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स्तन कैंसर के बारे में महिलाओं को डॉक्टर से बात करने में होती है झिझक

ओंकोलॉजिस्ट भावना सिरोही ने कहा की बड़ी संख्या में महिलाएं आज घर से बाहर काम कर रही हैं और उन्हें ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें स्तन कैंसर हो सकता है। कामकाजी महिला के विवाह में अकसर देरी होने के कारण पहली संतान का जन्म भी देर से होता है। नौकरी की व्यस्तता और उसी के अनुरूप दिनचर्या होने के कारण कामकाजी महिलाएं बच्चे को अधिक दिनों तक स्तनपान नहीं करा पातीं। ये कारण निश्चित रूप से स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन महिलाओं को सबसे पहले झिझक से उबरना होगा और उन्हें स्तन कैंसर के बारे में डॉक्टर से खुल कर बात करनी चाहिए।
स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चला रही कैंसर सोसायटी की मानद सचिव अर्चना गोविल कहती हैं मासिक धर्म की जल्द शुरूआत और रजोनिवृत्ति विलंब से होना भी स्तन कैंसर का कारण होता है। अनुवांशिकी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। हालांकि भारत में स्तन कैंसर की दर पश्चिमी देशों की तुलना में कम है लेकिन चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और आज भी हमारे समाज में, हमारे घरों में इतना खुलापन नहीं आ पाया है कि स्तन कैंसर के बारे में बेझिझक बात की जा सके। घर पर महिलाएं खुद ही इसकी जांच कर सकती हैं लेकिन डर के कारण वह ऐसा नहीं करतीं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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