कहीं कोरोना आपके आंख, नाक और गले के लिए ना बन जाए परेशानी का सबब, जरूर करवाएं चेक

जब कोरोनावायरस से उबरने के बाद भी उसके लक्षण व संकेत बने रहते हैं तो उसे लॉन्ग कोविड कहा जाता है। यह लॉन्ग कोविड अपने साथ अन्य कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है। अध्ययनों से पता चला है कि शुरुआती कोविड -19 संक्रमण होने पर लोगों को भरी हुई नाक, चक्कर आना, सुनने की हानि, कानों का बजना और अन्य कई तरह ही प्रॉब्लम्स होती हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि लॉन्ग कोविड -19 से पीड़ित लोगों में 200 से अधिक लक्षण नजर आते हैं, जिसने उनके 10 से अधिक अंगों को प्रभावित किया है। इनमें भी ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें कान, नाक और गले (ईएनटी) की समस्या रही है।

लंबे समय तक कोविड -19 रोगियों द्वारा सामना किए जाने वाले सामान्य ईएनटी प्रॉब्लम्स

लंबे समय तक कोविड -19 रोगियों द्वारा सामना किए जाने वाले सामान्य ईएनटी प्रॉब्लम्स

नाक, नासोफेरींजल या ऑरोफरीन्जियल टिश्यू कोविड संक्रमण के प्राइमरी हार्बर साइट्स के रूप में काम करते हैं। नतीजतन, ऐसे रोगियों में गले में खराश, नाक बंद होना और ठीक से स्मेल ना कर पाना आदि प्रॉब्लम्स होती है। इतना ही नहीं, लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों को लोअर रेस्पिरेटरी सिस्टम में भी प्राब्लम्स होती है। जिसमें उन्हें सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न,

खांसी आदि समस्या हो सकती है। जहां कुछ रोगियों में, ये लक्षण कुछ हफ्तों तक रह सकते हैं, लेकिन यदि वे चार सप्ताह से अधिक जारी रहते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

क्या कहता है अध्ययन

क्या कहता है अध्ययन

वहीं, एक इटैलियन स्टडी में भी यह बताया गया है कि लगभग 10 प्रतिशत कोविड -19 रोगियों में उनके इनिशियल इंफेक्शन ा के एक महीने से अधिक समय बाद भी लगातार गंध के साथ-साथ स्वाद ना आने के लक्षण भी बने रहेंगे। हालांकि, अधिकांश रोगी बिना किसी मेडिकल हेल्प के अपने आप ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में रोगियों में ये लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं, अगर रोगियों को फेशियल पेन व सिरदर्द की समस्या होती है तो यह ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत दे सकते हैं। कोरोनावायरस की दूसरी लहर के दौरान, भारत के विभिन्न हिस्सों के अस्पतालों ने कोविड के ठीक होने वाले रोगियों में ब्लैक फंगस के मामलों के देखा गया था। चूंकि, टेस्ट लॉस वाले रोगियों की यह समस्या कुछ हफ्तों के भीतर ठीक हो जाती है। हालांकि, अगर स्थिति बनी रहती है और किसी भी तरह से उनकी लाइफ क्वालिटी को प्रभावित करती है,

तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

साथ ही, जिन लोगों को अचानक सुनने में परेशानी, ठीक से ना सुनने की समस्या होती है, उन्हें ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श करने की आवश्यकता होती है। सुनने की हानि की सीमा को समझने के लिए एक ऑडियोग्राम किया जा सकता है। अन्य उपचार विकल्पों में ईयरड्रम में स्टेरॉयड इंजेक्शन और ओरल स्टेरॉयड शामिल हैं। याद रखें कि शीघ्र निदान और उपचार से रोग का निदान बेहतर होता है। हाइपोस्मिया और एनोस्मिया जैसी गंध संबंधी समस्याएं अधिकांश रोगियों में आमतौर पर चार सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। कारण यह है कि कोविड -19 संक्रमण गंध संबंधी न्यूरॉन्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है, लेकिन यह सपोर्टिंग सेल्स को प्रभावित कर सकता है। एक बार जब कोरोनावायरस आपके सिस्टम से बाहर हो जाता है, तो सहायक कोशिकाएं सामान्य हो जाती हैं, और फिर आपकी स्मेलिंग पावर पहले की तरह हो जाती हैं।

Story first published: Saturday, October 2, 2021, 9:30 [IST]
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