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राजस्थान की इस शाही सब्जी के आगे काजू-बादाम भी हैं सस्ते, अब मिला GI टैग, जानें कीमत और खासियत
Ker-Sangri health Benefits : राजस्थान की रसोइयों में खास जगह रखने वाली सांगरी पतली, लचकदार फलियाँ जो हर राजस्थानी थाली का स्वाद बढ़ा देती हैं को अब भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है। यह न केवल राज्य के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पारंपरिक भारतीय खाद्य विरासत को मिला एक बड़ा सम्मान भी है।
अगर आप किसी राजस्थानी से केर-सांगरी के बारे में पूछें, तो यकीनन उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाएगी और शायद कोई बचपन की याद, त्योहार की बात या दादी के बनाए अचार की कहानी भी सुनने को मिल जाए।
यह सब्जी न सिर्फ़ रोज़मर्रा की थाली का हिस्सा है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत में भी गहराई से जुड़ा हुआ है। सालभर में सिर्फ 3 महीने मिलने वाली इस सब्जी की मांग विदेशों तक हैं, अगर आप इस सब्जी की कीमत सुन लेंगे तो आपको काजू-बादाम भी सस्ते लगेंगे।

क्या है केर-सांगरी?
केर-सांगरी दरअसल दो अलग-अलग पौधों की उपज है। केर (Capparis decidua) एक कांटेदार झाड़ी होती है जिसकी छोटी-छोटी फलियाँ (बेरी जैसी) होती हैं, जबकि सांगरी (Prosopis cineraria) राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी पर उगने वाली लंबी, पतली फली होती है। यही सांगरी स्वाद और पोषण से भरपूर सब्जी का मुख्य आधार है।
इस अनोखी सब्जी को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह पूरी तरह देसी और प्राकृतिक रूप से उगने वाली उपज है। इसे उगाने में न कोई रासायनिक खाद की जरूरत होती है और न ही सिंचाई की। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके, जहां सामान्य खेती करना बेहद मुश्किल है, वहां खेजड़ी का पेड़ बिना किसी देखभाल के भी फल-फूल देता है।
साल में सिर्फ 3 महीने मिलती है ये अनमोल सब्जी
सांगरी का उत्पादन साल में सिर्फ तीन महीने, अप्रैल से जून के बीच होता है। खेजड़ी के पेड़ पर अप्रैल में फली आनी शुरू हो जाती है और जून तक पककर तैयार हो जाती है। इस दौरान ग्रामीण महिलाएं पेड़ से हरी सांगरी तोड़ती हैं और या तो ताज़ा सब्जी बनाती हैं या उसे धूप में सुखाकर पूरे साल के लिए स्टोर करती हैं।
क्यों खास है सांगरी?
सांगरी दिखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके स्वाद, सुगंध और चटपटेपन की बात ही कुछ और है। यही कारण है कि आज यह सब्जी न सिर्फ गांवों की रसोई में, बल्कि फाइव स्टार होटलों और पारंपरिक शादियों तक में मांग में है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी इसकी खूब मांग है। सुखाई गई सांगरी साल भर इस्तेमाल की जा सकती है और इसकी सब्जी, अचार और यहां तक कि चटनी भी बनाई जाती है।
पोषण से भरपूर, औषधीय गुणों वाली सब्जी
केर-सांगरी केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है। इसमें विटामिन A, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
- यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
- सर्दी-खांसी से राहत देने के लिए इसकी डंठल का चूर्ण लाभकारी माना जाता है।
- खून की कमी, हड्डियों के दर्द, और पाचन संबंधी समस्याओं में इसका सेवन फायदेमंद है।
- डायबिटीज और हार्ट के मरीजों के लिए भी यह उपयोगी मानी जाती है।
- सांगरी में मौजूद सैपोनिन और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
क्या है कीमत?
-इस देसी सब्जी की कीमत भी इसकी गुणवत्ता जैसी ही खास है।
- हरी सांगरी स्थानीय बाजारों में 200 से 300 रुपये किलो बिकती है।
- दूसरे शहरों और महानगरों में इसकी कीमत बढ़कर 400 से 500 रुपये किलो तक पहुंच जाती है।
जब इसे धूप में सुखाया जाता है, तो इसका वजन कम हो जाता है और स्वाद गाढ़ा हो जाता है। इसी वजह से कीमत 1200 से 1500 रुपये किलो तक पहुंच जाती है।
क्यों जरूरी है GI टैग?
भौगोलिक संकेतक टैग (GI टैग) यह सुनिश्चित करता है कि किसी खास क्षेत्र से संबंधित उत्पाद की पहचान, गुणवत्ता और पारंपरिक मूल्यता को संरक्षण मिले। अब केवल राजस्थान में उगाई गई सांगरी को ही असली "राजस्थानी सांगरी" कहा जा सकेगा। इससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ, उत्पाद की पहचान और नकली उत्पादों पर नियंत्रण मिलेगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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