Latest Updates
-
Birthday Wishes For Bhai: मेरी ताकत और बेस्ट फ्रेंड हो तुम, भाई के बर्थडे पर बहन की ओर से ये अनमोल संदेश -
PM Modi के 'अंग, बंग और कलिंग' उद्घोष का क्या है अर्थ? जानें कर्ण की धरती से अशोक के शौर्य तक की पूरी कहानी -
आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में आम खाने के पहले जरूर करें ये काम, नहीं होगी शुगर-मोटापा और पिंपल्स की समस्या -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए लीची, वरना स्वाद सेहत पर पड़ जाएगा भारी -
बच्चों को ऑटिज्म का शिकार बना रही मोबाइल फोन की लत, AIIMS की रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा -
क्या Thalapathy Vijay दोहरा पाएंगे MGR व जयललिता का इतिहास? वो 4 सितारे जो बने तमिलनाडु के CM -
अस्थमा से राहत दिला सकती हैं ये 5 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, कफ और सांस फूलने की समस्या से मिलेगी राहत -
Mamat Banerjee और Suvendu Adhikari दोनों में से कौन ज्यादा अमीर? जानें नेटवर्थ -
बेमौसम बारिश में बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा, जानें सुरक्षित रहने के उपाय और बच्चों की देखभाल के टिप्स -
World Asthma Day Quotes 2026: सांसों पर सबका हक! विश्व अस्थमा दिवस पर भेजें खास कोट्स, फैलाएं जागरूकता
Pulmonary Hypertension: क्या होता है पल्मोनरी हाइपरटेंशन? जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज
Pulmonary Hypertension: हर साल 5 मई को विश्व पल्मोनरी हाइपरटेंशन दिवस (World Pulmonary Hypertension Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य फेफड़ों और हृदय को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी 'पल्मोनरी हाइपरटेंशन' के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। समय पर पहचान और सही इलाज न हो तो यह बीमारी दिल और फेफड़ों दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप इस स्थिति को सही तरह से समझें। आज इस लेख में दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट - पल्मोनोलॉजी, डॉ। नवनीत सूद से जानते हैं पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से -

क्या है पल्मोनरी हाइपरटेंशन?
पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों की धमनियां सिकुड़ जाती हैं या सख्त हो जाती हैं, जिससे उनमें से खून का बहाव मुश्किल हो जाता है। जब फेफड़ों में खून को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है, तो दिल के दाहिने हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक यह दबाव बना रहे तो दिल कमजोर हो सकता है और हार्ट फेल्योर तक की स्थिति आ सकती है। यही वजह है कि इसे सिर्फ 'सांस की बीमारी' समझना गलत है, यह दिल और फेफड़ों की संयुक्त बीमारी है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कारण
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट कारण के होती है, जिसे आइडियोपैथिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन कहा जाता है। कई मामलों में यह जन्मजात हृदय रोग, फेफड़ों की पुरानी बीमारियों जैसे सीओपीडी या इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़, लंबे समय तक फेफड़ों में खून के थक्के रहने, ऑटोइम्यून बीमारियों, लिवर रोग या लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी के कारण विकसित होती है। कुछ दवाइयों और नशीले पदार्थों का सेवन भी इसके जोखिम को बढ़ा सकता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए अक्सर मरीज इन्हें सामान्य थकान या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। शुरुआत में सीढ़ियां चढ़ते समय या थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना, जल्दी थक जाना और कमजोरी महसूस होना आम लक्षण हैं। बीमारी बढ़ने पर सीने में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी, दिल की धड़कन तेज होना, पैरों या टखनों में सूजन और होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना भी हो सकता है। ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज
इलाज की बात करें तो पल्मोनरी हाइपरटेंशन का उपचार पूरी तरह मरीज की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है। सबसे पहले सही और समय पर जांच बेहद जरूरी होती है, जिसमें ईकोकार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन, फेफड़ों की जांच और कुछ मामलों में राइट हार्ट कैथेटराइजेशन शामिल हो सकता है। इलाज का उद्देश्य फेफड़ों की धमनियों का दबाव कम करना, लक्षणों में सुधार लाना और बीमारी की प्रगति को धीमा करना होता है। इसके लिए विशेष दवाएं दी जाती हैं जो रक्त नलिकाओं को फैलाने, खून के थक्के रोकने या दिल के काम को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। कुछ मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी या डाययूरेटिक्स की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
गंभीर मामलों में, जब दवाओं से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता, तो उन्नत उपचार विकल्पों पर विचार किया जाता है। इनमें विशेष इंजेक्शन थेरेपी, सर्जिकल प्रक्रियाएं या बहुत चुनिंदा मामलों में फेफड़े या दिल-फेफड़े का ट्रांसप्लांट शामिल हो सकता है। हालांकि, सही समय पर शुरू किया गया इलाज मरीज की जीवन गुणवत्ता को काफी हद तक बेहतर बना सकता है और जीवनकाल भी बढ़ा सकता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन की रोकथाम
हर प्रकार की पल्मोनरी हाइपरटेंशन को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई मामलों में जोखिम को कम किया जा सकता है। फेफड़ों और दिल की बीमारियों का समय पर इलाज, धूम्रपान से दूरी, प्रदूषण से बचाव, नियमित व्यायाम और लंबे समय तक सांस की तकलीफ को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है। जिन लोगों को पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी है, उन्हें नियमित फॉलो-अप और जांच कराते रहना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications