Latest Updates
-
Sunday Morning to Night Nihari Recipe: धीमी आंच पर पकाएं और पाएं रेस्टोरेंट जैसा लजीज स्वाद -
Kainchi Dham जाने का है प्लान तो रुकने की टेंशन करें खत्म, जानिए कहां मिलेंगे सबसे सस्ते और बेस्ट होटल्स -
Happy Brother's Day 2026 Shayari: प्यारा भाई यह मेरा, ब्रदर्स डे पर अपने भाई को भेजें ये शायरियां -
Restaurant Style Papdi Chaat Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी चटपटी और कुरकुरी चाट -
B Letter Babies Names: अपने बच्चे के लिए ढूंढ रहे हैं 'B' से यूनिक और ट्रेंडी नाम? देखें 200+ नामों की लिस्ट -
अनोखा गांव जहां हर घर की पार्किंग में खड़ा है प्राइवेट जेट, सब्जी लेने के लिए भी लोग भरते हैं उड़ान -
Bakrid 2026 Holiday Date: 27 मई या 28 मई, कब है बकरीद की सरकारी छुट्टी? यहां जानें सही तारीख -
UP Style Tangy Kadhi Chawal Recipe: घर पर बनाएं यूपी के स्वाद वाली चटपटी कढ़ी -
गर्मियों में क्यों फूटने लगती है नकसीर? नाक से खून आने पर तुरंत करें ये 5 घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी राहत -
पेट्रोल के दामों में उछाल और प्रचंड गर्मी का कहर! क्या सच साबित हो रही बाबा वेंगा की सदियों पुरानी भविष्यवाणी
PM Modi के 'अंग, बंग और कलिंग' उद्घोष का क्या है अर्थ? जानें कर्ण की धरती से अशोक के शौर्य तक की पूरी कहानी
History of Anga Banga and Kalinga: पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में प्रचंड जीत के साथ ही भाजपा ने पूर्वी भारत के उस अभेद्य दुर्ग को फतह कर लिया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अंग, बंग और कलिंग' के सूत्र में पिरोया था। पौराणिक कथाओं से लेकर आधुनिक इतिहास तक, भारत का पूर्वी कोना हमेशा से ही शक्ति और समृद्धि का केंद्र रहा है। ऋषि दीर्घतमस के आशीर्वाद और राजा बलि के पुत्रों द्वारा स्थापित ये तीन राज्य अंग जो अब बिहार के संदर्भ में देखा जा रहा है, बंग (बंगाल) और कलिंग (ओडिशा) कभी अखंड भारत के आर्थिक और सांस्कृतिक आधार स्तंभ हुआ करते थे। आज जब बंगाल में 'कमल' खिला है, तो इसे केवल एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के उदय के रूप में देखा जा रहा है। ये जीत एक ऐतिहासिक जीत है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। इसी बीच पीएम मोदी का अंग, बंग और कलिंग' उद्घोष ट्रेंड कर रहा है। आइए जानते हैं क्या है इन तीन प्राचीन क्षेत्रों का अर्थ, इनका ऐतिहासिक महत्व और क्यों पीएम मोदी के लिए यह 'त्रिकोण' स्वर्णिम भारत का प्रवेश द्वार है।

अंग: मगध का गौरव और 'दानवीर' की कर्मभूमि
प्राचीन काल में आज के बिहार के भागलपुर और मुंगेर जिलों के क्षेत्र को 'अंग महाजनपद' कहा जाता था। इसकी राजधानी चंपा अपनी भव्यता और व्यापारिक सुदृढ़ता के लिए प्रसिद्ध थी। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में दुर्योधन ने कर्ण को इसी क्षेत्र का राजा बनाकर उसे सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाई थी। आज भी यह क्षेत्र 'कर्ण की धरती' के रूप में पूजा जाता है। सांस्कृतिक महत्व की बात करें तो अंग को प्राचीन मगध साम्राज्य का प्रवेश द्वार माना जाता था। यह शिक्षा, कला और राजनीतिक चेतना की जननी रही है।
बंग: राष्ट्रवाद की जननी और कला का केंद्र
गंगा और ब्रह्मपुत्र के डेल्टा क्षेत्र में बसा यह भूभाग प्राचीन 'वंग' या 'बंग' कहलाता था। इसमें आज का पश्चिम बंगाल और आधुनिक बांग्लादेश का क्षेत्र शामिल था जहां बीजेपी की ऐतिहासिक जीत ने सभी को हैरान कर दिया है। बंग के ऐतिहसिक महत्व की बात करें तो यह वह क्षेत्र है जिसने 'वंदे मातरम' के उद्घोष के साथ देश में राष्ट्रवाद की अलख जगाई थी। यह प्राचीन काल से ही मलमल के व्यापार और समुद्री मार्ग से होने वाले वाणिज्य के लिए विश्व विख्यात था। आधुनिक दृष्टि से देखा जाए तो पीएम मोदी के विजन में 'बंग' केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक विचार है। बंगाल की मजबूती के बिना पूर्वी भारत का विकास अधूरा माना गया है।
कलिंग: अदम्य शौर्य और नाविकों की महान भूमि
कलिंग का साम्राज्य आधुनिक ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ तटीय इलाकों तक फैला हुआ था। यह अपनी विशाल तटरेखा और साहसी योद्धाओं के लिए जाना जाता था। कलिंग के ऐतिहासिक महत्व को वैसे तो आप जानते ही होंगे, नहीं जानते तो बता दें कि कलिंग का नाम आते ही सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन और बौद्ध धर्म के प्रसार की कहानी याद आती है। लेकिन कलिंग केवल युद्ध की भूमि नहीं थी, बल्कि यहां के 'सदोबा' (नाविक) प्राचीन काल में बाली, सुमात्रा और जावा तक भारतीय संस्कृति का ध्वज लहराते थे। इस क्षेत्र को आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो ये वो सोने की चिड़िया है जहां आज के ओडिशा के पास मौजूद खनिज संसाधन और समुद्री बंदरगाह इसे भारत के भविष्य की अर्थव्यवस्था का 'इंजन' बनाते हैं।
'विकास का त्रिकोण' और मोदी की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी
प्रधानमंत्री मोदी ने इन तीनों क्षेत्रों को जोड़कर 'ईस्टर्न इकोनॉमिक कॉरिडोर' की परिकल्पना की है। इतिहास गवाह है कि भारत का सबसे स्वर्णिम काल वही था जब अंग, बंग और कलिंग समृद्ध थे। ऐसे में ये कहना गलत न होगा कि पीएम मोदी की ये परिकल्पना एक समृद्ध देश के उदगम का वो रास्ता है जहां से हमारी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत हो सकती है कि उसे टक्कर देने के बारे में दुसरे देश सोच भी नहीं सकेंगे। नीचे इस बात को पॉइंट में समझाया गया है।
शक्ति का केंद्र: मौर्य काल से गुप्त काल तक, भारत की वास्तविक शक्ति इसी पूर्वी कोने में निहित थी।
एक्ट ईस्ट: लंबे समय तक उत्तर और पश्चिम भारत पर केंद्रित रहने वाली दिल्ली की राजनीति को अब 'पूर्व' की ओर मोड़ा गया है।
भविष्य का गेटवे: अंग, बंग और कलिंगा का यह संगम दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापार का मुख्य द्वार (Gateway) बनेगा।
क्या है पीएम मोदी के इस उद्घोष का अर्थ
पीएम मोदी के अंग, बंग और कलिंग' उद्घोष के अर्थ की बात करें तो अंग, बंग और कलिंगा को एक सूत्र में पिरोना दरअसल भारत के उसी पुराने वैभव को वापस पाने की कोशिश है, जहां से कभी 'विश्वगुरु' बनने का रास्ता निकलता था। बंगाल के हालिया जनादेश ने इस 'विकास के त्रिकोण' को पूर्ण कर दिया है।



Click it and Unblock the Notifications