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ब्लैडर कैंसर से जुड़े ऐसे फैक्ट जिन्हें सुनकर शायद आप सहम जाएं !
कैंसर, जैसी बीमारी का नाम सुनकर किसी का भी सिहर जाना लाजमी है। जहां तक कि इसके विभिन्न स्वरूपों की बात हो जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, ब्लड कैंसर, लंग कैंसर और गले का कैंसर इत्यादी तो आम हो चुके है लेकिन अभी भी इस खतरनाक बीमारी के जाल में ऐसे बहुत से बॉडी पार्ट है, जिनकी पूर्ण जानकारी हमें है ही नहीं। आज दुनिया भर में इस जानलेवा बीमारी से हर उम्र के हजारों लोग गिरफ्त में आ रहें है। कैंसर का सबसे बड़ा नकारात्मक पहलु यह कि सही ट्रीटमेंट के बाद भले ही एक बार कैंसर होने पर आप पूर्ण रूप से ठीक हो जाए, लेकिन यह फिर से होगा या नहीं इसकी कोई गारंटी है ही नहीं।
अब हालात यह हो चुके है कि कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से को अपनी जकड़ में आसानी से ले सकता है। इन दिनों यह शरीर के उन भागों में फैल रहा है जहां कभी बहुत कम इसके चांस हुआ करते थे जैसे कि युनेरी ब्लैडर यानी कि मुत्राश्य, कान यहां तक कि यौन अंगों तक भी।

पुरुषों और महिलाओं में यूरेनरी ब्लैडर एक तरह का मांसपेशियों का कोष है जो कि दोनों के शरीर में यूनेरी फंक्शन का क्रियान्वयन करता है। महिलाओं और पुरुषों के अलग-अलग शारारिक ढांचे के चलते ब्लैडर कैंसर के कारक भी दोनों में अलग-अलग होते है। तो आइए इस आर्टिकल के जरिए जाने कि आखिर ब्लैडर कैंसर क्या है, इसके संकेत क्या है और इससे जुड़े फैक्ट्स क्या है?

फैक्ट # 1, सूक्ष्म संकेत:
जिस तरह ब्रेन ट्यूमर, जिसका मुख्य संकेत है सर में बार-बार दर्द होना। ठीक इसी के उलट ब्लैडर कैंसर के संकेत बहुत सुक्ष्म होते है, अधिकतर तो इन संकेतों को यूरिनरी इंफेक्शन के तौर पर भी देख जाता है। इसलिए वक्त रहते इस कैंसर का पता लगना बहुत जरूरी है।

फैक्ट #2, मुख्य संकेत:
महिलाओं में ब्लैडर कैंसर के मुख्य संकेत है, यूरिनरी इंफेक्शन होना, योनी में जलन होना, डार्क यूरीन आना, यूरीन में खून आना और बार- बार यूरिनरी इंफेक्शन होना।

फैक्ट #3, महिलाओं में मृत्युदर होती है ज्यादा:
अगर आंकड़ों को देखा जाए तो महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ब्लैडर कैंसर के चांस ज्यादा रहते है। लेकिन जब महिलाएं इस कैंसर का शिकार होती है तो इनकी मुत्युदर ज्यादा बढ़ जाती है।ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं के केस में इसकी जांच लेट होती है और इसी वजह से अधिकांश केसस में वक्त रहते इसका ट्रीटमेंट नही हो पाता।

फैक्ट # 4, खतरनाक है ध्रुमपान:
हालांकि ब्लैडर कैंसर से पीड़ित लोगों में इसके बहुत से अलग अलग कारण हो सकते है। लेकिन महिलाओं में स्मोकिंग के चलते ही इस कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क बना रहता है। क्योंकि सिगरेट में मौजूद टॉक्सिन इस कैंसर के ट्श्यूज को बढ़ा देते है।

फैक्ट # 5, इग्नोर न करे यूआईटी को :
बार-बार युनेरी इंफेक्शन होने के केस में ब्लैडर कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। साथ ही साथ महिलाओं में युनेरी इंफेक्शन और ब्लैडर कैंसर के संकेत भी लगभग एकसमान ही होते है। ऐसे में अगर आपको बार-बार युनेरी इंफेक्शन हो रहा है तो आप एक बार अच्छे से चेकअप जरूर करवा लें।

फैक्ट # 6, अनुवांशिकता :
अगर आपके परिवार में आपनी दादी मां, मां या फिर कोई और महिला को अगर ब्लैडर कैंसर हो चुका है तो संभावित है कि आप भी इस बीमारी के शिकार हो जाए। क्योंकि यह एक अनुवांशिक बीमारी है।

फैक्ट # 7, इलाज:
ब्लैडर कैंसर होने पर, इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितना फैल चुका है। रेडिशियन थैरेपी, कीमोथैरपी और सर्जरी के जरिए इसके ट्यूमर को हटाया जा सकता है।

फैक्ट # 8, इन्फर्टिलिटी का खतरा:
जिन महिलाओं को ब्लैडर कैंसर होता है और उसका सही ट्रीटमेंट होने के बाद भी वह इंफर्टिलिटी के हाई रिस्क पर रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्लैडर कैंसर के इलाज के दौरान फर्टिलिटी हार्मोन्स और अंडें भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होते है।

फैक्ट # 9, अनियमित डिस्चार्ज:
आमतौर पर महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या देखी जाती है। जो कि यीस्ट इंफेक्शन का संकेत माना जाता है। जबकि अनियमित तौर पर डिस्जार्च की समस्या कम देखने को मिलती है, लेकिन ब्लैडर कैंसर के केस में यह एक तरीके से बीमारी का सूचक होता है। इसलिए समय रहते ही चेक करवाए।



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