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आपकी ऑफिस की टेबल पर 'फूड प्वाइजन' तो नहीं रखा है?

बाजार में मिलनेवाले मिनरल वॉटर की बोतलें वैसे तो तोड़-मरोड़ कर फेंक देनी चाहिये, लेकिन लोग इसे रख लेते हैं और तो और उसे अपने ऑफिस की टेबल पर रखकर रोज उसमें पानी भी पीते हैं। लेकिन शायद उन्हें नहीं पता होता कि वो अपने ही कंप्यूटर के बगल में पानी नहीं बल्कि 'फूड प्वाइजन' रखकर काम कर रहे हैं। यह चलन आज सरकारी दफ्तरों से लेकर बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों तक चला हुआ है।
अगर आप भी आफिस में बोतल से पानी पीते हैं, तो अब हो जाइये सावधान! क्योंकि आपकी बोतल में भी फूड प्वाइजन हो सकता है... जी हां यह मजाक नहीं सच्चाई है, क्योकि किसी भी वायरस या बेक्टीरिया को पनपने के लिए एक मिनट भी काफी होता है और आप तो अपनी बोतल को पूरी रात के लिए ऑफिस में छोड़ कर जाते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक वायरस या बेक्टीरिया को पनपने के लिए ऑक्सीजन और पानी ही पर्याप्त होते हैं।
अक्सर ऐसा देखा गया है कि आफिसों में काम करने वाले लोग जिस बोतल में पानी पीते है उसको ना ही चेंज करते है और ना ही उसकी सफाई करते है। वे शायद अभी अनभिज्ञ है कि जो गल्ती वे कर रहे हैं, उसका हरजाना उन्हें कभी भी भुगतना पड़ सकता है। इससे लगने वाली बीमारियों की हद तक जायें तो जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
बेंगलुरू के जेपी नगर में रहने वाले रिटायर्ड डा. केएम नागराज का कहना है कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि फूड प्वाइजनिंग सिर्फ खाने-पीने की चीजों से होता है, बल्कि सच तो यह है कि यह पानी की एक बूंद से भी हो सकता है। जो इस बीमारी को झोल चुके होते है वे भी इससे अनभिज्ञ होते वह भी यही समझते हैं की उनको प्रदूषित भेजन खाने से यह बीमारी हुई थी।
डा. नागराज के मुताबिक जब आप अपनी बोतल को ऑफिस में छोड़ जाते हैं, तब बोतल में बचा हुआ पानी वाश्प बनकर उसकी दीवारों की चारों तरफ अंदर की ओर लग जाता है। बोतल के अंदर मौजूद ऑक्सीजन उस समय पानी की हर बूंद के संपर्क में होती है और यदि किसी दूषित बेक्टीरिया का प्रवेश बोतल में हुआ होगा, तो उसे पनपने के लिए इससे अच्छा पर्यावरण कहीं नहीं हो सकता। रातो-रात बोतल के अंदर लाखों वायरस या बेक्टीरिया पैदा हो सकते हैं।
यदि दूसरे दिन आने पर आप अपनी बोतल को बिना धोये पानी पी लेते हैं, तो वह बेक्टीरिया या वायरस आपको पकड़ सकता है। इसके अंजाम छोटी सी उलटी व दस्त से लेकर डायरिया तक हो सकते हैं। इससे डीहाईड्रेशन भी हो सकता है और डीहाईड्रेशन में कई बार ग्लूकोज चढ़ाने तक की नौबत आ जाती है। पेट में दर्द इसमें आम बात है। लिहाजा दूसरे दिन बोतल को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लेना चाहिये। आम तौर पर घरों में फ्रीज में रखी जाने वाली बोतलों का भी यही हाल होता है। लिहाजा ऑफिस में ही नहीं घर में भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
उम्मीद है इस खबर को पढ़ने के बाद आप अपनी टेबल की बोतल की ओर जरूर देखेंगे और जरूर सावधानी बरतेंगे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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