DJ की तेज आवाज से गई 13 साल के बच्‍चे की जान, कैसे शोर-शराबा बनता है हार्ट फेल की वजह

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकान्‍ने वाला मामला सामने आया है। बीते दिनों दुर्गापूजा विसर्जन के दौरान बज रहे डीजे की तेज आवाज की वजह से एक 13 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चा डीजे पर डांस करते-करते बेहोश हो गया। पूरी घटना 14 अक्टूबर की है जब बच्‍चा घर के बाहर विसर्जन समारोह के ल‍िए लगे डीजे पर नाच रहा था। नाचते हुए वह अचानक बेहोश हो गया जिसके बाद बच्‍चे की मां ने डीजे बंद करवाने के ल‍िए चिल्‍लाती रही लेकि‍न डीजे बंद नहीं क‍िया। जिसके बाद जब तक बच्‍चे को इलाज के ल‍िए ले जाया गया तब तक बच्‍चे की हार्ट फेल से मौत हो चुकी थी।

यह कोई पहली घटना नहीं है जब तेज आवाज और भारी शोर की वजह से गंभीर मामले सामने आए हों। डीजे संगीत के तेज बेस पर डांस करते हुए अचानक हार्ट अटैक के कई केस पहले भी रिपोर्ट किए गए हैं। तेज आवाज के कारण बहरेपन और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं क‍ि कैसे तेज आवाज या भारी शोर दिल को कमजोर बना देता है।

Teenager Dies While Dancing To Loud Music In Bhopal

तनाव (स्ट्रेस) में वृद्धि

लगातार शोर में रहने से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। जिससे स्‍ट्रेस लेवल बढ़ जाता है, इस वजह से ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) को बढ़ सकता है। उच्च रक्तचाप दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे हृदय की धमनियां कमजोर हो सकती हैं और हार्ट फंक्‍शन कमजोर हो जाते हैं, जो अंततः हार्ट फेल का कारण बनता है।

एथेरोस्क्लेरोसिस हो सकता है

लगातार शोर-शराबा रक्त वाहिकाओं की दीवारों में सूजन पैदा करता है, जिससे धमनियां सख्‍त (एथेरोस्क्लेरोसिस) हो सकती हैं। ज‍िसका असर ब्‍लड फ्लो में रुकावट पैदा करता है और इस वजह से ऑक्सीजन सप्‍लाई कम होने लगती हैं और हार्ट फेल का खतरा बढ़ सकता है।

दिल की धड़कन में अनियमितता (एरिदमिया)

शोर के संपर्क में आने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। लंबे समय तक तेज आवाज या अत्यधिक शोर का सामना करने पर दिल की लय बदल सकती है, जिसे एरिदमिया कहते हैं। यह स्थिति हार्ट फेल के खतरे को बढ़ाती है।

एंजाइना (सीने में दर्द) और दिल के दौरे का खतरा

शोर के कारण शरीर में वेसोकॉन्स्ट्रिक्शन होता है, जिससे रक्त वाहिकाएं संकीर्ण हो जाती हैं। इसका परिणाम होता है कि हृदय तक सही मात्रा में रक्त नहीं पहुंचता, जिससे एंजाइना (सीने में दर्द) और दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। अगर यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो हार्ट फेल हो सकता है।

कैसे शोर-शराबे से बचाव करें?

शोर प्रदूषण से दूर रहें: जहां तक संभव हो, ऐसे क्षेत्रों में जाने से बचें जहां शोर अधिक हो, जैसे व्यस्त सड़कें या कारखाने।
इयरप्लग का इस्तेमाल करें: जब आप शोरगुल वाले वातावरण में हों, तो इयरप्लग या इयरमफ्स पहनें।
आराम और ध्यान: नियमित रूप से ध्यान और योग करें, जिससे आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को शांति मिले।
नींद का ध्यान रखें: एक शांत वातावरण में पर्याप्त नींद लें। शोरगुल वाले क्षेत्रों में सोने से बचें या कान बंद करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करें।
स्वास्थ्य की निगरानी: उच्च रक्तचाप और दिल की धड़कन को नियमित रूप से मॉनिटर करें, खासकर अगर आप शोर-शराबे वाले क्षेत्रों में रहते हैं।

कानों के ल‍िए क‍ितनी आवाज है सही?

कानों के लिए 65 से 70 डेसिबल की ध्वनि सामान्य मानी जाती है। अगर 90 डेसिबल से अधिक ध्वनि के संपर्क में लंबे समय तक रहा जाए, तो इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। डीजे की ध्वनि आमतौर पर 180 डेसिबल या इससे भी अधिक हो सकती है, जो बच्चों, बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकती है। यह तेज शोर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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