Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal, 15 April 2026: इन 4 राशियों की आज पलटने वाली है किस्मत, क्या आपकी राशि भी है शामिल? -
Grahan in April 2026: अप्रैल में ग्रहण है या नहीं? नोट कर लें साल के सभी सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की तारीख -
पाचन से लेकर जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने तक, जानें अर्ध मत्स्येन्द्रासन के फायदे और अभ्यास का सही तरीका -
Vastu Tips: घर में कपूर के साथ मिलाकर जलाएं ये दो चीजें, दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा और मिलेगा सुकून -
Real vs Fake Watermelon: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे मिलावटी तरबूज? इन आसान तरीकों से करें असली और नकली की पहचान -
Pana Sankranti 2026: आज ओडिशा में मनाई जा रही है पना संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Sun Gochar 2026: 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य, जानें सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा -
Ambedkar Jayanti 2026 Wishes: बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Happy Baisakhi 2026 Wishes: आई है बैसाखी खुशियों के साथ...इन संदेशों के जरिए अपनों को दें बैसाखी की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 14 April 2026: द्वादशी पर बन रहा है शुभ 'शुक्ल योग', जानें सभी 12 राशियों का हाल
महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के बारे में ये चीज़ें जरुर पता होनी चाहिये
सर्वाइकल कैंसर यानि गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर, यह कैंसर इस समय महिलाओं में तेज़ी से फ़ैल रहा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल करीब 122,844 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित पायी जाती हैं, जिसमें से 67,477 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।
इतनी ज्यादा संख्या होने के बावजूद आज भी भारत में इस कैंसर की जानकारी कम ही लोगों को है। इसलिए चलिए सबसे पहले हम इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि समय आने पर इससे बचा जा सके।
सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) गर्भाशय का ही भाग है, यह कैंसर इसी ग्रीवा में जन्म लेता है। यह कैंसर सबसे पहले असामान्य तरीके से प्रीकैंसरस सेल्स के रूप में विकसित होता है और धीरे धीरे पूरे शरीर में फ़ैल जाता है। एचपीवी यानि ह्यूमैन पैपीलोमा वाइरस सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है।

यही नहीं सर्वाइकल कैंसर होने के और भी कई कारण है जैसे धूम्रपान करना, कई लोगों के साथ शारीरिक संबंध होना या फिर ऐसा सेक्स पार्टनर जिसके अन्य लोगों के साथ शारीरिक संबध हों, किशोरावस्था में यौनसंबंध होना और गर्भनिरोधक गोलिया लेना।
आइये कुछ और सर्वाइकल कैंसर के लक्षण जानते हैं जैसे कई सारी महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर पचास की उम्र से पहले हो जाता है साथ ही बड़ी उम्र की महिलाओं को इससे ज्यादा खतरा होता है।
अगर इस कैंसर के बारे में जल्दी पता चल जाये तो लगभग 91 प्रतिशत बचने की संभावना होती है लेकिन अगर इस कैंसर के बारे में एडवांस स्टेज में पता चलता है तो बचने की संभावना 16 प्रतिशत हो जाती है। हालांकि एचपीवी सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है जो संभोग से होता है और कुछ मामलों में त्वचा के सम्पर्क में आने से होता है।

ऐसा कहा जाता है कि सर्वाइकल कैंसर एचपीवी संक्रमण से ही होता है लेकिन ज्यादातर मामलों में एचपीवी संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर नहीं होता है। नए आकड़ों के मुताबिक एचपीवी संक्रमण कुछ समय के लिए ही होता है जैसे सिर्फ 8-13 महीनों के लिए।
सर्वाइकल कैंसर का खतरा उम्र के साथ कम नहीं बल्कि बढ़ जाता है। इसलिए जरुरी है कि नियमित रूप से इसकी जांच कराई जाए।

मिथक1: एक उम्र तक इसकी जांच की कोई जरुरत नहीं होती
सच्चाई: अगर आपके पहले किसी के साथ यौन-संबंध रहें हैं तो बढ़ती उम्र के साथ सर्वाइकल कैंसर हो सकता है, इसलिये इसकी जांच करवानी जरुरी है।
मिथक 2: यह जनेटिक होता है
सच्चाई: बहुत सारे लोगों का मानना है कि अगर उनके परिवार में यह कैंसर पहले किसी को नहीं हुआ है तो उन्हें भी नहीं होगा। लेकिन सच तो यह है कि परिवार में किसी को भी सर्वाइकल कैंसर ना होने के बावजूद इसके होने का खतरा होता है।
मिथक 3: अगर आपके अंदर कोई लक्षण हैं तभी जांच करानी चाहिए
सच्चाई: कोई लक्षण ना होने के बाद भी आपको एचपीवी संक्रमण हो सकता है। टीके लगने के बाद भी महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मीयर कराते रहना चाहिए।

जांच
उम्र के 21 साल की शुरुआत में ही हर महिला को सर्वाइकल कैंसर की जांच करा लेनी चाहिए। पैप स्मीयर जांच द्वारा गर्भाशय के कैंसर की शुरुआती अवस्था को पकड़ा जा सकता है। इसके साथ एचपीवी जांच डॉक्टर करा सकते हैं जिससे सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि हो सके। जो महिलाएं 30 और 65 वर्ष की उम्र के बीच हैं उन्हें पैप स्मीयर और एचपीवी जांच जरूर करा लेनी चाहिए। इस कैंसर का अगर शुरुवाती स्टेज पर इलाज किया जाए तो बचने की संभावना काफी ज्यादा है। हर साल भारत में सर्वाइकल कैंसर के 1,23,000 नए मामले सामने आते हैं, इसीलिए यह जरुरी है कि इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाई जाए जिससे बीमार व्यक्ति कैंसर का पता चलते ही समय रहते अपनी जांच करा सके।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











