काला नमक स्‍वास्‍थ्‍य का खजाना

Rock Salt
काला नमक भारतीय भोजन में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाने वाला खाद्य नमक है। काले नमक का प्रयोग चाट, चटनी, रायता और कई अन्य भारतीय व्यंजनों में किया जाता है। भारतीय चाट मसाला, अपनी खुशबू और स्वाद के लिए काले नमक पर निर्भर करता है।

काले नमक में मुख्यतः सोडियम क्लोराइड होता है। इसके अतिरिरिक्त इसमें सोडियम सल्फेट, आइरन सल्फाइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि की कुछ मात्रा भी मिश्रित होती है। सोडियम क्लोराइड के कारण ही यह नमकीन स्वाद देता है, आइरन सल्फाइड के कारण इसका गहरा बैंगनी रंग दिखता है, और सभी सल्फर लवण इसके विशिष्ट स्वाद और गंध के लिये जिम्मेदार हैं।

उपयोग

काले नमक को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धिति में एक ठंडी तासीर का मसाला माना जाता है और इसका प्रयोग एक रेचक और पाचन सहायक के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि यह पेट की गैस (उदर वायु) और पेट की जलन मे राहत प्रदान करता है। यह माना जाता है कि इसमे आम नमक की तुलना मे कम सोडियम होता है और यह रक्त में सोडियम की मात्रा में वृद्धि नहीं करता है। हरड़ के बीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा में कामोत्तेजक माना जाता और यह रक्तचाप को कम करने और जलन में मदद करता है। इस आशय का कारण हरड़ के बीजों का सल्फ्यूरस यौगिक हैं जो निर्माण प्रक्रिया के दौरान काला नमक का हिस्सा बन जाते हैं। काले नमक वायु में फैले बैकटीरिया को भी खतम करता है।

सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, February 21, 2012, 11:35 [IST]
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