बराबर दाने के समान मोटा होना चाहिए। अब एक मिट्टी की हांडी ले, लगभग 10 ग्राम चूर्ण उसमें डालें ,लगभग 160 मिली,जल मिलाकर उबालें, जब ये उबलकर चौथाई हिस्से में रह जाएं तो उतार कर कपड़े से छान ले। अब ये काढ़ा तैयार है। इसका सेवन करने से पहले ध्यान रखें कि यह 24 घंटे से ज्यादा समय तक उपयोगी नहीं होता है।
इन रोगों से बचाएं
महासुदर्शन काढ़ा एक आयुर्वेदिक दवा है जिसका उपयोग बुखार को ठीक करने के लिए किया जाता है। यह काढ़ा पुराने से पुराने बुखार को ठीक करने में अत्यंत ही उपयोगी दवा है। इसके अलावा ये रक्त की शुद्धि के लिए मां के दूध को शुद्ध करने के लिए, आम पाचन को बढ़ावा, अग्नि वृद्धि के लिए, कई तरह के बुखार और उनके लक्षणों को दूर करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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