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मोरार जी देसाई क्यों पीते थे अपना मूत्र? 5 हजार साल पुरानी 'Self Urine Therapy' के फायदे जानें
Morarji Desai Birth anniversary: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का 29 फरवरी को जन्मदिवस आता है। वो दुनिया के उन चुनिंदा शख्सियत में से एक थे, जिनका हर चार साल में यानी लीप ईयर में उनका जन्मदिन आता है।
मोरारजी देसाई अपनी लंबी उम्र के वजह से भी मशहूर थे। उन्होंने अपनी लंबी आयु का रहस्य स्व-मूत्रपान को बताया था। जी हां, मोरार जी देसाई स्वमूत्रपान अभ्यास करते थे वो उसे सेहत के लिए उत्तम औषधि मानते थे। अपनी इसी अभ्यास के वजह से वो चर्चा में भी आ गए थे।

दरअसल 1978 में देश के प्रधानमंत्री रहते हुए मोरारजी देसाई अमेरिका के दौरे पर थे। अमेरिकी दौरे पर उनका स्व-मूत्रपान अभ्यास का इंटरव्यू खूब चर्चा में आ गया था, जो दुनियाभर में प्रसारित किया गया था। आइए जानते हें कि स्वमूत्र चिकित्सा क्या हैं और इसके फायदे और नुकसान।
स्वमूत्र चिकित्सा का अर्थ है स्वयं के मूत्र द्वारा विभिन्न बीमारियों का उपचार करना। अंग्रेजी में इसे सेल्फ 'यूरीन थेरेपी' और यूरोफ़ेजिया कहा जाता है।
इस अभ्यास को चिकित्सा के इतिहास में काफी पुराना बताया जाता है। आयुर्वेद में आठ अलग-अलग जीवों के मूत्र के इस्तेमाल के बारे में पता चलता है, इसमें से एक मानव मूत्र भी है।
भृगुसंहिता में भी मिलता है स्वमूत्र पीने का जिक्र
सप्तऋषियों में से एक महर्षि भृगु ने भृगुसंहिता में में स्वमूत्र पीने से होने वाले फायदों के बारे में बताया गया है। यूरिन का इस्तेमाल कर्क रोग जैके इलाज के लिए बताया गया है। इसमें वृणित एक श्लोक के अनुसार एक साफ़ बर्तन में अपने मूत्र को एकत्रित करें। खाली पेट एक से दो तोला मूत्र का 42 दिनों तक सेवन करना चाहिए। इस दौरान सही खानपान और अच्छी जीवनशैली को भी अमल में लाना चाहिए।

लगभग 5000 साल पहले लिखी गई डामर तंत्र में भी इसका ज़िक्र मिलता है। जहां इसे शिवाम्बु यानी शिव के जल के तौर पर बताया गया है। इसे योगी इसका सेवन ध्यान बढ़ाने और ब्रेनवेव गतिविधि को धीमा करने के लिए इस्तेमाल में लिया जाता था। इसके अलावा गिलोय के साथ अपने मूत्र को छह महीने तक पीने से कई गंभीर बीमारियां दूर हो सकती हैं।
हॉलीवुड सेलेब भी करती थी इस चिकित्सा का इस्तेमाल
मशहूर हॉलीवुड गायिका मैडोना ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह रोजाना अपना एक कप यूरिन पीती थीं। इसके अलावा अपने पांव को दुरस्त रखने के लिए मैडोना अपने पांव पर ही पेशाब करती थीं।
मैडोना के अलावा सारा माइल्स ने 2007 में एक इंटरव्यू में ये बात कबूली थी कि वह 30 सालों तक खुद का यूरिन पीती थी। उनका मानना था कि ऐसा करने से एलर्जी और कैंसर की समस्या नहीं होती है।
स्वमूत्र पीने के नुकसान
- शरीर के विषाक्त पदार्थ यूरिन के जरिए बाहर निकलते हैं, ऐसे में इन्हें पीना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- पेशाब में एसिडिक मात्रा भी होती है। ऐसे में इसे पीना सेहत के लिए फायदेमंद नहीं माना जाता है।
- इस अभ्यास को आमतौर पर तब तक ही सुरक्षित माना जाता है, जब तक कि यूरिन जीवाणु रहित होता है। ऐसा तब होता है जब तक कि आपकी किडनी में किसी तरह की दिक़्क़त नहीं होती है।
डिस्कलेमर : यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। बोल्ड स्काई हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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