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Duchenne Muscular Dystrophy: लाइलाज बीमारी डीएमडी से पुरुषों को क्यों है ज्यादा खतरा
ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी इन दिनों काफी चर्चा में है। इस बीमारी के कारण बीजेपी लीडर संजीव मिश्रा ने अपने परिवार समेत सुसाइड कर लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संजीव मिश्रा के दोनों बेटों को डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी थी। इस बीमारी का अबतक कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है।
आइए जानते हैं ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी के बारें में-
UTSW में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के प्रोफेसर रोंडा बासेल-ड्यूबी, डॉक्टर इस बारें में बताते हैं कि डीएमडी (DMD) एक खतरनाक और लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी के लक्षणों को सिर्फ दवाओं के जरीये कंट्रोल किया जा सकता है। ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक जेनेटिक डिसऑर्डर है, जो डायस्ट्रोफिन नाम के एक प्रोटीन में बदलाव की वजह से होता है। जब मनुष्य के जीन में बदलाव होने लगता है तब बॉडी में डायस्ट्रोफिन का प्रोडक्शन रूक जाता है। डायस्ट्रोफिन वही प्रोटीन है जो शरीर की मसल्स को मजबूती देता है। लेकिन जब इसका उत्पादन बंद हो जाता है तब डीएमडी बीमारी पनप जाती है।

Duchenne Muscular Dystrophy: किसको हो सकती है ये बीमारी ?
एक स्टडी के अनुसार, ये बीमारी करीब पांच हजार बच्चों में से किसी एक को हो सकती है। लेकिन इस बीमारी के होने के चांसेज पुरूषों में अधिक होते हैं, महिलाओं को ये बीमारी ना के बराबर होती है। बीमारी बच्चे के जन्म लेने के बाद से ही होनी शुरू हो जाती है। इस बीमारी की शुरुआत बच्चे की 5 साल की उम्र में होती है। जिसके बाद ये तेजी से बढ़ती चली जाती है। 20 साल की उम्र तक उनको सांस लेने में परेशानी का भी सामना करना पड़ जाता है। उनको ब्रीदिंग आपरेटस (ऑक्सीजन श्वास यंत्र) की जरूरत पड़ने लग जाती है।

Duchenne Muscular Dystrophy: ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण
इस DMD बीमारी के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लग जाते हैं-
1.बच्चे का सही से ना खड़े हो पाना
2.बच्चे को दौड़ने में परेशानी
3.लेटने, बैठने में समस्या
4.लड़खड़ाती चाल
5.मांसपेशियों में दर्द और जकड़न होना6. बच्चे की हाइट ना बढ़ना

Duchenne Muscular Dystrophy: डीएमडी बीमारी पुरुषों में ही क्यों अधिक होती है ?
इसका सबसे बड़ा कारण है कि डायस्ट्रोफिन जीन एक्स क्रोमोसोम पर होते हैं। वहीं पुरुषों में सिर्फ एक एक्स क्रोमोसोम ही होता है। जबकि महिलाओं में दो क्रोमोसोम होते हैं। डायस्ट्रोफिन प्रोटीन का प्रोडक्शन रूक जाने के कारण महिलाओं की तुलना में इस बीमारी का खतरा पुरुषों में अधिक हो जाता है। ये शरीर के दूसरे अंगों पर भी प्रबाव डालने लगता है। इसका अब तक कोई इलाज नहीं मिल सका है।



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