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स्वास्थ्य के लिये बड़ा ही हितकारी है बबूल का पेड़
बबूल को भारत में कीकर के नाम से भी बुलाया जाता है। इस पेड़ की मुलायम टहनियों को घरों में दातुन बना कर भी प्रयोग किया जाता है। बबूल से ना केवल दांत ही स्वस्थ रहते हैं बल्किल अनेको बीमारियों में भी लाभ पहुंचता है। बबूल कफ और पित्त का नाश करने वाला है।
इसका गोंद पित्त और वात का नाश करने वाला होता है, यह जलन को दूर करने वाला, घाव को भरने वाला, रक्तशोधक है। बबूल की पत्तियां, गोंद और छाल, सभी चीज़ें बड़ी ही काम की हैं।
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अगर हम आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो बबूल आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है। आइये जानते हैं इसके अन्य स्वास्थ्य लाभ और करने हैं इनका प्रयोग

डायरिया:
बबूल के अलग अलग भाग डायरिया को दूर करने में मदद करते हैं। बबूल की ताजी पत्तियों को सफेद और काले जीरे के साथ पीस कर 12 ग्राम दिन में तीन बार खाने से डायरिया ठीक हो जाता है। इसी तरह से इसकी छाल से बना काढा दिन में 3 बार पीने से फायदा होता है।

दांतों की परेशानी:
रोजाना बबूल की छाल को दातून बना कर चबाने से लाभ मिलता है। इससे मसूड़ों की सड़न और खून आना दूर होता है। इससे गंदे दांतों को भी साफ किया जा सकता है। आप दांतों को साफ करने के लिये 60 ग्राम बबूल का कोयला, 24 ग्राम रोस्ट की हुई फिटकिरी और 12 ग्राम काला नमक मिक्स कर के मंजन करें।

एक्जिमा:
25 ग्राम बबूल की छाल और आम की छाल को 1 लीटर पानी में उबाल कर एक्जिमा वाले भाग की भाप से सिकाई करें। सिकाई के बाद उस भाग पर बाद में घी लगा लें। इसके अलावा बबूल के पत्तों को पीस कर एक्जिमा वाली त्वचा पर लगाने से भी बीमारी में लाभ मिलता है।

टॉन्सिल:
बबूल की छाल का गरम काढा बनाइये और उसमें काला नमक मिला कर गरारा कीजिये। इससे टॉन्सिल तुरंत ही ठीक होगा।

कंजक्टिवाइटिस:
रात को सोने से पहले कंजक्टिवाइटिस वाली आंखों पर बबूल के ताजे पत्ते पीस कर लगाएं और इसे किसी साफ कपड़े से बांध दें। दूसरी सुबह आंखों से दर्द और लालिमा चली जाएगी।

आंखों से पानी आना:
250 ग्राम बबूल की पत्तियों को पानी में तब तक उबालें जब तक कि पानी एक चौथाई ना हो जाए। फिर इस पानी को एक साथ पानी में भर कर रख लें। इसके बाद इससे अपनी आंखों की पलको को सुबह-शाम धोएं।

लिकोरिया बबूल
इस रोग को ठीक करने के लिये बबूल की छाल का प्रयोग किया जाता है। बबूल की छाल का काढा प्रयोग करें।

खांसी में लाभकारी
बबूल की मुलायम पत्तियों को पानी में उबाल कर दिन में तीन बार पीने से खांसी और सीने का दर्द ठीक होता है। आप चाहें तो बबूल के गोंद को मुंह में रख कर चूस भी सकते हैं।

चोट लगने या जलने पर
बबूल की पत्तियों को घाव लगने, जलने या चोट लगने पर इस्तमाल किया जाता है। यह दाग लगने से रोकता है। बबूल की पत्तियों को पीस कर लगाएं।



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