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सालों पहले फैली थी ‘मांस खाने वाली मक्खी’ की ये बीमारी, अब अमेरिका में मामला मिलने से मचा कोहरम
हाल ही में अमेरिका में स्क्रूवर्म (Screwworm) बीमारी का एक नया मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, मैरीलैंड का एक व्यक्ति अल सल्वाडोर की यात्रा करके लौटा था, जिसके बाद उसमें इस बीमारी के लक्षण पाए गए। 4 अगस्त को अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों और सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने इसकी पुष्टि की।
यह खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि अमेरिका ने कई साल पहले इस बीमारी को खत्म कर दिया था, लेकिन अब इसके दोबारा लौटने से स्वास्थ्य विभाग और आम जनता दोनों चिंतित हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि स्क्रूवर्म बीमारी क्या है, कैसे फैलती है और क्यों इंसानों व जानवरों के लिए खतरनाक है।

क्या है स्क्रूवर्म बीमारी?
स्क्रूवर्म बीमारी एक परजीवी संक्रमण है, जो खासतौर पर न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म मक्खी (New World Screwworm fly - Cochliomyia hominivorax) के लार्वा से फैलती है। यह बीमारी मुख्य रूप से गर्म खून वाले जानवरों - जैसे गाय, भेड़, बकरी, कुत्ते, घोड़े - को प्रभावित करती है। हालांकि, कुछ मामलों में इंसान भी इसके शिकार हो सकते हैं।
यह बीमारी तब शुरू होती है जब स्क्रूवर्म मक्खी किसी जीवित प्राणी के खुले घाव या कट पर अंडे देती है। कुछ ही घंटों में ये अंडे लार्वा में बदल जाते हैं और घाव के अंदर जीवित टिशूज़ को खाना शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि इसे साधारण संक्रमण से कहीं ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
इंसानों पर प्रभाव
इंसानों में स्क्रूवर्म संक्रमण के लक्षण लगभग जानवरों जैसे ही होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- घाव के आसपास लगातार दर्द और जलन।
- सूजन और लालिमा।
- घाव से दुर्गंध आना।
- घाव का धीरे-धीरे गहराता जाना।
यदि समय पर इलाज न हो, तो लार्वा शरीर के अंदर गहराई तक पहुंच सकता है और संक्रमण खतरनाक रूप ले सकता है। कई बार ये लार्वा कान, आंख या नाक के आसपास भी प्रवेश कर जाते हैं, जिससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
जानवरों के लिए क्यों खतरनाक है?
स्क्रूवर्म मक्खी बहुत तेजी से प्रजनन करती है और बड़ी संख्या में अंडे देती है। एक मादा मक्खी अपने जीवनकाल में हजारों अंडे दे सकती है। समस्या यह है कि स्क्रूवर्म लार्वा केवल मृत टिशूज़ ही नहीं खाते, बल्कि जीवित टिशूज़ को भी नष्ट कर देते हैं।
इससे पशुओं के शरीर में गहरे और दर्दनाक घाव हो जाते हैं। यदि संक्रमण गंभीर हो, तो जानवरों की मौत भी हो सकती है। पशुपालन और कृषि पर इसका गहरा असर पड़ता है क्योंकि यह बीमारी एक साथ बड़े पैमाने पर मवेशियों को प्रभावित कर सकती है।
आर्थिक और सामाजिक असर
स्क्रूवर्म बीमारी केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह आर्थिक संकट भी पैदा कर सकती है। मवेशी और पालतू जानवर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यदि बड़ी संख्या में जानवर इस बीमारी की चपेट में आ जाएं, तो दूध, मांस और अन्य उत्पादों की आपूर्ति पर असर पड़ता है। इससे किसानों की आय घटती है और देश की कृषि व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अमेरिका जैसे देशों ने वर्षों तक बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर इस बीमारी को खत्म किया था। रेडियोधर्मी तकनीक का इस्तेमाल कर मक्खियों को बंध्य (sterile) बनाया गया था, ताकि उनकी प्रजनन क्षमता खत्म हो सके। लेकिन अब इसके दोबारा लौटने से साफ है कि निगरानी और नियंत्रण में थोड़ी भी ढिलाई भारी पड़ सकती है।
बचाव और इलाज
साफ-सफाई - घाव को हमेशा साफ और ढका हुआ रखना चाहिए ताकि मक्खियां उस पर अंडे न दे सकें।
दवाइयां - संक्रमण की स्थिति में एंटीबायोटिक और परजीवी-रोधी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
सर्जिकल हटाना - कई बार डॉक्टर लार्वा को घाव से सर्जरी के जरिए निकालते हैं।
जागरूकता - पशुपालकों और यात्रियों को इसके लक्षणों की जानकारी देना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज हो सके।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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