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ओवेरियन कैंसर से जंग जीत चुकी स्नेहलता ने बताया जांच से इलाज तक का पूरा सफर, बताया कैसे दिखे थे शुरुआती लक्षण
World Cancer Day 2026: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही लोगों के जेहन में डर बैठ जाता है। ऐसे में, जब आप खुद इस खतरनाक बीमारी से लड़ रहे हों, तो आपको बहुत हिम्मत की जरूरत होती है। जब गाजियाबाद की रहने वाली स्नेहलता को 29 साल की उम्र में ओवेरियन कैंसर डिटेक्ट हुआ, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आंखों के सामने अपने 7 साल के बेटे का चेहरा और मन में सिर्फ डर। लेकिन उन्हें पता था कि अगर उन्हें कैंसर के खिलाफ जंग जीतनी है, तो हर डर का डट कर सामना करना होगा। स्नेहलता उन खुशनसीबों में से एक हैं, जिनके सामने कैंसर को घुटने टेकने पड़े। आपको बता दें कि 4 फरवरी को विश्व भर में वर्ल्ड कैंसर डे (World Cancer Day) मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। इस मौके पर बोल्डस्काई से बातचीत के दौरान स्नेहलता ने कैंसर की जांच से इलाज तक का पूरा सफर बताया। तो आइए, जानते हैं स्नेहलता ने ओवेरियन कैंसर को कैसे मात दी -
ओवरी में गांठ हुई थी
स्नेहलता ने बताया, "एक दिन अचानक मेरे पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द उठा। मुझे लगा कि शायद यह गैस का दर्द है, इसलिए मैंने कुछ घरेलू उपायों का सहारा लिया। लेकिन जब दर्द से राहत नहीं मिली, तो मैं डॉक्टर के पास गई। उस समय डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दी, जिससे कुछ समय के लिए दर्द से आराम मिल गया। लेकिन फिर भी मुझे कभी-कभार हल्का दर्द महसूस होता था। जब धीरे-धीरे दिक्कत बढ़ने लगी, तो मैंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस हॉस्पिटल में जांच करवाई। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि मेरे ओवरी (अंडाशय) में गांठ है। डॉक्टर ने बताया कि ज्यादातर गांठे दवाओं से ठीक हो जाती हैं। इसके बाद मेरा एक साल तक इलाज चला, लेकिन गांठ ठीक नहीं हुई।"

एक साल बाद ओवेरियन कैंसर डिटेक्ट हुआ
स्नेहलता आगे बताती हैं, "मैंने डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन और कुछ अन्य टेस्ट करवाए, जिसमे पता चला कि मुझे स्टेज 3 का ओवेरियन कैंसर है। उस समय तो मुझे ऐसा लगा जैसे अब मैं बचूंगी नहीं, क्योंकि कैंसर है ही ऐसी जानलेवा बीमारी। लेकिन जब मैंने मैंने एक नजर अपने बेटे की तरफ देखा तो फैसला लिया कि अब इसके लिए मुझे कैंसर के खिलाफ जंग जीतनी ही होगी।"
4 बार कीमोथेरेपी और सर्जरी हुई
स्नेहलता ने बताया, "इलाज के दौरान मैंने कीमोथेरेपी के 4 राउंड लिए। फिर मेरी सर्जरी हुई, जिसमें मेरी ओवरी, यूट्रस और फेलोपियन ट्यूब को निकाल दिया गया। कैंसर आपको शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़कर रख देता है। मैं असहाय महसूस करती थी लेकिन मैं अपना दु:ख किसी के सामने जाहिर नहीं करती थी। मैं जब भी आंख बंद करती थी, तो मेरे बेटे का चेहरा सामने आता था। मैं सोचती थी कि अगर मैं नहीं रही, तो उसका क्या होगा? मुझे लगता था कि मुझे अपने बच्चे के लिए जिंदा रहना है। इलाज के दौरान मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे बहुत सपोर्ट और मोटिवेट किया। अपने परिवार के प्यार और साथ की वजह से ही मैं यह जंग जीत पाई।"

कीमोथेरेपी के दौरान हुई काफी परेशानी
स्नेहलता बताती हैं, "हर 25 दिन के गैप में मेरी कीमोथेरेपी होती थी। कीमोथेरेपी करवाने के बाद मुझे पूरे शरीर में असहनीय दर्द होता था। मैं 2-4 दिनों तक खाना नहीं खा पाती थी और मुझे बार-बार उल्टी होती थी। साथ ही, मुझे अत्यधिक कमजोरी महसूस होती थी, जिसकी वजह से मैं खड़ी भी नहीं हो पाती थी। धीरे-धीरे मेरे बाल झड़ना शुरू हो गए। कीमोथेरेपी के तीसरे सेशन तक मेरे सिर के सारे बाल झड़ चुके थे। लेकिन जब इलाज के दो महीने बाद दोबारा जांच करवाई गई, तो रिपोर्ट नॉर्मल आई। मेरे शरीर से कैंसर निकल चुका था"
कैंसर के इलाज के साथ मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान दें
स्नेहलता ने बताया, 'कैंसर जर्नी के दौरान शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। कैंसर से जीतने के लिए आपको हिम्मत रखना बहुत जरूरी है। कैंसर के दौरान हर समय मन में डर रहता है। लेकिन मैं सभी को ये संदेश देना चाहती हूं कि कैंसर से डरें नहीं, बल्कि उसका हिम्मत से सामना करें। हिम्मत और उम्मीद के बल पर हर मुश्किल से जीता जा सकता है।"
ओवेरियन कैंसर के लक्षण क्या हैं?
पेट के निचले हिस्से में दर्द
पेट में सूजन और भारीपन महसूस होना
थकान
पीठ में दर्द
बार-बार पेशाब आना
कम खाने पर भी जल्दी पेट भर जाना
लगातार कब्ज या दस्त की समस्या
असामान्य ब्लीडिंग होना
संभोग के दौरान दर्द होना
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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