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केरल में मच्छरों से फैलने वाले इस वायरस का मंडराया खतरा, जानें वेस्ट नाइल वायरस के बारे में
केरल में टोमैटो फ्लू के बाद अब वेस्ट नाइल वायरस का खतरा मंडराने लगा है। केरल में 47 साल के एक व्यक्ति की वेस्ट नाइल फीवर से मुत्यु हो गई। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जिस व्यक्ति की इससे मौत हुई है, उसमें 17 मई को बुखार और दूसरे लक्षण दिखने शुरू हुए थे। लक्षण सामने आने...

वेस्ट नाइल वायरस क्या है-
वेस्ट नाइल वायरस एक मच्छर जनित आरएनए वायरस है, जो कि एक वायरल इंफेक्शन का कारण बनता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह फ्लैविवायरस जीनस का सदस्य है और फ्लैविविरिडे परिवार के जापानी एन्सेफलाइटिस एंटीजेनिक कॉम्प्लेक्स से संबंधित है। इस वायरस इंफेक्शन में मच्छरों की क्यूलेक्स प्रजाति वायरस को फैलाने में एक प्रमुख वाहक के रूप में काम करती है और इंसानों को काट कर वायरस को उनके खून में मिला देती है, जिससे वे इस वायरल इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं।
इस वायरस ने पहली बार 1937 में युगांडा के वेस्ट नाइल जिले में एक महिला को बीमार किया था। 1953 में नील डेल्टा क्षेत्र में पक्षियों जैसे कि कौवे और कबूतर में इसकी पहचान की गई थी। 1999 में ये वायरस इज़राइल, ट्यूनीशिया, न्यूयॉर्क, अमेरिका में कनाडा से वेनेजुएला तक फैल गया और इस तरह ये वायरस लोगों की नजर में आया।

वेस्ट नाइल वायरस इंसानों में कैसे फैलता है?
आमतौर पर इस वायरस के इंसान में फैलने की वजह मच्छरों को माना जाता है। ये वायरस पक्षियों में फैलता है। मच्छर जब किसी संक्रमित पक्षी को काटते हैं तो ये वायरस उनमें आ जाता है और जब यही संक्रमित मच्छर इंसानों को काटते हैं तो इससे इंसान संक्रमित हो जाते हैं। हालांकि, कई बार दूसरे जानवरों से भी इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। कई बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ब्लट ट्रांसफ्यूजन और ब्रेस्ट मिल्क से भी ये वायरस फैल सकता है। अब तक मां से बच्चे में इस वायरस के फैलने का एक मामला सामने आया है। हालांकि, अभी तक इंसान से इंसान में इस वायरस के फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। संक्रमितों का इलाज करने वाले डॉक्टरों में ये नहीं फैलता है।
हालांकि, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह पक्षियों सहित संक्रमित जानवरों को खाने से नहीं फैलता है। बल्कि, मांस को पूरी तरह से नहीं पकाने और फिर इसे खाने से फैलता है। इसके अलावा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसे फैलने की संभावना भी बेहद कम है।

वेस्ट नाइल वायरस के लक्षण
80% संक्रमित लोगों में इसके लक्षण कुछ खास नजर नहीं आते हैं। बाकियों में, ये बुखार के रूप में विकसित होता हैं, जिसे वेस्ट नाइल फीवर या गंभीर वेस्ट नाइल रोग कहा जाता है। इसके अलावा 20% मामलों में लोगों के अंदर
- बुखार
-सिरदर्द
-थकान
-शरीर में दर्द
-मतली
- शरीर में दाने
- ग्रंथियों में सूजन शामिल हैं।
-गंभीर संक्रमण होने से एन्सेफलाइटिस, मेनिन्जाइटिस, लकवा और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।
यह अनुमान लगाया गया है कि वेस्ट नाइल वायरस से संक्रमित 150 में से लगभग 1 व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। इस गंभीर बीमारी से उबरने में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं, जो कि उनके स्वास्थ्य और इम्यून सिस्टम की मजबूती पर निर्भर करता है।

वेस्ट नाइल वायरस से कैसे बचें
प्राथमिक रूप से मच्छरों के काटने से खुद को बचाकर इस वेक्टर जनित बीमारी को रोका जा सकता है। इसके अलावा आप कुछ अन्य तरीकों से भी बच सकते हैं। जैसे कि
-ऐसे कपड़े पहने जिसमें आपको मच्छर ना काटे। कोशिश करें कि हल्के रंग के पूरी बाजू वाले कपड़े पहनें।
-घर के आस-पास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करते हैं और इसके लिए उन जगहों की खास साफ-सफाई करें जहां पानी जमा होता हो।
-पानी से भरे कंटेनरों को कवर करके रखें।
-पानी की निकासी वाली जगहों को साफ रखें और यहां डिसइंफेक्टेड डालते रहें।
-यार्ड और बगीचों की साफ-सफाई रखें।
इसलिए अब बारिश का मौसम आते ही इस बीमारी से बचाव की कोशिश करना ज्यादा जरूरी हो गया है।



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