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भारत में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या : ये आकड़ें बता रहे स्थिति गंभीर है
WHO के अनुसार, भारत में आत्महत्या एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। देश में हर साल एक लाख से ज्यादा लोगों की जान खुदकुशी से जाती है। पिछले दो दशकों में, आत्महत्या की दर 7.9 से बढ़कर 10.3 प्रति 100,000 हो गई है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के अमुसार, भारत में सुसाइड केस की दर में व्यापक अंतर है। अगर हम साउथ स्टेट की बात करें तो केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में आत्महत्या की दर 15 है, वहीं उत्तरी राज्यों जैसे पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और जम्मू-कश्मीर में आत्महत्या की दर 3 है।
हर आत्महत्या एक व्यक्तिगत त्रासदी होती है। जब वो इंसान अपनी समय से पहले जान ले लेता है। इससे उसके जीवन से जुड़े लोगों पर कापी प्रभाव पड़ता है। एनसीआरबी डेटा के अनुसार, हर साल, 1,00,000 से अधिक हमारे देश में लोग आत्महत्या करते हैं। आत्महत्या के विभिन्न कारण जैसे पेशेवर, करियर की समस्याएं, भावना, अलगाव, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक विकार, शराब की लत, आर्थिक हानि, पुराना दर्द आदि। पुलिस से आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2022 की रिपोर्ट में 2021 में 1.6 लाख से अधिक आत्महत्याओं की सूचना दी गई है, जो पिछले साल के आंकड़े से 7.2 प्रतिशत अधिक है। जो डेटा सामने आया है वो फैमली मैटर्स और किसी प्रकार की बीमारी को लेकर आत्महत्या के दो सबसे प्रमुख कारणों में से है।

भारत में ज्यादातर सुसाइड 30 वर्ष से कम के लोग करते हैं-
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के अमुसार, भारत में ज्यादातर सुसाइड (37.8%) 30 वर्ष से कम एज के लोगों द्वारा किया जाता है। भारत में 71 फीसदी आत्महत्या 44 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों द्वारा होती है, जो हमारे समाज पर एक बड़ा सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक बोझ डालता है। वहीं युवा और महिलाओं के सुसाइड रेट समान है। पुरुष-महिला अनुपात 1.4: 1 है। महिलाएं जहर (36.6%), फांसी (32.1%) और आत्मदाह (7.9%) द्वारा सुसाइड करती है।
अगर इन आंकड़ों को एक्सट्रपलेशन किया जाए, तो ये बताता है कि भारत में हर साल कम से कम 5 लाख आत्महत्याएं होती हैं। अनुमान है कि हमारे देश में 60 में से एक व्यक्ति आत्महत्या से के बारें में सोचता है और प्रयास करता है। इस प्रकार, आत्महत्या एक प्रमुख सार्वजनिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए ठोस काम करने की जरूरत होती है।

दिल्ली में आत्महत्या की सबसे अधिक संख्या
एनसीआरबी डेटा के अनुसार, महाराष्ट्र 18,916, 13,493 तमिलनाडु में आत्महत्या, 12,665 आत्महत्याएं पश्चिम बंगाल में, मध्य प्रदेश में 12,457 आत्महत्याएं होती हैं। वहीं कर्नाटक में 11,288 आत्महत्याएं होती है। दिल्ली, जो सबसे अधिक आबादी वाला केंद्र शासित प्रदेश है, आत्महत्या की सबसे अधिक संख्या (2,526) यहां दर्ज हुई है। इसके बाद पुडुचेरी (493) का स्थान है।
भारत में आत्महत्या को एक सामाजिक समस्या के रूप में माना जाता है और इसलिए, मेंटल हेल्थ को पारिवारिक संघर्षों, सामाजिक परेशानियों के साथ बराबर कर दिया जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या का कारण लगभग 43% आत्महत्याओं के लिए मालूम नहीं है, जबकि बीमारी और पारिवारिक समस्याएं लगभग 44% आत्महत्याओं का कारण बनती हैं।

सुसाइड दर में सर्वाधिक संख्या गृहणियों की
एनसीआरबी के अनुसार, कुल 97,613 पुरुष आत्महत्याओं में से, प्रतिदिन अधिकतम आत्महत्याएं वेतनभोगी (29,092) उसके बाद स्वरोजगार वाले व्यक्ति (14,319) और बेरोजगार व्यक्ति (11,599)। कुल 41,493 महिलाओंमें 2019 के दौरान आत्महत्या कर चुके हैं। आत्महत्या करने वाली महिलाओं में से, सर्वाधिक संख्या (21,359) गृहणियों की थी। इसके बाद छात्र (4,772) और दैनिक वेतन भोगी कमाने वाले (3,467)। कुल 17 ट्रांसजेंडरआत्महत्या कर चुके हैं।
वहीं तलाक, दहेज, प्रेम संबंध, शादी रद्द होना, (भारत में व्यवस्थित विवाह की प्रणाली के अनुसार), नाजायज गर्भावस्था, विवाहेतर संबंध और विवाह के मुद्दे से संबंधित समस्याएं इसमें मुख्य भूमिका निभाती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन, घरेलू हिंसा पर जनसंख्या-आधारित अध्ययन में, यह पाया गया कि 64% महिलाओं की घरेलू हिंसा और आत्महत्या के विचार के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध था। जनसंख्या आधारित अध्ययन भारत के विभिन्न शहरों में किया गया है। गरीबी, बेरोजगारी, कर्ज और शैक्षिक समस्याएं भी आत्महत्या से जुड़ी हैं। भारत में किसानों की आत्महत्या की हालिया घटनाओं ने समाज और शासन को उभारा है।

मेंटल डिसऑर्डर और सुसाइड
मानसिक विकार आत्महत्या का प्रमुख कारण है। अधिकांश अध्ययनों से पता चलता है कि आत्महत्या से मरने वालों में से लगभग 90% मानसिक विकार से ग्रस्त थे। दो केस नियंत्रण अध्ययन भारत में चेन्नई और बैंगलोर में किये गये थे। जिसमें आत्महत्या से मरने वालों में, चेन्नई में 88% और बैंगलोर में 43% लोगों को डायग्नोसेबल मेंडट डिसऑर्डर था। हालांकि, बैंगलोर अध्ययन में क्लिनिकल एवुल्यूशन नहीं किया गया था।

आत्महत्या की रोकथाम
ये सोचना की आत्महत्या को रोका नहीं जा सकता, लेकिन ये सही नहीं हैं, रूक नहीं सकती तो लेकिन इसके आंकड़े कम हो सकते हैं। कईयों का मानना होता है कि आत्महत्या एक व्यक्तिगत मामला है जिसे निर्णय लेने के लिए व्यक्ति पर छोड़ दिया जाना चाहिए। इन सब को देखते हुए भारत सरकार देश में की आत्महत्या को रेश्यों को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए। साथ ही सरकार द्वारा राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति भी बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही ये मीडिया की भी जिम्मेदारी है कि वे इस समस्या पर ध्यान देकर अपने दर्शकों को जाकरूक करने में मदद कर सकें। संकट के समय, मीडिया को सही जानकारी को बढ़ावा देना चाहिए। किसी भी खबर को सनसनीखेज ना बनाते हुए..उसके नकरात्मकता पर जरूर गौर करना चाहिए। सामाजिक जिम्मेदारी भी लोगों को इस संबंध में उठानी चहिए। अपने आसपास अगर ऐसा किसी के साथ लगता है तो उस पर ध्यान देकर उसे इससे उबरनें में मदद कर सकें। मेंटल हेल्थ और सुसाइड प्रिवेंशन संबंधित हेल्प आप इस प्रकार से पा सकते हैं-

Hepline Numbers-
1. COOJ Mental Health Foundation (COOJ)- Helpline: 0832-2252525
2. Parivarthan- Helpline: +91 7676 602 602 3. Connecting Trust- Helpline: +91 992 200 1122 | +91-992 200 43054. Roshni Trust- Helpline: 040-66202000, 040-662020015. Sahai - 080-25497777, [email protected]यह हेल्पलाइन मेडिको पास्टरल एसोसिएशन (एमपीए) द्वारा प्रदान की जाने वाली एक सेवा है और प्रशिक्षित सक्रिय स्वयंसेवकों द्वारा संचालित है। यदि किसी कॉल करने वाले को आमने-सामने परामर्श की आवश्यकता होती है, तो उन्हें एमपीए परामर्शदाताओं के पास भेजा जाता है जो पूरी तरह से प्रशिक्षित होते हैं।Sumaitri-011-23389090, [email protected]उदास, व्यथित और आत्महत्या के लिए एक संकट हस्तक्षेप केंद्र। हेल्पलाइन कॉल करने वालों, आगंतुकों या लिखने वालों को बिना शर्त और निष्पक्ष भावनात्मक समर्थन प्रदान करती है।
Lifeline - [email protected] - 033-24637401 / 033-24637432
लाइफलाइन एक मुफ्त टेली-हेल्पलाइन प्रदान करती है जो निराशा, उदास या आत्महत्या करने वाले लोगों को भावनात्मक सहायता प्रदान करती है। पूर्व नियुक्ति के साथ आमने-सामने मित्रता भी उपलब्ध है।


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