Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
निमोनिया और उससे बचने का उपाय
निमोनिया कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं है। सर्दी में अकसर निमोनिया होने का डर रहता है। निमोनिया फेफड़ों में असाधारण तौर पर सूजन आने के कारण होता है। इसमें फेफड़ों में पानी भी भर जाता है। आमतौर पर निमोनिया कई कारणों से होता है जिनमें प्रमुख हैं बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या अन्य कुछ परजीवी। इनके अलावा कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी निमोनिया होता है।
बैक्टीरिया जनित निमोनिया दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकता है। इसके विपरीत वायरल जनित निमोनिया ठीक होने में अधिक समय लेता है। मूलत: निमोनिया का पता इस बात से अधिक लगाया जाता है कि पहली बार बीमारी का पता चलने के समय रोगी कितना बीमार था। निमोनिया के मरीज को सादा भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए। मरीज को तेल, मसालेदार और बाहर के खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

लक्षण
निमोनिया में अक्सर रोगी खून भी थूकते हैं। इसके अलावा चमड़ी का नीला पड़ना, मतली, उल्टी, व्यवहार परिवर्तन, थकान, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द भी होता है। छाती में दर्द, तेज बुखार, जो 103 से 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। सर्दी लग कर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिर दर्द, सूखी खांसी, खांसने पर कम मात्रा में ललाई युक्त कफ आना। । छोटे या नवजात बच्चों में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देता है। बच्चे देखने में बीमार लगें तो उन्हें निमोनिया हो सकता है।
उपचार
1. सबसे पहले डॉक्टर को दिखा कर अपना इलाज शुरु करवाएं। रोगी को गर्म कमरे में आराम से लिटाए। खुली हवा और आक्सीजन पूरी मात्रा में मिलनी चाहिये। गर्म पेय जैसे, चाय, गर्म पानी, गर्म, फलों का रस आदि पिलाते रहें।
2. छाती में दर्द होने पर पानी को गर्म कर उसमें लौंग, तुलसी के पत्ते डाल ढक कर रखना चाहिये। तुलसी के पांच हरे पत्ते, पीपल के 2 छोटे पतते आधा कप पानी में पीसकर थेाड़ी थोड़ी सी मिश्री मिला कर दोनों समय पीने से संक्रामक कीटाणु से बचाव होता है।
3 . तुलसी के पांच हरे पत्ते, पांच काली मिर्च, तीन ग्राम मिश्री साथ पीस लें और गोली बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम पानी से लें।
4 . नीम के चार छोटे पत्ते, पीपल के दो छोटे पत्ते पीस कर गोली बनाएं और सुबह-शाम एक एक गोली पानी से लें।
5 . सुबह तुलसी के 3 पत्ते पीस कर पानी से लें तो हर तरह के कीटाणुओं से रक्षा होगी।
6. अडुसा के 5 नग, तुलसी के 3 पत्ते, नीम के तीन पत्ते पीस कर एक कप पानी में उबाल कर आधा कप पानी रहते पर छान लें व मिश्री मिला कर गुनगुना कर दोनों समय पी लें।
7. बच्चों को निमोनिया में दूध थोड़ी केसर मिला कर दिन में 2 बार पिलाएं।
8. 25 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की पांच कलियों को गर्म करके उस तेल से बच्चे की मालिश करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications