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Covid-19: क्या है ब्लैक फंगस, जिससे निकालनी पड़ रही है संक्रमितों की आंख, जानें कोरोना से इसका कनेक्शन?
देश में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के नए मामलों के साथ इस माहमारी की वजह से मरीजों में कई तरह की परेशानियां देखने को मिल रही हैं। अब इस बीमारी के साथ ही दिल्ली में दुलर्भ फंगल इंफेक्शन के मामले भी देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली के सर गंगा अस्पताल में दो दिनों के भीतर घातक म्यूकोर्माइकोसिस फंगस के छह मामले सामने आए हैं।
गत दिसंबर में भी दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई में इस दुलर्भ संक्रमण के कुछ मामले सामने आए थे। जिसमें ये ब्लैक फंगस मरीजों की आंखों पर सीधा अटैक कर रहा था। आइए जानते है कि ये नई बीमारी है क्या? इसके लक्षण क्या हैं? ये कितनी खतरनाक है? अगर ये बीमारी किसी को हो जाए तो मौत की आशंका कितनी है? इससे कैसे बच सकते हैं?

क्या है ब्लैक फंगस?
ये एक फंगल डिजीज है। जो म्यूकरमायोसिस नाम के फंगाइल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्यूनिटी को कम करती हों या शरीर के दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

ये शरीर में कैसे पहुंचता है ?
ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया है तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता है तो आखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैले हैं, शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।

ब्लैक फंगस कहां पाया जाता है?
ये बहुत ही गंभीर, लेकिन एक रेयर इंफेक्शन है। ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक पदार्थों में, जैसे पत्तियों, सड़ी लकड़ी और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगस पाया जाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?
फंगस नाक में जाने के बाद कुछ इस तरह के लक्षण सामने आ सकते हैं-
नाक की अंदरुनी दीवारों पर सूखापन आना,
नाक के अंदर काली और भूरे रंग की पपड़ियां जमना,
नाक बंद होना शुरू हो जाना,
ऊपर वाले होठों और गालों का सुन्न होना शुरू हो जाना,
आंखों में सूजन आना,
आंखों का लाल होना,
सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, और साइनस कंजेशन।

ये फंगस कितना खतरनाक है?
ये कम्युनिकेबल डिजीज नहीं है, यानी ये फंगस एक मरीज से दूसरे मरीज में नहीं फैलता है। लेकिन ये फंगस हवा में रहता है। यही आपको फफूंदी की शक्ल में ब्रेड पर और पेड़ के तनों पर काले रूप में दिखती है। ये फंगस आपकी नाक से होते हुए बलगम में मिलकर आपकी नाक की चमड़ी में चला जाता है। इसके बाद ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती हुई सब कुछ खराब करते हुए दिमाग तक चली जाती है। इसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत है।'

इससे बचा कैसे जा सकता है?
- कंस्ट्रक्शन साइट से दूर रहें, डस्ट वाले एरिया में न जाएं, गार्डनिंग या खेती करते वक्त फुल स्लीव्स के ग्लव्ज पहनें, मास्क पहनें, उन जगहों पर जाने बचें जहां पानी का लीकेज हो, जहां ड्रेनेज का पानी इकट्ठा हो वहां न जाएं।
कोरोना से इसका कनेक्शन
- ये उन लोगों को होता है जो डायबिटिक हैं, जिन्हें कैंसर है, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ हो, जो लंबे समय से स्टेरॉयड यूज कर रहे हों, जिनको कोई स्किन इंजरी हो, प्रीमेच्योर बेबी को भी ये हो सकता है।
- जिन लोगों को कोरोना हो चुका है उन्हें पॉजिटिव अप्रोच रखना चाहिए। कोरोना ठीक होने के बाद भी रेगुलर हेल्थ चेकअप कराते रहना चाहिए। अगर फंगस से कोई भी लक्षण दिखें तो तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इससे ये फंगस शुरुआती दौर में ही पकड़ में आ जाएगा और इसका समय पर इलाज हो सकेगा।
- इलाज में थोड़ी सी भी देरी से मरीज के शरीर का वो हिस्सा जहां ये फंगल इंफेक्शन हुआ है, सड़ने लगता है। इस स्थिति में उसे काटकर निकालना पड़ सकता है। ऐसा नहीं करने पर मरीज की जान भी जा सकती है।



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