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बच्चे में मायूसी और चिड़ाचड़पन है टीएनएज डिप्रेशन के संकेत, अनहोनी से बचने के लिए पैरेंट्स तुरंत करें ये काम
Depression and anxiety in Teenagers : डिप्रेशन या अवसाद देश और दुनिया में गंभीर मानसिक रोग है, जिसे लेकर चर्चा बढ़ गई है। लगभग हर उम्र के लोगों में अवसाद की समस्या देखने को मिल रही है। वयस्कों के अलावा किशोरों में अवसाद के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। फिर चाहे वह पढ़ाई के स्ट्रेस को लेकर हो या कई अन्य कारणों के चलते।
डिप्रेशन के कारण किशोरों में भावनात्मक, व्यवहार और कार्यात्मक रूप से बदलावों का अनुभव करता है। इसका कारण लगातार इस से जूझ रहा व्यक्ति उदास रहता है और उसके दिमाग में नेगेटिव चीजें आने लगती है। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर उपचार न लिया जाए तो यह अवसाद से घिरे व्यक्ति को आत्महत्या का कदम उठाने पर भी मजबूर कर सकता है। क्योंकि लगभग सभी गतिविधियों में रुचि कम होने लगती है और वह सामाजिक संपर्क से भी कटने लगता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अनुसार, 15 से लेकर 19 साल के बच्चों की मौत की तीसरी सबसे बड़ी वजह सुसाइड है और डिप्रेशन किशोरों के बीच बीमारी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। आज हम इस आर्टिकल में बताएंगे कि पैरेंट्स कैसे टीनएज में डिप्रेशन के लक्षणों का पता लगाकर उन्हें इस सिचुएशन से बाहर निकाल सकते हैं।

टीनएजर्स में मेंटल डिप्रेशन के ये हैं संकेत
- बेवजह उदासी की भावना
- चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना और छोटी-छोटी बातों पर निराश होना।
- अकेलापन और खाली महसूस होना
- सामान्य एक्टिविटी में मन न लगना और कोई रूचि न होना
- परिवार, दोस्त और सामाजिक लोगों के साथ कम समय बिताना और उनमें रूचि न होना
- आत्म सम्मान में कमी
- फोकस कमजोर होना, सोचने और ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने में कठिनाई महसूस होना
- सुसाइड से संबंधित चीजें देखना या सर्च करना!

टीनएजर्स में डिप्रेशन की मुख्य वजह
- बच्चा पैरेंट्स के प्रेशर के कारण भी खुद को व्यक्त नहीं कर पाता है। जिसकी वजह से डिप्रेशन का गंभीर स्तर सुसाइड में आता है।
- हार्मोनल बदलाव के कारण भी बच्चे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं। वहीं पीरियड्स शुरू होने से पहले आने वाले बदलावों जैसे कि ब्रेस्ट में दर्द, पेट फूलने, सिरदर्द के कारण भी लड़कियों में प्रीमैंस्ट्रयुल डिस्फोरिक डिसऑर्डर देखा जाता है।
- बचपन में किसी तरह के शारीरिक शोषण या पेरेंट्स के तलाक, टीनएज उम्र में ब्रेकअप या किसी करीबी की मौत की वजह से बच्चे अक्सर डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

डिप्रेशन से बाहर निकालने के रास्ते
बातचीत करें : डिप्रेशन से निकालने के जरुरी है कि आप अपने बच्चे से खुलकर बात करें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी करीबी से बातचीत करने के कारण हम मन की बातों को बाहर निकाल देते हैं और हल्का महसूस करते हैं। बातचीत करने से हमारे अंदर पॉजिटिविटी भी बढ़ती है।
शारीरिक गतिविधियों में इंगेज करें : शोधकर्ताओं के अनुसार जो किशोर रोजना 60 मिनट तक खेलने या टहलने जैसी गतिविधियों में रहते हैं उनमें 10 प्रतिशत डिप्रेशन के लक्षण कम हो जाते हैं. शोध करने वाले लोगों का मानना है कि जो किशोर 18 की उम्र के आस-पास रहते हैं उनमें शारिरिक गतिविधि की कमी डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा देती है।
प्यार जताए : डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति के साथ हर वक्त अच्छा व्यवहार करें और उन्हें यह एहसास दिलाते रहें कि आप उनके साथ हैं।
क्रिएटिव हॉबी में इंटेरेस्ट दिलाएं : कोई भी नई क्रिएटिव हॉबी आपके लिए मददगार हो सकती है। आप चाहें तो पेंटिंग, बागबानी या स्पोर्ट्स जैसी किसी भी हॉबी को शुरू कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे शरीर में स्ट्रेस कम होता है।
मेडिटेशन : मेडिटेशन भी डिप्रेशन से बाहर निकालने का एक हेल्पफुल ट्रीटमेंट हो सकता है। इससे माइंड रिलैक्स होता है।
पॉजिटिविटी लाएं : हमेशा बुरी खबरों या बुरी चीजों के बीच रहना बंद कर दें। कोशिश करें कि आप अच्छी किताबें पढ़ें या फिल्में देखें। हमेशा चीजों को लेकर सकारात्मक रहें और बुरी चीजों से दूरी बना लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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