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नौकरी करने वाले लोगों में कार्पेल ट्नल सिंड्रोम सबसे ज्यादा, जानें कैसे होती है ये समस्या
कोई भी जॉब हो, आजकल हर काम कम्प्यूटर पर ही सबसे ज्यादा होता है ऐसे में लोग, 8 से भी ज्यादा घंटे कम्प्यूटर या लैपटॉप के सामने बिता देते हैं। ऐसे में हर किसी का लाइफस्टाइल भी काफी अनहेल्दी हो जाता है और उन्हें कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं।
कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को नौकरी के तनाव, अस्वास्थ्यकारी जीवनशैली, गलत तरीके से बैठने के कारण भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नौकरी करने वाले लोगों में कार्पेल ट्नल सिंड्रोम सबसे ज्यादा होता है जिसके बारे में हाल ही में किए गए सर्वे से पता चला है। आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास बातें:

1. कार्पल टनल सिंड्रोम का प्रभाव, व्यक्ति के मीडियन नर्व पर पड़ता है जो कि हाथ या कलाई पर पड़ने वाले दबाव की वजह से होता है। इससे मीडियन नर्व में सूजन आ जाती है।

2. कार्पल टनल सिंड्रोम, में सुन्नपन आ जाता है और दर्द होने लगता है। हाथों, कलाई और उंगलियों में काफी दर्द होने लगता है।

3. हाल ही में एक हुई एक रिसर्च स्टडी से पता चला है कि कार्पल टनल सिंड्रोम, कॉरपोरेट सेक्टर के लोगों में ज्यादा होता है जो कि कम्प्यूटर पर ज्यादा समय बिताते हैं।

4. कार्पल टनल सिंड्रोम, कलाई पर जोर पड़ने की वजह से सबसे ज्यादा होता है क्योंकि रक्त का संचार रूक जाता है।

5. कार्पल टनल सिंड्रोम, उन लोगों में भी देखने को मिलता है जो सिलाई, सफाई, खाने को प्रसंस्करण करने का काम करते हैं। क्योंकि उन लोगों के हाथ भी हमेशा चलते रहते हैं।

6. कार्पल टनल सिंड्रोम की वजह से आर्थराइटिस जैसी बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है, अगर इस सिंड्रोम का सही समय पर इलाज न करवाया जाएं।

7. कुछ देशों में, कर्मचारियों को कार्पल टनल सिंड्रोम होने पर उन्हें इक्विटी एक्ट 2010 के तहत कवर भी मिल जाता है क्योंकि उनके काम की वजह से उन्हें यह समस्या झेलनी पड़ी।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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