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Pitru Paksha 2023: श्राद्ध पक्ष में इन 5 पौधे को लगाने से पितृ रहेंगे प्रसन्न, बीमारियां भी रहेंगी दूर
Tree in Pitru Paksha पितृपक्ष के दिनों में पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोजन के साथ ही पेड़-पौधे लगाने का भी विधान है। पितृपक्ष को पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। हमारे आसपास कई ऐसे पेड़ हैं जिनको लगाने और पूजने से पितृ संतुष्ट हो जाते हैं।
ये पेड़ न सिर्फ पितृदोष को दूर करने के लिए जानते जाते हैं बल्कि प्रकृति और सेहत के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं। आइए जानते हैं पितृपक्ष में कौन-कौन से पेड़ है और इनके फायदें।

तुलसी
पितृ पक्ष के अवसर पर जमीन में तुलसी के बीज डाले जाते हैं या पोधारोपण किया जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से नकारात्मकता दूर होती है। आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय पौधा माना जाता है, जो व्यक्ति को कई रोगों से बचाता है। तुलसी की पत्तियां, जड़, बीज सभी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। इसमें मैंगनीज, आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन के जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। तुलसी में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो पेट से संबंधित परेशानियां जैसे पाचन में परेशानी, पेट में जलन व एसिडिटी टाइप की दिक्कतों को दूर करने में मदद करती है।

पीपल
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ का विशेष महत्व है। इसकी नियमित रूप से पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। पितृ पक्ष के अवसर पर पेड़ की पूजा और पौधारोपण भी किया जाता है। सेहत की दृष्टि से पीपल में कॉपर, मैंगनीज, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पीपल के पेड़ की पत्तियों का रस खांसी, अस्थमा, दस्त, कान दर्द, दांत दर्द, हेमट्यूरिया, माइग्रेन, खुजली, आंखों की परेशानी और गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत दिला सकता है। पेड़ के तने की छाल पैरालिसिस, हड्डी टूटने, दस्त और मधुमेह दूर करने में मदद कर सकती है।
बेल का पौधा
बेल का पौधा लगाने से उसकी नियमित सेवा से पितर प्रसन्न होते हैं। संतान संबंधी परेशानी, विवाह में बाधाएं और आर्थिक संकट से छुटकारा मिलता है। । बेल और बेल की पत्तियों में विटामिन ए, विटामिन बी समूह और विटामिन सी भी पाए जाते हैं। बेल एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है। आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, फास्फोरस जैसे मिनरल्स भी इसमें मौजूद होते हैं। इनके अलावा, इनमें टैनिन, फ्लेवोनोइड और कूमारिन केमिकल होते हैं। ये केमिकल सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद कुछ रसायन ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं।

बरगद का पेड़
पितृ पक्ष के दौरान बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, इसे वट वृक्ष भी कहा जाता है। पितृ पक्ष में बरगद के पेड़ की पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वहीं सेहत के लिहाज से इसमें खूब औषधीय गुण पाएं जाते हैं। बरगद के पेड़ की पत्तियों, फल और फूल में विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में होता है। दस्त और पेचिश की समस्या को दूर करता है। यह ओरल हायजीन बनाएं रखने में भी मदद करता है।
अशोक
अशोक के पत्तों का इस्तेमाल हर धार्मिक अनुष्ठान में होता है। इसके पत्तों में हाइपोग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। शरीर में इंसुलिन बनने की क्रिया में भी सुधार होने लगता है। अशोक के पेड़ की पत्तियों और फूलों में एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं। इसका उपयोग दर्द -बुखार से राहत पाने और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पेट के कीड़े मारने और अल्सर कम करते हैं। अशोक के पेड़ की छाल में एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण भी होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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