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महाशिवरात्रि : शिव के मस्तक पर शीतलता के लिए बनाया जाता है सफेद चंदन का त्रिपुंड, जानें इसकी खासियत
शिवरात्रि के दिन शिव की पूजा-अर्चना करने में भक्त कोई भी कसर नहीं छोड़ेंगे। शिव पूजा में कई तरह की चीजें चढ़ती हैं। इस दिन लोग शिवजी के मस्तक पर सफेद चंदन का त्रिपुंड बनाते हैं। माना जाता हैं कि उग्र स्वभाव वाले व्यक्ति के माथे पर चंदन लगाया जाए तो इससे उसके मस्तक को शीतलता प्रदान होने के साथ ही उसके व्यवहार में भी सौम्यता आती हैं। इस शिवरात्रि के मौके पर जानते हैं सफेद चंदन के इन्हीं गुणों के बारे में। सफेद चंदन एक सदाबहार वृक्ष है। लकड़ी और लकड़ी के तेल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। सफेद चंदन फंगस और बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद कर सकता है। यह ऐंठन को कम कर सकता है।
सफेद चंदन को लाल चंदन के साथ भ्रमित न करें।

अल्सर को करें दूर
चंदन के अर्क का उपयोग अल्सर को दूर करने में बेहद कारगर है।आयुर्वेद में चंदन से पेट की कई समस्या को दूर किया जा सकता है।

आंखों के लिए
चंदन को कई औषधि जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर मोतियाबिंद या पर्दे में आई किसी भी प्रकार की त्रुटि को ठीक करने के लिए किया जाता है।

दांतों के लिए
अगर किसी को दांतों की समस्या हो रही है तो, आप नियमित रूप से चंदन के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। चंदन के तेल में कसैले गुण पाए जाते हैं, जिनसे मसूड़ों को मजबूती मिलती है।

खुजली की समस्या को करे कम
जो लोग त्वचा की खुजली से परेशान रहते हैं उन्हें बता दें कि वह चंदन के पेस्ट से इस समस्या को दूर कर सकते हैं।

शरीर की गंध को करे दूर
चंदन को कॉस्मेटिक उद्योग में प्रयोग किया जाता है। इसके जरिए कई प्रोडक्ट जैसे इत्र, ड्यूडोरेंट्स आदि बनाए जाते हैं।
इन बीमारियों में भी करता है काम
सफेद चंदन का उपयोग सामान्य सर्दी, खांसी, ब्रोंकाइटिस, बुखार और मुंह और गले में खराश के इलाज के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई), यकृत रोग, पित्ताशय की थैली की समस्याओं, हीटस्ट्रोक, सूजाक, सिरदर्द और हृदय और रक्त वाहिकाओं (हृदय रोग) की स्थितियों के इलाज के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में सफेद चंदन का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।



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