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पोलियो वायरस का मिलना बना बच्चों के लिए बड़ा खतरा, दुनियाभर में खौफ
ये एक बड़ी चिंता वाली बात है कि पोलियो वायरस हाल के दिनों में दुनिया के कई देशों में मिला है। पोलियो वायरस शहरों के सीवेज में मिला है। आज जब पूरी दुनिया से पोलियो जैसा खतरनाक वायरस खत्म हो चुका था, जिसके लिए हर देश की सरकार ने इसके खात्में के लिए काफी जद्दोजहद की थी, लेकिन वो फिर से उभर कर सामने आया है। पिछले महीने सितंबर 2022 को, अमेरिका के न्यूयॉर्क के कैथी होचुल को कई काउंटियों के सीवेज में इस वायरस का पता चला। इसकी वजह से हजारों तरह के इन्फेक्शन हो सकते थे। पकिस्तान के पंजाब इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर के मुताबिक जब तक पोलियो कहीं भी है, यह बच्चों के लिए हर जगह खतरा है। पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान को छोड़कर दुनियाभर से पोलियो एक तरह से ख़त्म हो चुका है। साल के मिड में लंदन के गटर से लिये गए कुछ सैंपलों में भी पोलियो वायरस का पता चला था। आइए जानते हैं पोलियो के बारें में और क्यों है ये बच्चों के लिए बड़ा खतरा। (WHO) के अनुसार- 24 अक्टूबर को हर साल विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है।

पोलियो बीमारी क्या है ?
पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, इसकी वजह वायरस है। ये नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है और कुछ ही घंटों में पैरालेसिस का कारण बन सकता है। ये वायरस मुख्य रूप से फिकल ओरल रूट से फैलता है या फिर दूषित पानी या खाना) द्वारा भी फैलता है। इसके शुरूआती लक्षण बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन की अकड़न है।
पोलियो मुख्य रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर अटैक करता है। लेकिन ये किसी भी उम्र के किसी भी व्यक्ति पर अटैक कर सकता है, जिसको टीका नहीं लगा है।
पोलियो का कोई इलाज नहीं है, इसे केवल रोका जा सकता है। पोलियो का टीका कई बार दिया जाता है। पोलियो के दो टीके उपलब्ध हैं- ओरल पोलियो वैक्सीन और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन। ये दोनों ही प्रभावी और सुरक्षित हैं।

पोलियो को लेकर मुख्य बातें-
- वाइल्ड पोलियो वायरस के कारण होने वाले मामलों में 1988 के बाद से 99 फीसदी से अधिक की कमी आई है, अनुमानित 350,000 मामलों से, 2021 में 6 रिपोर्ट किए गए मामले।
- जब तक एक भी बच्चा संक्रमित रहता है, सभी देशों में बच्चों को पोलियो होने का खतरा होता है।
- अधिकांश देशों में, वैश्विक प्रयास ने प्रभावी निगरानी और टीकाकरण प्रणाली का निर्माण करके अन्य संक्रामक रोगों से निपटने की क्षमता का विस्तार किया है।
- पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में एक बच्ची के मल के नमूने से टाइप -1 जंगली पोलियो वायरस का पता चला था। जिससे बच्ची को लकवे की शुरूआत हो गई थी।
- इस साल के मिड में लंदन के गटर से लिये गए कुछ सैंपलों में भी पोलियो वायरस का पता चला था।

स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एक वेक-अप कॉल
विशेषज्ञों का कहना है कि अमीर देशों में वीडीपी के मामले - अफगानिस्तान, पाकिस्तान, मलावी और मोजाम्बिक में वाइल्ड पोलियो के हाल में हुए प्रकोपों के साथ-साथ दिखाते हैं कि कैसे वायरस कोविड -19 के कारण वैक्सिनेशन प्रोग्राम में रूकावट का फायदा उठा रहा है,लोगो का वैक्सीन ना लगवाना, युद्ध और जलवायु से संबंधित आपदाएं वे चेतावनी देते हैं कि ये स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एक वेक-अप कॉल है, जिसने 1988 में एक ऐसी बीमारी को मिटाने के लिए एक वैश्विक अभियान शुरू किया, जो बच्चों को मार सकती है और अक्षम कर सकती है।



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