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क्या है डाउन सिंड्रोम जिस पर बनी है आमिर खान की मूवी 'Sitaare Zameen Par'
What Is Down Syndrome : बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक बार फिर चर्चा में हैं, इस बार अपनी फिल्म 'सितारे जमीन पर' को लेकर। यह फिल्म 20 जून को रिलीज हो रही है और खासतौर पर उन बच्चों की कहानी पर आधारित है जो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं। यह एक अनुवांशिक स्थिति है, जो गर्भावस्था के दौरान ही बच्चे को प्रभावित करती है और इसका कोई स्थायी इलाज नहीं होता। हालांकि, सही थेरेपी और देखभाल से ऐसे बच्चों का जीवन सामान्य बनाया जा सकता है।
आमिर की यह फिल्म समाज को जागरूक करने और इन खास बच्चों को समझने की एक संवेदनशील कोशिश है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में-

क्या होता है डाउन सिंड्रोम?
जब गर्भ में पल रहे बच्चे के 21वें क्रोमोसोम की एक अतिरिक्त कॉपी बन जाती है, तो यह स्थिति डाउन सिंड्रोम कहलाती है। सामान्य तौर पर हर व्यक्ति के शरीर में 46 क्रोमोसोम (23 जोड़े) होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में कुल 47 क्रोमोसोम पाए जाते हैं। इस अनुवांशिक बदलाव के कारण उनका मानसिक और शारीरिक विकास सामान्य बच्चों की तुलना में धीमा हो जाता है।
भारत में डाउन सिंड्रोम के मामले
इंडियन पीडियाट्रिक सोसाइटी की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर 800 में से एक बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ जन्म लेता है। हर साल करीब 32,000 ऐसे बच्चे पैदा होते हैं। खासकर वे महिलाएं जो 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण करती हैं, उनके बच्चों में इस सिंड्रोम का जोखिम अधिक होता है।
डाउन सिंड्रोम के लक्षण
सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉक्टर विवेक शर्मा के अनुसार, डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में कुछ खास लक्षण पाए जाते हैं, जैसे -
- छोटी गर्दन
- सीखने और बोलने में देरी
- बादाम जैसी उठी हुई आंखें
- छोटे हाथ-पैर
- बड़ी और बाहर निकली हुई जीभ
- सपाट और छोटी नाक
अक्सर यह लक्षण जन्म के कुछ समय बाद ही नजर आने लगते हैं, और बच्चे की शारीरिक बनावट अन्य बच्चों से अलग दिखने लगती है।
क्या प्रेग्नेंसी में इसका पता लगाया जा सकता है?
प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ विशेष जांचों के जरिए इस बीमारी की पहचान की जा सकती है। इनमें शामिल हैं -
- पेरेंटल स्क्रीनिंग टेस्ट
- नॉन-इनवेसिव पेरेंटल टेस्टिंग
- कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग (CVS)
इन परीक्षणों की मदद से गर्भ में पल रहे बच्चे में क्रोमोसोम की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इलाज और देखभाल
डाउन सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम्स की मदद से इन बच्चों के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे ऐसे बच्चों के साथ सामान्य व्यवहार करें, उन्हें समाज से अलग न मानें।
क्रोमोसोम की भूमिका
एक्सपर्ट के अनुसार, क्रोमोसोम शरीर के शारीरिक व मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। बालों और आंखों के रंग से लेकर बौद्धिक क्षमता तक, सब कुछ क्रोमोसोम से जुड़ा होता है। इन क्रोमोसोम में आई मामूली गड़बड़ी भी किसी व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित कर सकती है।



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