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पौरुष शक्ति बढ़ाता है चोपचीनी, जानें इस औषधि के बारे में और अन्य फायदे
कुछ लोग चोपचीनी को चोबचीनी भी कहते हैं। क्या आपको पता है कि चोपचीनी क्या है, और चोबचीनी के फायदे क्या-क्या हैं? अधिकांश लोगों को चोपचीनी के फायदे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती, इसलिए वे चोबचीनी (चोपचीनी) से लाभ नहीं ले सकते। भारत में चोपचीनी का प्रयोग मसाले के रूप में होता है, लेकिन इसके अलावा भी चोबचीनी के फायदे और भी हैं। चोपचीनी का पौधा कांटेदार, मोटे प्रकंद वाला और फैला होता है। यह जमीन पर फैलते हुए बढ़ता है। इसके पत्ते नुकीले, अण्डाकार होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के तथा आकार में छोटे होते हैं। इसके फल चमकीले लाल रंग के, गोलाकार मांसल और रसयुक्त होते हैं
आयुर्वेद के अनुसार, चोपचीनी एक बहुत ही उत्तम जड़ी-बूटी है, और इसके उपयोग द्वारा अनेक तरह के रोगों की रोकथाम की जा सकती है। आप चोपचीनी के फायदे सिर दर्द, यौन रोग, जोड़ों के दर्द, चर्म रोग के अलावा अन्य कई बीमारियों में ले सकते हैं।

यूरिक एसिड की चमत्कारी दवा
चोपचीनी का चूर्ण (यह आपको आयुर्वेदिक स्टोर या पंसारी की दुकान पर मिल जायेगा) आधा चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ ही दिनों में यूरिक एसिड (Uric Acid) ख़त्म हो जाता है। यह उपाय बहुत चमत्कारी है क्योंकि की यह आजमाया हुआ है।

पौरुष शक्ति
चोपचीनी, सोंठ, मोचरस, दोनों मूसली, कालीमिर्च, वायविडंग तथा सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें। बाद में 10 ग्राम की मात्रा में रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी लें इससे पौरुष शक्ति बढ़ेगी और शुद्धिकरण करेगा। इसमें मौजूद रसायन गुण रसायन गुण के कारण यह वीर्यदोष को दूर करने में भी मदद करता है।

स्वप्नदोष की समस्या करें दूर
चोपचीनी के वाजीकर होने के कारण ये शरीर की कमजोरी को दूर कर यह स्वप्नदोष जैसी परेशानियों को भी दूर करता है। इसके नियमित उपयोग से स्वप्नदोष से निजात पाने में मदद मिलती है।

सिफलिस
चोपचीनी का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम लेने से उपदंश में लाभ होता है। उपदंश का जहर अगर ज्यादा फैल गया हो तो चोबचीनी का काढ़ा या फांट शहद मिलाकर पीना चाहिए।

गठिया रोग
चोपचीनी को दूध में उबालकर 3 से 6 ग्राम मस्तंगी, इलायची और दालचीनी को मिलाकर सुबह-शाम रोगी को देने से गठिया के दर्द में आराम मिलता है। चोपचीनी और गावजबान को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े से घुटनों पर मिलाकर मालिश करने से दर्द व हड्डियों की कमजोरी खत्म हो जाती है।

कूल्हे से पैर तक का दर्द
60 ग्राम चोपचीनी को मोटा-मोटा पीसकर रख लें। 200 मिलीलीटर पानी में 6 ग्राम चोबचीनी को रात में भिगोकर रख लें। सुबह उस चोपचीनी को आधा पानी खत्म होने तक उबालें और थोड़ा ठण्डा हो जाने पर पी लें। इससे कुल्हे से पैर तक का दर्द दूर होता है।

दमा के लिए
100 ग्राम चोपचीनी लेकर 800 मिलीलीटर पानी में डालकर आग पर चढ़ा देते हैं। जब 300 मिलीलीटर पानी शेष रह जाए तो उसे उतार लेते हैं। इसे ठंडा करके छान लेते हैं। 25 ग्राम से 75 ग्राम तक यह काढ़ा रोजाना 3-4 बार पीने से श्वास रोग (दमा) ठीक हो जाता है।

ऐसे पहचानें
अच्छे चोपचीनी की पहचान-सबसे अच्छे चोपचीनी का रंग लाल या गुलाबी होता है। स्वाद मीठा होता है। यह चमकदार और चिकना होता है। इसमें गांठें और रेशे कम होते हैं। यह भीतर तथा बाहर से एक ही रंग का होता है। यह पानी में डालने पर डूब जााता है। इसके जो टुकड़े वजन में हल्के और सफेद रंग के हों, उनको कच्चा समझना चाहिए। चोपचीनी रक्त विकार और चर्म रोगों के इलाज के लिए बहुत अधिक उपयोगी माना जाता है।

चोपचीनी के नुकसान
गर्म प्रकृति वाले लोग (जिनका पेट गर्म रहता हो) चोपचीनी का अधिक मात्रा में उपयोग नहीं करें। चोपचीनी का अधिक मात्रा में उपयोग गर्म स्वभाव वालों के लिए हानिकारक होता है। इसके दोषों को दूर करने के लिए अनार का सेवन करे जिससे चोपचीनी के दोषों को दूर करता है।



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