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जरूर जानिए प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

ऐसा ही एक अभियान शुरू कर चुके आर जी स्टोन यूरोलौजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेषक डा. बी एस बंसल के मुताबिक अस्पताल ने 10,000 से भी अधिक विविध जटिल प्रोस्टेट मामलों में जैसे- उच्च रक्तचाप, मधुमेह, परमानेन्ट कार्डिएक पेसमेकर और थैलेसीमिया माइनर इत्यादि से ग्रस्त रोगियों का लेज़र प्रोस्टेटक्टोमीज़ द्वारा सफलतापूर्वक इलाज किया है। जो सम्पूर्ण एषिया में किसी भी अस्पताल में होलेप द्वारा प्रोस्टेट के इलाज की सबसे अधिक संख्या है।
उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट एक अखरोट के आकार की पुरूष प्रजनन ग्रंथि है, जो मूत्रमार्ग के आसपास, व मूत्र मूत्राषय के तल पर स्थित है। एक सामान्य वयस्क में, इसका वज़न 20 ग्राम के आसपास होता है। इसका आकार उम्र के साथ बढ़ता है जिसे बिनाइन प्रोस्टैटिक हाइपरप्लासिया (बी पी एच) या लोअर युरीनरी ट्रैक्ट सिम्प्टम (एल यू टी एस) के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूषों में आम है।
उन्होंने बताया कि बीपीएच कैन्सरैस नहीं होता है और ये प्रोस्टेट कैन्सर के खतरे में वृद्धि भी नहीं करता है। बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग को दबा देती है जिससे मूत्र त्यागने में कठिनाई और दर्द होता है। गंभीर मामलों में मूत्र त्यागना असंभव हो सकता है, जिसे तुरन्त ध्यान देना चाहिए। अत्याधिक पेशाब आना, पेशाब करने के बाद भी महसूस होना, पेशाब करने में दर्द होना, पेशाब में खून आना आदि बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि के लक्षणों में शामिल है।“
डा. बी एस बंसल ने आगे कहा, "प्रोस्टेटक्टोमी (प्रोस्टेट रिमूवल)में शल्य चिकित्सा द्वारा प्रोस्टेट ग्रंथि के सभी या एक भाग को हटाया जाता है। बी पी एच के उपचार के लिए कई तरह के लेज़र का विकास किया गया है। प्रत्येक लेज़र की अपनी अनूठी ऑप्टिकल विशिष्ठता है जिससे काफी भिन्न नैदानिक परिणाम आए है। प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने के अलावा होलेप द्वारा न्यूनतम रूग्णता से सबसे बड़ी ग्रंथियों का भी प्रभावी रूप से इलाज किया जा सकता है। यह रूकावट के तत्काल संकल्प के साथ पूरी तरह से प्रोस्टेट के अंशों को हटा देता है।
आर जी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हाॅस्पिटल के कन्ट्री हेड श्री बलदेव राज ने कहा, "आरजी स्टोन ने अब तक होलेप द्वारा 10000 से अधिक जटिल प्रोस्टेट मरीजों का इलाज किया है जिनमें से 64 प्रतिशत को मधुमेह की समस्या थी, 58 प्रतिशत को उच्च रक्तचाप, ओल्ड एमआई के साथ सीएडी के 37 हम कि प्रतिशत मरीज, सीओएडी के 26 प्रतिशत मरीज, बंडल ब्रांच ब्लाक्स के 7 प्रतिशत, 30 प्रतिषत से कम कार्यक्षमता वाले हृदय के 5 प्रतिशत मरीज, एण्टीकागुलेंट्स के 2 प्रतिषत, कार्डियक पेसमेकर के 0.4 प्रतिशत मरीज थे।
बलदेव राज ने आगे कहा, "100 ग्राम तक के 82 प्रतिशत, 100 से 200 ग्राम तक के 14 प्रतिशत व 200 ग्राम से अधिक आकार के 4 प्रतिषत मरीजों का इलाज किया है। जिनमें मृत्युदर सिर्फ 0.01 है। हमने 38 से 98 वर्ष तक के प्रोस्टेट के मरीजो का उपचार किया है। इस प्रोस्टेट अवेयरनस माह में हम 1 लाख डाक्टर्स को लिट्रेचर द्वारा प्रोस्टेट के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही हम इस माह 100 से अधिक निःशुल्क कैम्प लगायेंगे।"
डा. हरबंस सिंह, मुख्य यूरोलॉजिस्ट, आर जी स्टोन यूरोलौजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, पीतमपुरा ने होलेप तकनीक से किय कुछ जटिल आपरेशन के उदाहरण देते हुये कहा, "नवीनतम प्रौद्योगिकता, मरीज़ो के लिए एक वरदान है। हाल ही में, र¨हतक निवासी, 75 वर्षीय श्री सहगल 424 ग्राम के एन्लार्ज प्रॉस्टेट के साथ भर्ती हुए थे और उनका नई तकनीक से सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ।
श्री सहगल को पिछले 10 वर्षों सें यूरीनरी समस्याएं थी। उन्हें पेशाब करते समय कठिनाई होती थी और वह केथेटर फौले का उपयग करते थे। कई डाक्टर ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी, पर वह उस विधि का प्रयोग नहीं चाहते थे। वह उपचार के लिए आर जी स्टोन आए, जहाँ डॉक्टरों की टीम नें उन्हें सही जाँच के लिए सी टी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और सी.ई.सी.टी कराने की सलाह दी।
यह एक बेहद गंभीर मामला था, इसलिए हमारी टीम ने उनका ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। एक और मामले में, हमारी लुधियाना शाखा में 180 ग्राम के एन्लार्ज प्रोस्टेट और 8.0 प्रतिषत हीमोग्लोबिन वाले एक 62 वर्षीय नाइजीरियन पुरूष का सफलतापूर्वक आॅपरेशन हुआ था।
खार, मुम्बई में, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त, 74 वर्षीय, मरीज़ का ह¨लेप द्वारा आॅपरेशन हुआ था। जब वह हमारे पास आया तब उसे 1 वर्ष से एल यू टी एस, कभी- कभी पेशाब में जलन, आवर्तक मूत्र पथ में संक्रमण और कभी- कभार अविलंबिता की समस्याएं थी। उसे पिछले 15 वर्षों सें मधुमेह, 10 वर्षों सें उच्च रक्तचाप और 2 वर्षों से हृदय की समस्या थी। उनका ह¨लेप से ऑपरेशन हुआ और अब वह बिल्कुल ठीक हैं।
होलमियम लेंज़र सिस्टोलीथियोट्रप्सि का सफलतापूर्वक प्रयोग, हमारी पीतमपुरा शाखा में एक पर्मानेन्ट कार्डिएक पेसमेकर वाले, 72 वर्षीय पुरूष पर हुआ था। रोगी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा था। उसे 1 वर्ष से एल.यू.टी.एस था। वह बी पी एच के चिकित्सा उपचार पर था लेकिन पिछले 6 महीनों से लक्षण खराब हो गए थे। डिजिटल रेक्टल इग्ज़ैमिनेषन (डी आर ई) से ग्रेड 3 प्रोस्टेट एन्लाज्र्मेन्ट का पता चला। 1 साल पहले उन्हें अतालता के लिए पर्मानेन्ट पेसमेकर पर रखा गया था। उन्होनें इलाज कराया, जो कि बी पी एच के अन्य सर्जिकल चिकित्सा विकल्पों में से एक आशाजनक विकल्प है। यह पूर्ण रूप से मानक टी यू आर पी की जगह ले चुका है और यूरोलाजिस्ट के लिए एक मूल उपकरण बन गया है।
हम आपको बता दें कि आर जी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल सितम्बर में विष्व प्रोस्टेट महीनें के रूप में मना रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा जिससे लोगों को प्रोस्टेट रोग के लक्षणों और लेंज़र द्वारा प्रोस्टेट ग्रंथि को हटानें के बारे में सूचित किया जाएगा। इसके अलावा, सितम्बर के महीनें में आर जी स्टोन अपने सभी केन्द्रों में प्रोस्टेट के मरीज़ो को निःशुल्क परार्मष प्रदान करेगा और विभिन्न शहरों में निःशुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर का भी आयोजन करेगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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