Latest Updates
-
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा -
Bank Holidays October 2026: अक्टूबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
Pitru Paksha 2026 Food Rules: पितृपक्ष में क्या खाएं और क्या न खाएं? जानें खानपान से जुड़े जरूरी नियम -
Tanya Mishra: कौन हैं तान्या मिश्रा? अचानक कैसे बनीं देश की नई 'नेशनल क्रश', इंटरनेट पर तस्वीरें हो रहीं वायरल
मलेरिया शुरु होने से पहले ही इसका पता लगा सकते हैं कुत्ते
नई रिसर्च में सामने आया है कि स्निफर डॉग जल्दी और बेहद सटीक तरीके से मलेरिया का पता लगाता है। ऐसा इंसान में बिना किसी लक्षण के सामने आए भी हो सकता है। वर्ष 2016 में विश्व स्तर पर 445,000 लोग मलेरिया से ग्रस्त थे जबकि इसी साल 216 मिलियन लोगों को संक्रमित मच्छर ने काटा था।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के रिकॉर्ड के अनुसार हर साल लगभग 1500 मलेरिया के मामले रजिस्टर होते हैं। इनमें से अधिकतर मरीज समय पर सही उपचार ना मिल पाने की वजह से मर जाते हैं। आमतौर पर लैब टेस्ट के बाद मलेरिया के लक्षणों का पता चलता है लेकिन अब इस नई स्टडी से काफी दिलचस्प बात सामने आई है।

नई रिसर्च के मुताबिक कुत्ते हर प्रकार के मलेरिया संक्रमण को पहचान सकते हैं वो भी जल्दी और सटीकता से। इस रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता यू.के की दुरहाम यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ एंटोमोलोजिस्ट स्टीवन लिंडसे का कहना है कि मलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा से अलग-अलग तरह की गंध आती है और हमारी स्टडी में पाया गया कि कुत्ते जिनकी सूंघने की क्षमता बहुत तेज होती है, उन्हें इस गंध को सूंघने की ट्रेनिंग दी जा सकती है।
इस रिसर्च को मलेरिया परजीवियों की जांच के लिए स्कूली बच्चों पर किया गया था। सभी बच्चों को रातभर जुराब पहनने के लिए कहा गया था। अगले दिन सुबह शोधकर्ताओं ने इन जुराबों को कुछ महीनों के लिए फ्रीजर में रख दिया। इसके बाद शोधकर्ताओं ने इन जुराबों को दो अलग हिस्सों में बांटा जैसे कि जिन बच्चों को मलेरिया नहीं था और जो संक्रमित थे।

इसके बाद मलेरिया का पता लगाने के लिए कुत्तों को लाया गया। इन्हें इस तरह से प्रशिक्षित किया गया था कि ये मलेरिया वाले जुराब सूघंने पर फ्रीज हो जाएं। कुत्तों ने 70 फीसदी मलेरिया के मामलों की सही पहचान की। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर सभी बच्चों का मलेरिया एक ही स्टेज पर होता तो इस रिसर्च की सटीकता और बढ़ सकती थी।
लिंडसे के अनुसार संक्रमण के बढ़ने के साथ-साथ मलेरिया भी मरीजों में बढ़ता रहता है और जब ये अपने चरम पर पहुंच जाता है तो संक्रमित व्यक्ति की त्वचा से गंध आने लगती है। रिसर्च में शामिल कुत्तों को मलेरिया के पहले या इस बीमारी के शुरु होने से पहले की जांच करने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया था। अगर कुत्ते को इस मामले में बेहतर ट्रेनिंग दी जाती तो रिसर्च के परिणाम और बेहतर होते। इसका मतलब है कि कुत्ते मलेरिया परजीवियों का पता लगाने में बहुत सक्षम हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
