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Contact Lenses vs Glasses: चश्मा पहने या कॉन्टेक्ट लेंस, जानें क्या है, जानें फायदे और नुकसान
जब बात दृष्टि या विजन इम्प्रूव करने की आती है तो हमें चश्मा पहनना है या कॉन्टैक्ट लेंस, यह पर्सनल प्रिफरेंस पर निर्भर करता है। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं लेकिन लाइफस्टाइल, आराम, सुविधा, उम्र, बजट और फैशन जैसे फैक्टर तय करते है कि आपके लिए दोनों विकल्पों में से क्या सही है। आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग के बीच मूलभूत अंतर क्या है? और इनमें से आंखों के लिए क्या सही है? चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस दोनों के पहनने के फायदे और नुकसान -

कॉर्निया से दूरी
लेंस सीधे आंखों पर पहने जाते हैं और कॉर्निया के साथ ये लगाता संपर्क में रहते हैं जबकि चश्मा आंखों पर पहना जाता है, ये कॉर्निया को दूर से कवर करता है। कॉन्टैक्ट लेंस से आंखों में इंफेक्शन का डर रहता है, क्योंकि इसे पहनने और उतारने के लिए आंख को बार-बार छूना पड़ता है।

दृष्टि में अंतर
चूंकि चश्मे के लेंस आंख से थोड़ी दूरी पर पहने जाते है तो इससे देखने में थोड़ी समस्या हो सकती है और कॉन्टैक्ट लेंस से आपको एकदम सटीक विजन मिलता है। इसके अलावा, चश्मे से साइड विजन में देखने में दिक्कत आती है क्योंकि आपको यह देखने के लिए अपना सिर घुमाना पड़ता है कि आपके आसपास क्या है? जबकि कॉन्टेक्ट लेंस के साथ ये दिक्कत नहीं होती है ये आपके आई बॉल्स के शेप के मिल जाते है जिस वजह से ये कॉन्टेक्ट में रहते है तो इससे आपको पूरा विजन मिलता है।

उपयोग में आसानी
कुछ लोगों को चश्मा पहनना बहुत ही बोरिंग लगता है क्योंकि 24 घंटे पहने रखना इसका वजन झेलना इसके बाद बार इसके फ्रेम को बार-बार सही करना भी परेशान करता है कई बार चश्मा पसीने की वजह से भी फिसलने लगता है। इसके अलावा फिजिकल एक्सरसाइज के दौरान चश्मा टिकता ही नहीं है जो बहुत बड़ी मुश्किल लगती है। कॉन्टैक्ट लेंस के साथ ऐसी कोई झंझट नहीं है। इसे लगाने के साथ ही आप किसी भी तरह की एक्सरसाइज का हिस्सा बन सकते हैं। बारिश के दौरान या उमस भरे मौसम में चश्मा पहनने में असहजता होती है क्योंकि ये धुंधले हो जाते हैं।

सौंदर्य संबंधी अंतर
लोग अक्सर कॉन्टैक्ट लेंस पहनना इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि ये उन्हें नेचुरल लुक देने के साथ ही स्टाइलिश लुक भी देता है। आप फैशनेबल दिखने के लिए कलरफुल लेंस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चश्मा थोड़ा सा अस्वाभाविक लगता है लेकिन कुछ लोग स्टाइल एसेसरीज के रुप में भी चश्मा पहनना पंसद करते हैं।

कॉन्टेक्ट लेंस के नुकसान
- अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस पहनकर कंप्यूटर पर काम करते हैं तो इसके कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- कॉन्टेक्ट लेंस लगाने से आंखों में ऑक्सीजन का प्रवाह कम होता है जिसके नतीजन ड्राई आंखों की परेशानी बढ़ जाती है।
- अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस गलती से लगा कर सो गए तो उठने पर आपकी आंखें ड्राई, लाल हो सकती हैं और इनमें जलन भी हो सकती है।
- कॉन्टेक्ट लेंसेज का उचित रख रखाव जरूरी है। हर दिन इनकी सफाई होनी चाहिए ताकि आंखों में कोई गंभीर संक्रमण न हो। अगर आप इनका समुचित रख रखाव नहीं कर सकते हैं तो आपको डिस्पोजेबल लेंस लेने चाहिए।

चश्मा पहनने के नुकसान
चश्मा आपकी आंखों पर 12 एमएम (लगभग आधा इंच) कवर करता है जिससे पेरीफेरल विजन प्रभावित हो सकता है। कई लोग जब चश्मा पहली बार पहनते हैं या उनकी आंखों का नंबर बदलता है तो सही फोकस कर पाने और धुंधलेपन की शिकायत करते हैं।
सर्दी में चश्मे के लेंस पर धुंआ जम जाता है जिससे देखने में परेशानी हो सकती है।
कुछ फ्रेम नाक पर या कान के नीचे लगातार दबाव बनाते हैं जिससे आपको सरदर्द या अन्य परेशानी हो सकती है।

कॉन्टेक्ट लेंस या चश्मा... क्या है बेहतर?
ये हर किसी की व्यक्तिगत पसंद होता है कि उन्हें कॉन्टेक्ट लेंस पहनना है या चश्मा। ध्यान रखें कि अगर आप हमेशा कॉन्टेक्ट लेंस ही पहनते हैं तो भी आपके पास एक अप-टू-डेट चश्मा जरूर होना चाहिए ताकि जब कभी लेंस संबंधी दिक्कत होने पर विजन इफेक्ट न हो इसलिए इसका इस्तेमाल कर सकें।



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