काम के समय पीठ दर्द

पीठ दर्द ("डोर्सलाजिया " के नाम से भी जाना जाता है) पीठ में होनेवाला वह दर्द है, जो आम तौर पर मांसपेशियों, तंत्रिका, हड्डियों, जोड़ों या रीढ़ की अन्य संरचनाओं में महसूस किया जाता है.' इस दर्द को अक्सर गर्दन दर्द, पीठ के उपरी हिस्से के दर्द,पीठ के निचले हिस्से के दर्द या टेलबोन के दर्द(रीढ़ के आखिरी छोर की हड्डी में) में विभाजित कर सकते हैं।

यदि आप पीठ के दर्द से पीड़ित हैं तो काम पर ध्यान केन्द्रित करना बहुत कठिन हो जाता है। कई प्रकार के कार्य ऐसे हैं जो आपकी पीठ पर बहुत अधिक दबाव डालते हैं जैसे कंस्ट्रक्शन (निर्माण), कारखाने का काम, नर्सिंग आदि। हालाँकि दैनिक ऑफिस के काम के कारण भी पीठ में दर्द हो सकता है। नीचे दिए गए लेख में हमने काम करने के स्थानों पर पीठ दर्द के बारे में चर्चा की है।

Back Pain at Work

काम करने के स्थान पर पीठ दर्द के कारण

1. दोहराव- एक ही काम को बार बार दोहराने के कारण मांसपेशियों को चोट पहुँच सकती है या थकान हो सकती है, विशेषत: तब जब आप गति की सीमा से परे अपने आप को खींच रहे हैं या शरीर का अजीब स्थिति में उपयोग कर रहे हैं तब इसके कारण पीठ दर्द हो सकता है।

2. ताकत- भारी वस्तुओं को उठाते समय पीठ पर बहुत ज़्यादा बल लगाने से चोट पहुँच सकती है।

3. तनाव- आपकी पीठ पर बहुत ज़्यादा दबाव डालने से पीठ पर तनाव का स्तर बढ़ सकता है जिसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों में खिंचाव और तनाव आ सकता है। इसके परिणामस्वरूप आपका पीठ दर्द और अधिक बढ़ सकता है।

4. उचित मुद्रा- पीठ के प्राकृतिक वक्रों पर अत्यधिक दबाव के कारण मांसपेशियों को चोट पहुँच सकती है या थकान हो सकती है।

काम करने के स्थान पर पीठ दर्द टालने के चरण-

1. पीठ पर तनाव कम करने के लिए यह आवश्यक है कि नियमित रूप से कुछ शारीरिक गतिविधियाँ की जाएँ। इसमें 30 मिनिट पैदल चलना, तैराकी, जॉगिंग, मजबूती और खिंचाव के व्यायाम शामिल हैं।

2. शरीर की उचित स्थिति बनाये रखें। यह बहुत आवश्यक है कि आप सीधे बैठें यदि आपके कार्य में लम्बे समय तक बैठे रहने की आवश्यकता है तो आपको यह सलाह दी जाती है कि आप नियमित रूप से विराम लेते रहें और कुछ समय के लिए चलें और अपने काम पर वापस लौटें। उसी प्रकार यदि आप के कार्य में लम्बे समय तक खड़े रहने की आवश्यकता है तो आपको यह सलाह दी जाती है आप अपने थके हुए पैरों को कुछ समय के लिए स्टूल या पत्थर आदि पर रखकर आराम दें।

3. वस्तुओं को उठाते समय अपनी स्थिति का ध्यान रखें। भारी वस्तुओं को उठाते समय इसे अपने शरीर के पास से उठाएं और इसे पकड़ने के लिए अपने घुटनों का उपयोग करें। भारी वस्तुओं को उठाते समय शरीर के उचित प्राकृतिक जोड़ों का ध्यान रखें।

4. अनावश्यक झुकने, पीठ को मोड़ने और अनावश्यक रूप से उठाने की गतिविधियों को टालें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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