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दांत में दिखने वाले सफेद व भूरे धब्बों को न करें इग्नोर, हो सकता है फ्लोरोसिस
आमतौर पर दांतों पर दिखाई देने वाले पीले और भूरे दाग-धब्बों को मुंह और दांतों की उचित देखभाल नहीं करने के वजह से गंदगी के तौर पर देखा जाता है। लेकिन ये कोई जरुरी नहीं है कि दांतों में दिखाई देने वाले ये धब्बे किसी मुंह से संबंधित बीमारी या साफ-सफाई के अभाव में हो। ये धब्बे दांतों में फ्लोरोसिस के वजह से भी हो सकता है।
फ्लोरोसिस एक ऐसी ही समस्या है, जिसमें दांतों पर सफेद या भूरे धब्बे दिखने लगते हैं।
इन धब्बों को पहचानकर अगर चिकित्सक से संपर्क करें तो इन्हें ठीक किया जा सकता है। फ्लोरोसिस कोई गंभीर समस्या नहीं है, ये कास्मेटिक समस्या है जो हंसते वक्त आपकी खूबसूरती को खराब कर सकता है क्योंकि हंसते समय आपके दांत दिखाई देते हैं और उनमें ये धब्बे नजर आते हैं।

फ्लोरोसिस होने का कारण
ज्यादात्तर फ्लोरोसिस की समस्या 8 साल से कम उम्र वाले बच्चों में देखी जाती है। 8 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा फ्लोराइड वाला मंजन करवाने से उनके दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या हो सकती है। दरअसल फ्लोराइड हमारे दांतों के लिए एक जरूरी तत्व है जो इसे मजबूती देता है। आमतौर पर सभी टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है। मगर छोटे बच्चों के दांतों के लिए फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा खतरनाक हो सकती है इसलिए बाजार में बच्चों के लिए अलग टूथपेस्ट आते हैं, जिनमें फ्लोराइड की मात्रा कम होती है।

ज्यादा फ्लोराइड है खतरनाक
ज्यादा फ्लोराइड के इस्तेमाल के वजह से दांतों पर फ्लोरोसिस हो जाता है जिसमें दांतों का रंग हल्का हो जाता है या दांतों की सतह पर अनियमितताएं पैदा हो जाती हैं। एक बार दांत पूरी तरह से विकसित हो जाता है तब उस पर ज्यादा फ्लोराइड का प्रभाव नहीं पड़ता। फ्लोरोसिस दांत की बीमारी से ज्यादा कॉस्मेटिक समस्या है।

फ्लोरोसिस के लक्षण
फ्लोरोसिस का मुख्य लक्षण दांतों पर सफेद, पीले या भूरे धब्बे हैं। कई बार ये धब्बे इतने हल्के होते हैं कि ध्यान देने पर ही दिखाई देते हैं या चिकित्सक की जांच में नजर आते हैं। हालांकि फ्लोरोसिस इसलिए खतरनाक है क्योंकि समय के साथ ये धब्बे और इनका रंग बढ़ता जाता है इसलिए सही समय पर इसका इलाज जरूरी है।

बचाव
- टूथपेस्ट का यूज करते हुए ध्यान दें।
- अगर आपका बच्चा 6 साल से कम का है तो उसके टूथब्रश पर थोडा हीं पेस्ट दें।
- अपने बच्चों को सिखाएं की ब्रश करने के बाद पेस्ट को थूक दें ।
- ज्यादा स्वादिस्ट पेस्ट का इस्तेमाल न करें वरना बच्चे उसे निगल सकते हैं।
- अगर आपके पीने के पानी में पर्याप्त मात्रा में फ्लोराइड है तो बच्चे को अलग से किसी और रूप में फ्लोराइड न दें ।

फ्लोरोसिस का इलाज
फ्लोरोसिस दांतों की कोई गंभीर बीमारी न होकर कॉस्मेटिक की एक समस्या है क्योंकि इससे सिर्फ दांतों की सुन्दरता प्रभावित होती है; केविटिज वगैरह का निर्माण नहीं होता । इसलिए फ्लोरोसिस के इलाज में दाग को हटाने का प्रयास किया जाता है। यदि दाग सामने वाले दांतों पर हों तो यह चिंता का विषय है और दागयुक्त क्षेत्र को हटाने के लिए दन्त सफेदी की प्रक्रिया अपनाई जाती है।



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