स्‍वीट कॉर्न या देसी भुट्टा: सेल‍िब्रेटी न्‍यूट्रिशियन से जानें क्‍या है सेहत के ल‍िए बेस्‍ट

मॉल में मिलने वाला स्‍वीट स्‍वीट कॉर्न हो या सड़क क‍िनारे मिलने वाला देसी भुट्टा, दोनों का ही अपना अलग मजा है। पर जब बात स्‍वास्‍थय या स्‍वाद की आती है तो हमें दोनों ही क‍िस्‍में एक दूसरे से बेहतर लगती है। ऐसे में हम कई बार कंफ्यूज हो जाते है क‍ि हमें क्‍या खाना चाह‍िए- स्‍वीट कॉर्न या भुट्टा? सेल‍िब्रेटी न्‍यूट्रिशन‍िस्‍ट मुनमुन गनेरीवाल ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्‍ट शेयर करके भुट्टा (रोस्‍टेड कॉर्न) और स्‍वीट कॉर्न के बीच क्‍या फर्क है और दोनों में से सेहत के ल‍िहाज से क्‍या ज्‍यादा हेल्‍दी है।

कम पोषक तत्‍व होते है स्‍वीटकॉर्न में

कम पोषक तत्‍व होते है स्‍वीटकॉर्न में

मुनमुन गनेरीवाल ने इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट करके कहा है क‍ि स्‍वीट कॉर्न इम्‍पोर्टेड हाइब्रिड बीजों से उगाया जाता है, जिसकी फसल के ल‍िए अधिक संसाधनों की आवश्‍यकता होती है। इस प्रक्र‍िया में ज्‍यादात्तर पोषक तत्‍व नष्‍ट हो जाते हैं। स्‍वीट कॉर्न में शुगर की मात्रा अधिक होती है, क्‍योंक‍ि इसकी न्‍यूट्रिशंस डेंसिटी को कॉम्‍प्रोमाइज्‍ड क‍िया होता है। इसें उगाने में कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है, इसके अलावा इसमें नाममात्र का फाइबर होता है।

देसी भुट्टा खाने के फायदे

देसी भुट्टा खाने के फायदे

न्‍यूट्रिशन‍िस्‍ट एक्‍सपर्ट अपनी पोस्‍ट में बताती है क‍ि देसी भुट्टा में 3000 से अधिक किस्मों में मिलता है। भुट्टा, पानी और खाद के बहुत कम संसाधनों के साथ उगाया जा सकता है। इसे उगाने के लिए बहुत कम कीटनाशकों का कम उपयोग किया जाता है। साथ ही स्वीट कॉर्न की तरह देसी भुट्टा में शुगर की मात्रा भी अधिक नहीं होती, क्योंकि इसकी मिठास स्टार्च में कंवर्ट हो जाती है।

उन्होंने बताया है क‍ि देसी कॉर्न में फाइबर की मात्रा भी रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार करके पाचन तंत्र को अच्छी स्थिति में रखती है।

दोनों में क्‍या है बेहतर

दोनों में क्‍या है बेहतर

दोनों के बारे में जानकारी देने के बाद एक्सपर्ट ने सेहत के लिए देसी भुट्टे को अधिक फायदेमंद बताया। यानी अगर आप स्वाद को भूल सेहत को ज्‍यादा तरजीह देते हैं तो स्वीट कॉर्न के अपोजिट भुट्टा ज्यादा हेल्दी ऑप्शन है। साबुत मक्का को पोषक तत्वों का खजाना कहा जाता है।

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