सद्गुरू द्वारा बताए गए इन तरीकों को अपनाकर खाएं अपना भोजन

आज के समय में अधिकतर लोग अपने आहार को सिर्फ पेट भरने का एक साधन मात्र समझते हैं। जबकि खान-पान का सीधा असर आपकी सेहत और विचारों पर भी पड़ता है। इसलिए, आहार के प्रति व्यक्ति को विशेष ध्यान देना चाहिए। हम सभी जहां बहुत अधिक डिलिशियस या फिर बाहर के खाने को अधिक तवज्जो देते हैं, वहीं सद्गुरु की सोच इसके प्रति काफी अलग है।

ways of eating food

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, सद्गुरु, एक आध्यात्मिक गुरु हैं, जिनके पूरे विश्व में कई अनुयायी है। वह अपने जीवन को बेहद ही सात्विक तरीके से जीना पसंद करते हैं। आहार के प्रति भी उनकी अलग सोच है। अगर आप उनके बताए गए नियमों को ध्यान में रखकर आहार करते हैं तो इससे आपको अधिकतम लाभ मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि क्या हैं वो नियम-

सिर्फ पेट भरने के लिए ना खाएं
जब आप भोजन कर रहे हैं तो इस पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। यह सिर्फ पेट भरने का साधन मात्र नहीं है। खाना खाते समय यह अवश्य देखें कि आपको कितनी मात्रा में भोजन की जरूरत है। आज शरीर को इतने भोजन की जरूरत है तो आप उतना खाइए। हो सकता है कि कल शरीर को उतने आहार की जरूरत न पड़े।

सही तरह से बैठें
खाना खाते समय सही तरह से बैठना भी बेहद आवश्यक है। यौगिक संस्कृति में हमेशा अपने पैरों को क्रॉस करने के लिए कहा जाता है। कभी भी पैरों को फैलाकर भोजन ना करें। आप कभी भी अपने पैर खोलकर भोजन, पवित्र चीजों और ऐसे इंसानों के सामने न बैठें जो अपने भीतर एक विशेष शक्ति रखते हैं क्योंकि इससे आपके सिस्टम में गलत प्रकार की ऊर्जा आ जाएगी।

अपने हाथों से खाएं भोजन
इन दिनों लोग चम्मच से खाना खाते हैं। लेकिन जब आप भोजन को नहीं छूते, तो आपको पता नहीं चलता कि यह क्या है। यदि खाना छूने लायक अच्छा नहीं है, तो यह खाने लायक अच्छा कैसे हो सकता है। आप अपने हाथों को साफ करके भोजन करें। इन हाथों का इस्तेमाल किसी और ने नहीं बल्कि आपने ही किया है, इसलिए आप निश्चिंत हो सकते हैं कि ये अभी कितने साफ हैं। वहीं, चम्मच-कांटे के साथ, आप नहीं जानते कि इसका उपयोग किसने किया है, उन्होंने इसका उपयोग कैसे किया है और किसलिए किया है। सबसे बढ़कर, जब आप कांटे का उपयोग करते हैं, तो आपको भोजन का एहसास नहीं होता है। जब खाना आपके सामने आ जाए तो कुछ पल के लिए उस पर अपना हाथ रखकर महसूस करें कि खाना कैसा है। हाथ भोजन को जानने का पहला स्तर हैं।

खाने को चौबीस बार चबाएं
यदि आप भोजन का एक निवाला लेते हैं, तो आपको उसे चौबीस बार चबाना चाहिए। इसके पीछे एक विज्ञान है। दरअसल, जब आपका भोजन आपके मुंह में पहले से पच जाता है तो हय आपके सिस्टम में सुस्ती पैदा नहीं करेगा। यदि आप चौबीस बार चबाते हैं, तो इससे शरीर की प्रत्येक कोशिका यह निर्णय लेने में सक्षम हो जाएगी कि आपके लिए क्या सही है और क्या नहीं। यह सिर्फ जीभ के लिए ही नहीं, बल्कि आपके पूरे सिस्टम के लिए जरूरी है।

भोजन करते समय बातचीत नहीं
भोजन करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि भोजन करते समय बातचीत बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। इतनी सी बात हमें समझने की जरूरत है कि हमें बस भोजन का आनंद लेना है और शांति से खाना है। दरअसल, जब हम बोलते हैं, तो मुंह से कुछ न कुछ बाहर निकलेगा ही। वहीं अगर कुछ खाना है तो कुछ न कुछ अंदर जाएगा। जाहिर है कि ये दोनों चीजें एक ही समय में नहीं की जा सकती है। अगर ऐसा करते हैं तो इससे चीजें गलत हो सकती हैं।

Image Courtesy- pinterest.com

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, August 15, 2023, 14:00 [IST]
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