Latest Updates
-
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
टाइप 1 और टाइप 2 के अलावा भी कई प्रकार की होती है डायबिटीज, ज्यादातर लोग नहीं जानते इनके बारे में
Types Of Diabetes In Hindi: डायबिटीज यानी मधुमेह आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाली जीवनशैली संबंधी बीमारियों में से एक है। यह सिर्फ एक रोग नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो शरीर की ऊर्जा प्रक्रिया को प्रभावित करती है। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता या इसका सही उपयोग नहीं कर पाता। इंसुलिन का काम है रक्त में मौजूद शर्करा (ग्लूकोज) को कोशिकाओं तक पहुंचाना ताकि ऊर्जा मिल सके। जब इंसुलिन का स्तर कम या अप्रभावी हो जाता है, तो शुगर रक्त में बढ़ने लगती है, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यदि समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह बीमारी शरीर के कई प्रमुख अंगों को डैमेज कर सकती है। अधिकतर लोगों को डायबिटीज के टाइप-2 प्रकार के बारे में जानकारी होती है, जो लाइफस्टाइल में गड़बड़ी से संबंधित बीमारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज कई और भी प्रकार की होती है। आज इस लेख में डॉ अंबरीष कुमार गर्ग, सीनियर कंसलटेंट - इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर से जानते हैं डायबिटीज के प्रकार के बारे विस्तार से -

डायबिटीज के मुख्य प्रकार
डायबिटीज मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है, टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावधि मधुमेह)। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -
1. टाइप 1 डायबिटीज
यह एक ऑटोइम्यून स्थिति होती है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय (पैंक्रियाज) की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इस कारण शरीर में इंसुलिन बिल्कुल नहीं बनता। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों या युवाओं में पाई जाती है और इसके लिए इंसुलिन इंजेक्शन या पंप की आवश्यकता होती है।
2. टाइप 2 डायबिटीज
यह डायबिटीज का सबसे आम प्रकार है। इसमें शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन कोशिकाएं उस पर सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। धीरे-धीरे शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। टाइप 2 डायबिटीज अक्सर मोटापा, अनियमित जीवनशैली, तनाव और आनुवांशिक कारणों से होती है। इसे डाइट, एक्सरसाइज और दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है।
3. जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावधि मधुमेह)
यह गर्भवती महिलाओं में होता है जब शरीर गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। आमतौर पर डिलीवरी के बाद यह खत्म हो जाता है, लेकिन आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा देता है।
डायबिटीज के अन्य प्रकार
टाइप 1.5 डायबिटीज (LADA)
इसे लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स (LADA) भी कहा जाता है। यह डायबिटीज थोड़ा अलग तरह से बढ़ती है। यह धीरे-धीरे पैंक्रियाज की उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जो इंसुलिन बनाती हैं। नुकसान की रफ्तार धीमी होने की वजह से शुरुआत में ये टाइप 2 जैसी लगती है, लेकिन असल में यह एक ऑटोइम्यून बीमारी होती है।
टाइप 3 डायबिटीज
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दिमाग में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने का संबंध अल्जाइमर जैसी बीमारी से हो सकता है। इसी वजह से इस कनेक्शन को 'टाइप 3 डायबिटीज के नाम से जाना जाता है।
टाइप 4 डायबिटीज
65 साल से ऊपर के उन लोगों में, जो मोटापे का शिकार होते हैं, शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इस स्थिति को टाइप 4 डायबिटीज कहा जाता है। यह उम्र और वजन से जुड़ा हुआ प्रकार है।
टाइप 5 डायबिटीज
साल 2025 में इस नाम को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया। यह कुपोषण से जुड़ा डायबिटीज का प्रकार है। न यह टाइप 1 जैसा होता है, न टाइप 2 जैसा, बल्कि यह कुपोषण के कारण होने वाली एक अलग बीमारी है, जो ज्यादातर बचपन या किशोरावस्था में देखी जाती है।
टाइप 6 डायबिटीज
यह शुगर का एक बहुत दुर्लभ जेनेटिक प्रकार है। इसमें NEUROD1 नामक जीन में गड़बड़ी रहती है, जिसके कारण शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। आमतौर पर इस तरह की डायबिटीज की पहचान 30 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है।
डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए टिप्स
1. डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा या इंसुलिन का नियमित सेवन करें।
2. रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना या योग करें।
3. संतुलित भोजन लें - साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर आहार।
4. मीठे, तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचें।
5. तनाव नियंत्रण और पर्याप्त नींद लें।
6. धूम्रपान और शराब से परहेज करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
