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सर्वाइकल कैंसर के कारण और रोकथाम
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर यानि ग्रीवा कैंसर एक घातक बीमारी है जो कि सतन कैंसर के बाद दूसरे नम्बर पर सबसे ज्यादा होती है। इस बीमारी का प्रमुख कारण, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण हे। इस प्रका
हर महिला के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं और उसे इन सभी से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन इन दिनों महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
अगर आपके घर में मां, चाची, मामी या मौसी हैं और उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है तो आपको उनको इस बारे में जानकारी देनी चाहिए और इससे अवगत कराना चाहिए।
महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की परवाह नहीं करती हैं और वो परिवार के काम-काजों में ही लगी रहती हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने परिवार व घर की महिलाओं का ध्यान रखें आैर उन्हें इस घातक बीमारी से बचाएं।
सर्वाइकल कैंसर गंभीर बीमारी है लेकिन लाइलाज नहीं है। इसे सही समय पर पता लगाकर सही किया जा सकता है, बस रोगी में दृढ़शक्ति होनी चाहिए और उसके आसपास का माहौल सकारात्मक होना चाहिए। आइए जानते हैं सर्वाइकल कैंसर के बारे में:

1. ह्यूमन पैपील्लोमावायरस - कारक एजेंट
सवाईकल कैंसर का प्रमुख कारक ये एचपीवी होता है। कई अध्ययनों से इस संक्रमण के बारे में पता चला है। अब टीनएज से ही इस संक्रमण से बचने के लिए लड़कियों को टीके लगाये जाते हैं।

2. असुरक्षित यौन संपर्क
असुरक्षित यौन संबंध, एचपीवी के संचरण का प्रमुख कारण है। एचपीवी के कई अन्य उपभेद होते हैं जो टीकाकरण द्वारा कवर नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए, सेक्स करने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

3. धूम्रपान
अगर आप धूम्रपान करती हैं या आपके परिवार में कोई महिला करती हैं तो उनके शरीर में इस प्रकार के कैंसर होने का चांस बढ़ जाता है। धूम्रपान से किसी भी प्रकार का कैंसर हो सकता है। साथ ही सर्वाइकल कैंसर के जांच महिलाओं में सबसे ज्यादा होता है।

4. अज्ञानता
कई लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं होती है और स्थिति अति गंभीर हो जाने पर वो डॉक्टर के पास जाते हैं। इसलिए इस बारे में अज्ञानता होना सबसे घातक कारक है। अगर आपको इस बारे में जानकारी है तो आप इसे दूसरों से शेयर करें और उन्हें इसके लक्षणों आदि के बारे में बताएं।

5. गर्भनिरोधक गोलियां
ये विवाद का विषय हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि इनके सेवन से गर्भ नहीं ठहरता है लेकिन दुष्प्रभाव बहुत बड़ा पड़ता है। क्योंकि ये हारमोन्स को बदल देता है जिससे सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

6. हारमोन थेरेपी
कई महिलाएं हारमोन थेरेपी को मेनोपॉज के बाद लेती हैं। ऐसा करें लेकिन बहुत ही अच्छे विशेषज्ञ के पास जाएं और उनकी ही देखरेख में हारमोन इंजेक्ट करवाएं।

7. लो इम्यून सिस्टम
जिन महिलाओं की इम्यूनिटी बहुत अच्छी नहीं होती है उन्हें इस रोग के होने के चांसेस बहुत ज्यादा होते हैं। ऐसे में इम्यूनिटी का स्ट्रांग बनाना बेहद जरूरी होता है।

8. मानसिक तनाव
सदैव मानसिक तनाव में रहना दिमाग के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के लिए भी घातक होता है। इससे व्यक्ति के शरीर में अस्वास्थ्यकारी प्रक्रियाएं होने लगती हैं। हमेशा खुश रहें, मन को स्वस्थ रखें, आधी बीमारियां ऐसे ही ठीक हो जाएगी।



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