Latest Updates
-
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट
स्टडी: डेडलाइन पूरा करने का प्रेशर बॉस से ज्यादा रहता है एम्प्लॉयीज पर
कॉर्पोरेट वर्ल्ड में काम करना और बने रहना कोई आसान बात नहीं है। घंटों तक लगातार काम करना और डेडलाइन में काम पूरा करना, तनाव के स्तर को कुछ ज्यादा ही बढ़ा देता है।
इस स्ट्रेस के साथ ही आपको करियर में भी आगे बढ़ना होता है। जरनल ऑफ जेरोनटोलॉजी में प्रकाशित हुई एक स्टडी के अनुसार जूनियर लेवल के कर्मचारी हमेशा मैनेजर से ज्यादा स्ट्रेस में रहते हैं।

क्या है स्टडी
मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और एसेक्स विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन के शोधकर्ताओं ने कर्मचारियों के दिनभर में अलग अलग समय पर सलाईवा का सैंपल लेकर कोर्टिसोल लेवल की जांच की। कोर्टिसोल एक एड्रेनल हार्मोन है जिसका स्तर तनाव लेने पर बढ़ जाता है।
इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने हर प्रतिभागी के लिंग, उम्र, नींद लेने के घंटों और सिगरेट पीने या ना पीने को भी ध्यान में रखा। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के काम करने के तरीके पर कुछ नहीं किया लेकिन उन्होंने स्ट्रेस लेवल और काम में संबंध पाया।

कोर्टिसोल लेवल
आमतौर पर सुबह के दौरान कोर्टिसोल लेवल ज्यादा होता है और रात में खासतौर पर सोने के दौरान कम रहता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई लेवल के कर्मचारियों में कोर्टिसोल लेवल उतना नहीं गिरा जितना लो लेवल के कर्मचारियों में हुआ। इससे पता चलता है कि लो लेवल पर तनाव ज्यादा रहता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि निचले स्तर पर काम करने वाले लोगों की स्थिति काफी खराब होती है। इन्हें वेतन तो कम मिलता ही है साथ ही काम पर कम नियंत्रण होना, आर्थिक रूप से भविष्य का खतरे में रहना और सहकर्मियों एवं सीनियर्स की मदद ना मिलने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

रिटायरमेंट तक रहती है समस्या
इसके अनावा रिटायरमेंट तक कर्मचारियों का कोर्टिसोल लेवल बढ़ा हुआ रहता है और हाई ग्रेड पर काम करने वाले कर्मचारियों में तनाव का स्तर कम रहता है।

मुश्किल है स्थिति
इस बात में कोई शक नहीं है कि तनाव का कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अब कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए स्वस्थ और स्ट्रेस फ्री माहौल पैदा करने पर काम करना चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications