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बीकानेर में एक महिला ने दिया प्लास्टिक जैसे दिखने वाले जुड़वा को जन्म, इस रेयर बीमारी से होता है ऐसा
Twins Born In Rajasthan With Rare Condition : राजस्थान के बीकानेर में चार दिन पहले एक महिला ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया जिनकी स्किन प्लास्टिक जैसी थी। इन बच्चों को देखने के बाद हर कोई इन्हें एलियन बेबी बोलने लगा था। जन्म लेती ही दोनों बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही थी। दोनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां जन्म के 4 दिन बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक इनकी स्किन प्लास्टिक जैसी थी और नाखून की तरह हार्ड होकर चमड़ी फटी हुई थी। दोनों ही बच्चों की आंखे अविकसित थी।
प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर विशेष चौधरी ने बताया कि इन बच्चों को हार्लेक्विन-टाइप इचिथोसिस नाम की दुर्लभ बीमारी थी। डॉक्टर्स की मानें यह अति दुलर्भ बीमारी में से एक हैं। यह बीमारी से पीडित बच्चें बमुश्किल एक हफ्ते तक जीवित रह पाते हैं। वैसे हमारे देश में यह संभवत पहला मामला है, जो बच्चों में से एक देखने को मिलता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में?

हार्लेक्विन-टाइप इचिथोसिस क्या है?
हार्लेक्विन-टाइप इचिथोसिस (Harlequin-type Ichthyosis) एक दुर्लभ और गंभीर त्वचा संबंधी विकार है, जो त्वचा की परतों में अत्यधिक मोटाई और कठोरता का कारण बनता है। इसे "हार्लेक्विन ब्यूटी" भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षणों में त्वचा पर बड़े, मोटे पैच होते हैं जो अक्सर लाल, सर्द और फटे हुए होते हैं। यह जन्म के समय पाया जाता है और इसके लक्षण जन्म के साथ ही दिखाई देते हैं। क्लीवरलैंड क्लीनिक के मुताबिक यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जो 5 लाख बच्चों में से किसी एक को होती है।
हार्लेक्विन-टाइप इचिथोसिस के लक्षण
- जन्म के समय बच्चे की त्वचा पर मोटे, कठोर और दरारों वाले पैच होते हैं। यह पैच मुख्य रूप से शरीर के बड़े हिस्सों पर होते हैं।
- सूखी और कठोर त्वचा
- त्वचा में अत्यधिक केराटिन (प्रोटीन) की परत जमने से सख्त त्वचा।
- इस विकार के कारण आंखों के पलकें और कान की नलिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आंखों की समस्याएं हो सकती हैं।
- त्वचा की मोटाई और कठोरता के कारण श्वसन प्रणाली पर भी दबाव पड़ सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
- नवजात शिशु को शारीरिक और जीवनशैली की कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि त्वचा की समस्या और शारीरिक विकास में रुकावट।
इस दुलर्भ बीमारी की वजह
महिला और पुरुष में 23-23 क्रोमोसोम पाए जाते हैं। अगर माता या पिता दोनों में से कोई एक का क्रोमोसोम संक्रमित हो, तो पैदा होने वाला बच्चा इचिथोसिस हो सकता है। यह दुलर्भ बीमारी माता या पिता के ABCA12 नामक जीन में गड़बड़ी होने के कारण होता है, जो त्वचा की कोशिकाओं में केराटिन (Keratin) को जमा करके सख्त बना देता है।
इलाज
हार्लेक्विन-टाइप इचिथोसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, इस बीमारी में सिर्फ 10% बच्चे पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। कई बार इससे शिकार लोग डेढ़ साल तक ही जिंदा रह पाते हैं, तो कोई 25 साल तक भी जी पाता है लेकिन इन्हें भी जीवनभर इस समस्या से गुजरना पडता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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