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इन्हें खाने से बढ़ सकता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा
क्या आप जानते हैं कि पुरुषों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर जितनी तेजी से अमेरिका और यूरोपीय देशों में बढ़ता दिखाई दे रहा है उतनी ही तेजी से यह भारत की ओर भी रुख कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में यह कैंसर भारत समेत एशियाई मूल के पुरुषों में तेजी से बढ़ा है।
ऐसे में इससे बचाव व जानकारी के महत्व को समझते हुए मार्च के महीने को 'प्रोस्टेट कैंसर जागरूकता माह' के रूप में मनाया जा रहा है। आइए जानें, इससे जुड़े कुछ अहम पहलू। प्रोस्टेट कैंसर 60 से अधिक उम्र वाले पुरुषों के प्रोस्टेट ग्लैंड में होने वाला कैंसर है। आपके लिए सिर्फ यह जानना काफी नहीं कि प्रोस्टेट को स्वस्थ रखने के लिए सबसे अच्छा आहार क्या है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि किस आहार से प्रोस्टेट पर बुरा असर पड़ता है।

1. लाल और संसाधित मांस
बहुत अधिक लाल और संसाधित मांस खाना कई मायनों में नुकसानदायक है। इससे प्रोस्टेट कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध से पता चलता है कि ज्यादा लाल मांस खाने वालों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम लाल मांस खाने वालों की तुलना में 12 प्रतिशत और एडवांस कैंसर का खतरा 33 प्रतिशत ज्यादा होता है।

2. नॉन आर्गेनिक मांस
बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मांस प्रोस्टेट पर बुरा असर डालते हैं। बीफ, पोर्क, लंब, वील और पोल्ट्री में हार्मोन, एंटीबाइटिक और एस्टेरॉइड पाए जाते हैं। यह न सिर्फ प्रोस्टेट, बल्कि स्वास्थ के लिए भी हानिकारक होता है।

3. कैल्सियम और डेरी उत्पाद
पूरक आहार से मिलने वाले कैल्सियम और डेरी उत्पाद से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। कई डेरी खाद्य पदार्थ फैट और कोलेस्टेरोल से भरे होते हैं, साथ ही बहुतों में हार्मोन भी पाए जाते हैं। इन सभी का प्रोस्टेट पर नाकारात्मक असर पड़ता है।

4. डिब्बा बंद टमाटर और टमाटर से बने उत्पाद
चूंकि टमाटर और टमाटर से बने उत्पाद में लाइकोपेन पाया जाता है, जिससे यह प्रोस्टेट के स्वास्थ के लिए फायदेमंद होता है। फिर भी आपको डिब्बा बंद टमाटर के उत्पाद से बचना चाहिए। टिन के डब्बे की परत में एक सेंथेटिक एस्ट्रोजन बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) पाया जाता है। चूंकि टमाटर एसिडिक होता है, इसलिए बिस्फेनॉल-ए इसमें घुल सकता है।

5. माइक्रोवेव में बने पॉपकॉर्न
वैसे तो पॉपकॉर्न फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, पर माइक्रोवेव में बने पॉपकॉर्न से बचें। माइक्रोवेव के जिस खाने में पॉपकॉर्न बनाता है, उसकी परत में परफ्लोरोऑक्टानोइक एसिड (पीएफओए) पाया जाता है। इससे हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

6. नॉन आर्गेनिक आलू
आलू बिना वसा वाला एक अच्छा हाई फाइबर आहार है। पर अगर बात नॉन आर्गेनिक आलू की हो तो इसमें कई जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं। इसके गूदे में जो रसायन जमा रहते हैं, उन्हें आप हटा नहीं सकते हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आर्गेनिक आलू खाया जाए।

7. ज्यादा फ्राई किया हुआ आलू या आलू का चिप्स
ज्यादा फ्राई किया हुआ आलू और आलू चिप्स सैचुरेटेड फैट और नमक से भरा होता है। आलू में एस्पराजाइन नाम का एक अमीनो एसिड पाया जाता है। इसे जब 248 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा गर्म किया जाता है यह एक्राइलामाइड बनाता है, जिससे कैंसर होता है।

8. चीनी
चूंकि चीनी से कैंसर सेल को बढ़ावा मिलती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप कुछ मिठाइयों से दूरी बना लें। अगर आपको मीठा बहुत ज्यादा पसंद है तो रिफाइंड सूगर की जगह फलों का सेवन करें। इससे आपको जरूरी पौष्टिक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट भी मिलेगा।

9. फ्लैक्स सीड
फ्लैक्स सीड और इसका तेल भले ही ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत हो, पर यह ट्यूमर के विकास को बढ़ाकर प्रोस्टेट कैंसर को और बिगाड़ देता है।

10. रिफाइंड काबरेहाइड्रेट
भले ही ज्यादा आटा खाने से प्रोस्टेट के स्वास्थ पर बुरा असर नहीं पड़ेगा, पर इससे आपको बड़ी मात्रा में मिलने वाला हाई फाइबर नहीं मिलेगा।

11. कैफीन
इससे ब्लडर में जलन होती है। कॉफी और कैफीन वाले दूसरे पेय पदार्थ से प्रोस्टेट की स्थिति बिगड़ सकती है।

12. शराब
कैफीन की तरह ही शराब यूरीन के उत्पादन को बढ़ाता है और यूरीन डिस्चार्ज करते समय जलन भी होती है। साथ ही जब आप शराब पीते हैं तो आप बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ अंदर लेते हैं। इससे पहले से ही संवेदनशील प्रोस्टेट पर दबाव बढ़ता है।



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