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हर्पीज एक सामान्य वायरस है जो आपके जननांगो और मुंह में घाव के रुप में उभरकर खतरनाक संक्रमण का रुप ले सकते हैं। ये दर्दनाक होने के साथ आपके लिए कष्टदायक भी हो सकता है। जिसकी वजह से आपकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। अगर समय रहते है इनका इलाज करवा दिया जाए तो इन्हें फैलने से रोका जा सकता है।
हर्पीज दो अलग-अलग लेकिन समान वायरस के कारण होते है: हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 1 (HSV-1) और हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 2 (HSV-2)। ये दोनों ही वायरस आपके योनी, गर्भाशय ग्रीवा, गुदा, लिंग, अंडकोश, नितंब, भीतरी जांघों, होंठ, मुंह, गले और आपकी आंखों के आसपास वालें हिस्सों में घाव के रुप में उभरकर संक्रमण फैला सकते हैं। आइए जानते हैं इस यौन संचारित रोग के बारे में।

कैसे फैलता है हर्पीस?
हर्पीस, संक्रमित व्यक्ति के त्वचा से त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है। अक्सर ये संक्रमण, वजाइनल सेक्स, ओरल सेक्स, एनल सेक्स और किसिंग के जरिए फैलता है। हर्पीस के कारण शरीर में फफोले, घाव और दाद-खुजली जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। शुरु में कई लोग घाव पर गौर नहीं करते हैं जिस वजह से वो इस संक्रमण को पहचान नहीं पाते हैं। ये संक्रमण कितना खतरनाक हो सकता है इस बात का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि संक्रमण के लक्षण उसके बावजूद भी संक्रमण फैलता है।

जानें जेनेटाइल और ओरल हपीर्स में अंतर
हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 1 (HSV-1) और हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 2 (HSV-2)। ये दो तरह के हर्पीज के प्रकार होते हैं। अगर होंठ या इसके आसपास के हिस्सों में घाव बनना शुरु हो जाता है तो ये हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 1 (HSV-1) के लक्षण होते हैं और इसे कोल्ड सोर (Cold Sore) भी कहते है। ये संक्रमण ओरल सेक्स , संक्रमित व्यक्ति के किस करने, झूठा खाने, बर्तन और टूथ ब्रश का इस्तेमाल करने से हो सकता है।

हर्पीस होने पर क्या खाएं
हर्पीस जैसे संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए खानपान पर बदलाव लाना भी जरुरी है। इसलिए इस समय खानपान पर जरुर ध्यान दें।
आइए जानते है कि इस दौरान क्या खाएं।
- खूब सारा पानी पीएं।
- तरल पदार्थों का सेवन ही करें।
- अंकुरित भोजन खाएं।
- हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।
- ताजे और रसीले फल खाएं।

ये घरेलू उपाय अजमाएं
ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल एक प्रकार का एंटीबैक्टीरियल एजेंट है जो हर्पीस के वायरस द्वारा होने वाले संक्रमण से लड़ने में सहायक होता है।ऑलिव ऑयल में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंटस संक्रमण को आगे फैलने से रोकते हैं। हर्पीस को ठीक करने के अलावा ऑलिव ऑयल संक्रमण से प्रभावित हुए त्वचा को भी आराम पहुंचाता है। यह सक्रिय एंटीवायरल घटक ओलेयुरोपिन है। इसे कॉटन की मदद से लगाया जा सकता है।

शहद
हर्पीस के घरेलू उपाय में शहद बहुत अहम उपाय माना जाता है। शहद में मौजूद गुण हर्पीस से लड़ने का कार्य करते हैं।

आइस पैक
हर्पीस के घरेलू उपाय में आइस पैक बहुत मददगार होता है। आइस को किसी कॉटन में लपटेकर आप प्रभावित क्षेत्र में सिंकाई करें। आइस पैक से सिंकाई करने से हर्पीस के दाने दबकर कम होने लगते हैं। इससे होने वाली खुजली से और जलन से राहत मिलती है।

एलोवेरा जेल
हर्पीस के उपचार में एलोवेरा जेल लगाना बहुत फायदेमंद हो सकता है। एलोवेरा जेल आप खरीदकर या नेचुरल जेल का उपयोग करके कर सकते हैं। यह सूजन कम करने में भी मदद करता है। इसे दिन में दो से तीन बार उपयोग में लाना चाहिए।

ब्लैक टी
ब्लैक टी में कुछ एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल गुण होते हैं जिन्हें थियाफ्लेविन कहा जाता है। इसे हर्पीस वाली जगह पर लगाने से आपके लक्षणों में सुधार हो सकता है। ब्लैक टी का उपयोग करते समय उसमें नींबू, पुदीना, दालचीनी, अदरक और कैमोमाइल जैसी चीजें शामिल कर सकते हैं।

हर्पीस के दौरान करें परहेज
- इस दौरान नए टूथब्रश का प्रयोग करें।
- बाहर निकलने से पहले जिंक ऑक्साइड से युक्त बाम का प्रयोग जरूर करें।
- किसी से भी अपने होठों से जुड़े प्रोडक्ट शेयर न करें।
- शारीरिक संबंध बनाते समय केवल लेटेक्स कंडोम का इस्तेमाल करें।
- अपना कप या ग्लास किसी से साझा न करें।
- कॉटन के अंडरगारमेंट्स और ढीले कपड़े पहनें।
- हर्पीस के घावों को बार-बार न छूएं।
- अपनी यूज की गई रुमाल को गर्म पानी में साफ करें।
- किसी प्रकार के जननांग संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के साथ यौन संबंध न बनाएं।



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