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4 साल तक स्पाइनल टीबी को बैकपेन समझते रहें अमिताभ बच्चन, जाने लक्षण और इलाज
पिछले दिनों अमिताभ बच्चन ने "कौन बनेगा करोड़पति" टीबी से जुड़ी समस्या को बताते हुए बताया कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में टीबी की बीमारी हो गई थी जिसे वह 4 सालों तक बैक पेन समझने की गलती करते रहे। उनकी इस गलती की वजह से टीबी के इलाज में काफी वक्त लगा और 1 साल से भी ज्यादा समय तक उनका कठिन ट्रीटमेंट चला।
बिग बी ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उन्हें स्पाइनल ट्यूबरक्लॉसिस की बीमारी है और वह काफी समय तक रीढ़ की हड्डी में हो रहे दर्द को सामान्य बैक पेन समझते रहे। आइए जानते है कि क्या होता है स्पाइनल ट्यूबरक्लॉसिस की बीमारी।

बताया अपना दर्द
बिग बी ने बताया कि उन्हें लग रहा था कि कुर्सी पर काफी देर तक बैठे रहने की वजह से उन्हें पीठ और कमर में दर्द हो रहा है। लेकिन करीब 4-5 साल तक इस दर्द को झेलने के बाद डायग्नोज हुआ कि उन्हें हकीकत में स्पाइनल टीबी की बीमारी हो गई थी। इसके बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ अपनी बीमारी का इलाज करवाया और तब कहीं जाकर वह टीबी-फ्री हुए। अमिताभ बच्चन ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि बीमारी का समय पर मालूम कर समय पर इलाज देने से जान बचाना आसान हो सकता है।

कैसे होता है स्पाइनल टीबी?
टीबी के कीटाणु यदि पहले से शरीर में मौजूद हैं तो ये फेफड़ों के जरिए खून में पहुंचते हैं और फिर खून के जरिए रीढ़ की हड्डी में। यहीं से वो फैलने लगते हैं। यदि किसी मरीज में इसकी पहचान ना हो पाए तो धीरे-धीरे उसकी रीढ़ की हड्डी गलने लगती है जिससे स्थाई अपंगता आती है। यदि किसी मरीज में इसका पता चल जाए लेकिन वो इलाज बीच में छोड़ दे तो उसमें भी रीढ़ की हड्डी गलने की आशंका रहती है। टीबी बाल और नाखून छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।

बीमारी के मुख्य लक्षण
-पीठ में अकड़न
-रीढ़ की हड्डी में असहनीय दर्द
-रीढ़ की हड्डी में झुकाव
-पैरों और हाथों में हद से ज्यादा कमजोरी और सुन्नपन
-हाथों और पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव
-यूरीन पास करने में परेशानी
-रीढ़ की हड्डी में सूजन
-सांस लेने में दिक्कत

अपाहिज होने की रहती है आशंका
दो-तीन हफ्ते तक पीठ में दर्द रहने के बाद भी आराम न मिले, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। आंकड़ों के मुताबिक, डॉक्टर के पास पहुंचने वाले पीठ दर्द के केसों में से 10 फीसदी मरीजों में रीढ़ की हड्डी की टीबी का पता चलता है। इसका सही समय पर इलाज न करवाने वाले लोगों में स्थायी रूप से अपाहिज होने का खतरा भी बना रहता है। इसकी पहचान भी जल्दी नहीं हो पाती है।

लंबा चलता है इलाज
सामान्य टीबी का इलाज 6 महीने में हो जाता है, लेकिन स्पानइल टीबी को दूर होने में 12 से 18 महीने का वक्त लग सकता है। जो लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते या इलाज बीच में छोड़ देते हैं, उनकी रीढ़ की हड्डी गल जाती है, जिससे स्थायी अपंगता आ जाती है। किसी भी आयु वर्ग के लोग रीढ़ की हड्डी के टीबी का शिकार हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, पेट और अन्य हड्डियों को भी प्रभावित कर सकता है।



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