रिफांइड अनाज बन सकता है प्रीमेच्योर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज का कारण, जानें कैसे

एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि रिफांइड अनाज खाने से समय से पहले हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है , जबकि साबुत अनाज का सेवन इसके जोखिम को कम करता है। रिसर्चस ने पाया कि रिफांइड अनाज का अधिक सेवन ईरानी आबादी में समय से पहले कोरोनरी ऑर्टरी डिज़ीज के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जबकि साबुत अनाज खाने से इसका जोखिम कम था। यहां हम आपको कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज पर हुई रिसर्च से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे है।

्रीमेच्योर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज

्रीमेच्योर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज

जब हार्ट तक ब्लड ऑक्सीजन और न्यूट्रीएंट्स सही मात्रा में नहीं पहुंच पाते हैं, तो ऐसी स्थिति में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) या कोरोनरी धमनी की बीमारी होने की संभावना ज्यादा होती है। बैड कोलेस्ट्रॉल की वजह से भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या शुरू हो जाती है। जब प्लाक जमा हो जाता है, तो वे आपकी कोरोनरी आर्टरी को छोटा कर देता है, जिससे हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। कम ब्लड की वजह से सीने में दर्द, सांस की तकलीफ या अन्य कोरोनरी आर्टरी डिजीज के लक्षण हो सकते हैं। जबकि प्रीमेच्योर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज (पीसीएडी) में कोरोनरी आर्टरीज का एथेरोस्क्लोरोटिक संकुचन 55 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में या 65 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में होता है। शुरूआात में इसके लक्षणों को समझना बहुत मुश्किल है। लेकिन पीसीएडी से सीने में दर्द (एनजाइना) और दिल का दौरा पड़ सकता है, जिससे आर्टरी की दीवार सिकुड़ सकती है। पीसीएडी के जोखिम कारकों में स्मोकिंग, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी और डायबिटीज शामिल हैं।

क्या कहती है रिसर्च

क्या कहती है रिसर्च

पीसीएडी के साथ 2099 लोगों को पूरे ईरान में विभिन्न शहरों की कैथीटेराइजेशन लैब वाले अस्पतालों से शामिल किया गया। जो कोरोनरी एंजियोग्राफी ( 70 वर्ष की आयु की महिलाएं और पुरुष 60) से गुजर चुके थे। कुल मिलाकर, सामान्य कोरोनरी आर्टरी वाले 1,168 रोगियों को कंट्रोल ग्रुप में शामिल किया गया था, जबकि कम से कम एक कोरोनरी आर्टरी में 75% के बराबर या उससे अधिक रुकावट वाले CAD वाले 1,369 रोगियों और बाईं मुख्य कोरोनरी आर्टरी में 50% रूकावट वालों का ग्रुप बनाया था। प्रतिभागियों को आहार संबंधी व्यवहार का मूल्यांकन करने और साबुत अनाज और रिफांइड अनाज के सेवन और हृदय रोग के पूर्व निदान के बिना व्यक्तियों में पीसीएडी के जोखिम के बीच संबंध का मूल्यांकन करने के लिए आहार मूल्यांकन के लिए एक खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली दी गई थी। जिसमें ये बात सामने आई कि, रिफांइड अनाज का अधिक सेवन पीसीएडी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जबकि साबुत अनाज का सेवन पीसीएडी के जोखिम को कम करने वाला था।

साबुत और रिफांइड अनाज में अंतर

साबुत और रिफांइड अनाज में अंतर

साबुत अनाज को होल ग्रेन्स के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें मुख्य तौर पर तीन चीजें मौजूद होती है, अनाज का चोकर, एण्डोस्पर्म और रोगाणु। ये फसल का वास्तविक रूप होता है। जबकि रिफांइड अनाज भी एक प्रकार का अनाज ही होता है, जिसमें से रोगाणु और चोकर को हटा दिया जाता है, जो अनाज को एक फाइन टेक्सचर देता है और अनाज की शेल्फ लाइफ का विस्तार करता है। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि रिफाइनिंग प्रक्रिया फाइबर सहित कई पोषक तत्वों को हटा देती है। इसमें कई कारक शामिल हैं कि लोग साबुत अनाज के बजाय रिफांइड अनाज का उपभोग क्यों कर रहे हैं और ये मामले लोगों के बीच भिन्न हैं, लेकिन कुछ सबसे महत्वपूर्ण कारकों में अर्थव्यवस्था और आय, नौकरी, शिक्षा, संस्कृति, आयु शामिल हैं।

रिफांइड अनाज में शामिल है:

रिफांइड अनाज में शामिल है:

मकई की रोटी

मक्कई के फलेक्स

ब्रेडक्रम्बस

बिस्कुट

केक

सफ़ेद ब्रेड

सफ़ेद चावल

नूडल्स

Story first published: Sunday, October 9, 2022, 10:00 [IST]
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