Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
महिला और पुरूषों पर किस तरह पड़ता है लंग डिसीज का असर, लेख पढ़कर समझिए
भारत में श्वसन रोग के मामले हर गुजरते दिन के साथ बढ़ते जा रहे हैं। महज वायु प्रदूषण के कारण ही लोग कई तरह की सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त है। आंकडे़ बताते हैं कि लगभग 33.6 प्रतिशत सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) 25.8 प्रतिशत घरेलू वायु प्रदूषण और 21 प्रतिशत धूम्रपान के कारण होता है। यह वास्तव में एक रिस्क फैक्टर है, जो महिलाओं व पुरूषों दोनों के फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और कई तरह की लंग संबंधी बीमारियों की वजह बन सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम लंग डिसीज के बारे में और उसका महिलाओं प पुरूषों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव के बारे में बात कर रहे हैं-

महिलाओं व पुरूषों को अलग तरह से करता है प्रभावित
बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि लंग डिसीज पुरूषों व महिलाओं दोनों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं। ऐसा विभिन्न अध्ययनों से साबित भी हो चुका है। डब्ल्यूएचओ की मानें तो महिलाओं में लंग से जुड़ी क्रॉनिक डिसीज होने की संभावना अधिक होती है, जबकि विश्व स्तर पर लगभग 9 प्रतिशत महिलाओं धूम्रपान करती हैं, जबकि इसकी तुलना में पुरूषों का प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत हैं।
इतना ही नहीं, 55 साल से कम उम्र की महिलाओं में फेफड़ों की समस्या ज्यादा होती है। इसके अलावा, वृद्ध महिलाओं को अस्थमा का खतरा अधिक होता है। फेफड़ों से जुड़ी क्रानिक डिसीज वाली महिलाओं में सांस की तकलीफ की घटना अधिक होती है। ऐसी महिलाओं को सांस लेने में अधिक तकलीफ होती है, जबकि उनका म्यूकस प्रोडक्शन रेट सीओपीडी से पीड़ित पुरूषों की अपेक्षा कम होता है।

क्यों होता है अलग-अलग प्रभाव
फेफड़ों की बीमारी पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग कैसे प्रभावित करती है, यह समझने के लिए कई अध्ययन किए गए है, लेकिन अभी तक इसका सटीक कारण नहीं पता चल पाया है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि पुरुषों और महिलाओं में फेफड़ों के आकार में अंतर ही फेफड़ों से संबंधित समस्याओं और लक्षणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक वयस्क महिला का लंग वाल्यूम समान ऊंचाई और उम्र के पुरुषों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम होती है। जिसके कारण महिलाओं का एयरवे पुरुषों की तुलना में संकरा होता है। वहीं एक अन्य थ्योरी यह भी है कि एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

महिला हार्मोन और लंग समस्याएं
चूंकि ऐसा माना जाता है कि महिला हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन आदि महिलाओं की ओवर ऑल को प्रभावित करते हैं तो इसका असर उनके फेफड़ों पर भी पड़ता है। हालांकि, अभी तक इस बात का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है कि महिला हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) की फेफड़ों की बीमारियों से कोई सीधा संबंध है। हालांकि, कई अध्ययनों से यह अवश्य पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में फेफड़ों की बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सिस्टिक फाइब्रोसिस और इडियोपैथिक पल्मोनरी आर्टीरीअल हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां होना अधिक कॉमन हैं। इसके अलावा, महिलाओं में सीओपीडी की शुरुआत जल्दी होने की संभावना अधिक होती है।

ऐसे रखें लंग हेल्थ का ख्याल
यूं तो लंग डिसीज के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन फिर भी किसी व्यक्ति के लिए यह अनुमान लगाना कठिन है कि फेफड़ों से संबंधित परेशानियों को कौन सी स्थिति विकसित कर सकती है। चूंकि, पुरुष और महिला दोनों को ही इसका खतरा रहता है, ऐसे में समय रहते अपने फेफड़ों की हेल्थ का ख्याल रखा जाना चाहिए। ऐसे कई टिप्स हैं, जो आपकी लंग हेल्थ का ख्याल रख सकते हैं और आपको लंबे समय तक किसी भी तहर की लंग संबंधी परेशानी से बचा सकते हैं-
• धूम्रपान ना करें
• नियमित रूप से व्यायाम करें
• किसी भी तरह के पॉल्यूटेंट के संपर्क को कम करें
• एक्सरसाइज के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर फॉलो करें
• हेल्दी और पौष्टिक फूड को प्राथमिकता दें



Click it and Unblock the Notifications