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Sheetala Ashtami 2024 : आखिर चिकन पॉक्स को भारत में क्यों कहा जाता है माता? शीतला अष्टमी से जुड़ी है वजह
Sheetala Ashtami 2024 : चिकन पॉक्स या चेचक संक्रामक रोग है जो एक से दूसरे में फैलने वाली बीमारी है। इस बीमारी में शरीर पर लाल और छोटे दाने निकल जाते हैं, जिसमें काफी खुजली होती है। भारत के ज्यादातर जगहों में इस बीमारी को माता कहा जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि चेचक या चिकनपॉक्स को माता क्यों कहा जाता है और इसके पीछे का कारण क्या है? शरीर में होने वाला या यह चेचक का रोग एक इंफेक्शन है या सच में माता का कोई प्रकोप... आइए जानते हैं?

चिकन पॉक्स क्या होता है?
चिकन पॉक्स या चेचक एक संक्रामक यानी एक से दूसरे को फैलानी वाली बीमारी है। ये बीमारी varicella zoster नाम के वायरस के वजह से होती है। इसे हिंदी में चेचक कहा जाता है। इसमें इंसान के शरीर पर लाल रंग के चकत्ते और छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं।
कई बार सूखने के बाद भी इंसान के शरीर पर इसके काले निशान बने रह जाते हैं। इस वायरस की चपेट में बच्चे जल्दी आते हैं। इस बीमारी में जल्दी ठीक होने के लिए साफ़-सफ़ाई पर ध्यान देना होता है। ताकि इस बीमारी से मरीज जल्दी ठीक हो जाए और कोई दूसरा वायरस इसकी चपेट में न आए।
धार्मिक मान्यता
शास्त्रों के अनुसा ज्वरासुर नाम का एक असुर बच्चों को तेज़ बुखार देकर मार डालता था। तब माता कात्यायनी ने शीतला माता का रूप धारण कर बच्चों के शरीर में प्रवेश किया। उनके शरीर में प्रवेश करते ही बच्चों के शरीर पर चकत्ते पड़ गए। मगर माता ने बच्चों के खून को शुद्ध कर ठीक कर दिया।
तभी से ये मान्यता है कि चेचक होने पर मां खुद शरीर में प्रवेश करती है, ये ही एक वजह है कि चिकन पॉक्स होने पर कहते हैं माता आई है। बता दें, माता के कोप से बचने के लिए हर साल शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में शीतला मां को बासी खाने का भोग लगाकर ठंडा खाते हैं ताकि शीतला माता को प्रसन्न किया जा सके और घर-परिवार रोगमुक्त हो सके।
ये साइंटिफिक लॉजिस
वैस तो साइंस के हिसाब से यह एक नॉर्मल बीमारी है, जिसमें बहुत सावधानी बरतने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है। दरअसल, 90 के दशक तक चिकन पॉक्स का कोई इलाज नहीं था। इस वजह से कुछ पुराने लोगों ने इस बीमारी के कुछ घरेलू उपाय करना शुरु कर दिए जिसे शीतला माता से जोड़ दिया गया।
दरअसल, शीतला माता की तस्वीर देखने पर पता चलता है कि मां के एक हाथ में झाडू और एक हाथ में नीम है। इस बीमारी के इलाज एक लिए सफाई का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही आराम के लिए कुछ एंटी वायरल दवाइयां ही दी जाती है। माता निकलने पर नीम की पत्तियों को घर के बाहर रखा जाता है, जिससे कीड़े-मकौड़े घर में नहीं आएं और इसके एंटीबैक्टीरियल गुण घर में कीड़े-मकौड़ों और अन्य बैक्टीरिया को प्रवेश करने नहीं देते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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