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National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं
National Nutrition 2026: भारत में हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (National Nutrition Week) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हर आयु वर्ग के लोगों के लिए उचित खानपान और पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दौरान सरकार और स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं की ओर से लोगों को बेहतर खानपान के बारे में जानकारी देने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम किए जाते हैं। खासतौर पर, गर्भावस्था के दौरान महिला के खाने-पीने पर खास ध्यान देना जरूरी होता है। क्योंकि गर्भवती महिला जो भी खाती है उसका पोषण उसके साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे को भी मिलता है। इस समय शरीर में आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी होने पर मां और बच्चे, दोनों की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसलिए पूरे गर्भकाल में खाने में जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए, पुणे स्थित डीपीयू सुपर स्पेशलटी अस्पताल की चीफ डायटीशयन समीक्षा चोरडया से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में डाइट में किन चीजों को करें शामिल -

प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे के लिए क्यों जरूरी है सही पोषण?
गर्भावस्था में महिला को अपने साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की जरूरतों का भी ध्यान रखना होता है। इसलिए शुरुआत से ही खाने-पीने पर ध्यान देना जरूरी है। इस दौरान भोजन में पोषक तत्वों की कमी रहने पर मां की सेहत के साथ बच्चे के विकास पर भी असर पड़ सकता है। पर्याप्त पोषण बच्चे के शारीरिक विकास में मदद करता है और जन्म के समय कम वजन जैसी परेशानियों से बचने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी में महिला को हर समय ज्यादा खाना खाना चाहिए। जरूरत के मुताबिक संतुलित मात्रा में अलग-अलग तरह के पोषक तत्व लेना ज्यादा जरूरी है। खाने के बीच बहुत लंबा अंतर न रखें और एक बार में बहुत ज्यादा खाने से भी बचें।
प्रोटीन
बच्चे के शरीर के विकास के लिए प्रोटीन जरूरी होता है। इसलिए गर्भवती महिला को दाल, चना और दूसरी फलियां, दूध, दही, पनीर, मट्ठा और अंडे जैसी चीजें अपने भोजन में शामिल करनी चाहिए।
अंडा, दूध या मीट लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि ये अच्छी तरह पके हुए हों। कच्चे या अधपके खाने से बचना चाहिए।
आयरन
प्रेग्नेंसी में आयरन की जरूरत बढ़ जाती है। शरीर में खून की मात्रा बढ़ने के कारण हीमोग्लोबिन में कमी हो सकती है। ऐसे में खाने में आयरन और फोलिक एसिड वाली चीजों को शामिल करना जरूरी है। पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना और दूसरी फलियां, अनाज, सूखे मेवे, अंडा, अमरूद और अनार को डाइट में शामिल किया जा सकता है। आयरन की कमी होने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवा या सप्लीमेंट भी दे सकते हैं।
विटामिन-सी
गर्भावस्था के दौरान विटामिन-सी भी डाइट का हिस्सा होना चाहिए। आंवला, नींबू, संतरा और दूसरे फल इसके अच्छे स्रोत हैं। इन्हें रोज के खाने में शामिल किया जा सकता है।
मिनरल्स
गर्भावस्था के दौरान शरीर को कई तरह के मिनरल्स की जरूरत होती है। ताजे फल, हरी सब्जियां और सूखे मेवे इनका अच्छा स्रोत हो सकते हैं। फोलेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी शरीर के लिए जरूरी होते हैं। फोलिक एसिड पर खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि गर्भावस्था के शुरुआती समय में इसकी जरूरत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी सप्लीमेंट को डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेहतर है।
फाइबर
प्रेग्नेंसी में कब्ज की परेशानी कई महिलाओं को हो सकती है। इससे बचने के लिए फाइबर वाली चीजें खाना अच्छा रहता है। फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, चोकर वाला आटा, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, अंजीर, अमरूद और संतरे जैसी चीजें डाइट में ली जा सकती हैं।
कैल्शियम
गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम की भी जरूरत होती है। इनकी सही मात्रा मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है। खाने में दूध, दही और पनीर जैसी चीजें शामिल करना कैल्शियम की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है।
फैट और कार्बोहाइड्रेट
शरीर को ऊर्जा देने में फैट और कार्बोहाइड्रेट की भी भूमिका होती है। घी और तेल से फैट मिल सकता है, जबकि चावल और आलू जैसे खाद्य पदार्थ कार्बोहाइड्रेट देते हैं। इन चीजों को भी संतुलित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए?
गर्भावस्था के दौरान कुछ चीजों से बचना जरूरी होता है, क्योंकि ये मां और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं।
चिप्स और फ्राइड फूड्स - इनमें कैलोरी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है।
कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे पेय - इनमें चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे गर्भावस्था में डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
फास्ट फूड और पैकेज्ड स्नैक्स - इनमें पोषक तत्व कम और नमक, चीनी व रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं।
अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ - इससे हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेमप्सिया (गर्भावस्था में होने वाला गंभीर हाई बीपी) का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रिजर्वेटिव्स और एडिटिव्स वाले प्रोसेस्ड फूड - ये मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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