क्‍यूं कुछ महिलाओं का पीरियड कई दिनों चलता है? आइए जानते है कारण

इस आर्टिकल में हम आपको यह बता रहे हैं कि आखिर आपके पीरियड इतने लम्बे समय तक क्यों चलते रहते हैं।

By Super Admin

पीरियड के दौर से हर लड़की को गुजरना पड़ता है और कुछ लड़कियों में पीरियड के दौरान दर्द और ब्लीडिंग इतनी बढ़ जाती है कि वे बिस्तर से उठ भी नहीं पाती हैं। आमतौर पर पीरियड का चक्र सिर्फ 3-4 दिनों का होता है लेकिन अगर आपको इससे ज्यादा समय तक पीरियड की समस्या रहती है तो समझ लें कि कोई न कोई गड़बड़ी ज़रूर है।

हैवी फ्लो : कई बार कुछ लड़कियों में पीरियड 7 दिनों से ज्यादा समय तक रहता है और लगातार हैवी ब्लीडिंग होती रहती है। अचानक से पीरियड के टाइम और ब्लीडिंग का बढ़ जाना यह दर्शाता है कि शरीर के अंदर कोई समस्या है।

इस आर्टिकल में हम आपको यह बता रहे हैं कि आखिर आपके पीरियड इतने लम्बे समय तक क्यों चलते रहते हैं।

अगर आप पीरियड्स के दौरान होने वाली दिक्कतों का इलाज कराने के बारे में सोच रही हैं तो सबसे पहले उसके सही कारण का पता लगायें। जांच कराने से यह भी पता चल जाता है कि कहीं आप डायबिटीज या थायराइड की समस्या से तो पीड़ित नहीं हैं। अधिकतर मामलों में ट्रीटमेंट के बाद पीरियड्स बिल्कुल नार्मल हो जाते हैं।

गायनकोलॉजिस्ट के पास कब जायें: अगर पीरियड 7 दिनों से भी ज्यादा दिनों तक चलता रहे और ऐसा पहले कभी आपके साथ ना हुआ हो तो ऐसे में डॉक्टर से ज़रूर जांच करवाएं। बच्चे को जन्म देने के बाद अगर ब्लीडिंग में से तेज बदबू आ रही है और आपको तेज बुखार हो रहा है तो भी डॉक्टर से चेकअप करवा लें।

1- इंट्रायूटेरिन डिवाइसेस:

1- इंट्रायूटेरिन डिवाइसेस:

कई बार इंट्रायूटेरिन डिवाइस (IUD) की वजह से ही अनियमित तरीके से ब्लीडिंग होने लगती है। अगर आपके साथ भी यही मामला है तो जल्द से जल्द नजदीकी स्त्रीरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाएं और ज़रूरत हो तो डिवाइस को बदलवा लें। यह बात ध्यान में रखें कि कॉपर आईयूडी लगाने के अगले 3 से 6 महीनों तक हैवी ब्लीडिंग का होना पूरी तरह नार्मल है इसलिए अगर आप ने हाल ही में डिवाइस लगवायी है तो घबराने की कोई बात नहीं है।

2- फिब्रोइड्स (Fibroids) :

2- फिब्रोइड्स (Fibroids) :

फिब्रोअस टिश्यू और मसल्स के बढ़ जाने के कारण भी कई दिनों तक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। हालांकि इससे जुड़ी यह अच्छी बात है कि इन मसल्स के बढ़ने से कैंसर का कोई खतरा नहीं रहता है और मेनोपॉज के बाद ये अपने आप ही खत्म हो जाते हैं। अगर हैवी पीरियड के साथ आपको कब्ज़ और पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है तो डॉक्टर से अपनी जांच करवा लें। फिब्रोइड्स को सर्जरी की मदद से हटा दिया जाता है।

3- पालिप्स (Polyps) :

3- पालिप्स (Polyps) :

युटेरस लाइनिंग पर होने वाले नॉनकैंसरस ग्रोथ के कारण भी पीरियड के दौरान हैवी ब्लीडिंग की समस्या होने लगती है। इन पालिप्स की वजह से कई दिनों तक पीरियड रुकता ही नहीं है और चूंकि इन पालिप्स से कैंसर फैलने का खतरा 5% तक रहता है इसलिए डॉक्टर से जांच करवा कर इसे सर्जरी से हटवा लें।

4- इंडोमेट्रिअल हाइपरप्लासिया :

4- इंडोमेट्रिअल हाइपरप्लासिया :

अगर पीरियड में होने वाली ब्लीडिंग में आपको खून के बड़े बड़े थक्के नज़र आते हैं तो समझ लें कि आप इंडोमेट्रिअल हाइपरप्लासिया (Endometrial Hyperplasia) की शिकार हैं। इससे पीड़ित महिलाओं का इंडोमेट्रियम सामान्य अवस्था से थोड़ा मोटा हो जाता है। जब शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल प्रोजेस्टेरोन लेवल से ज्यादा हो जाता है तो ओव्यलैशन की प्रक्रिया नहीं होती है। ऐसे में शरीर को यूटेरिन लाइनिंग को बढ़ने से रोकने का कोई सिग्नल नहीं मिलता है जिस वजह से हाइपरप्लासिया मोटा होने लगता है।

हाइपरप्लासिया होने के कुछ प्रमुख कारण :

दवाइयों या किसी अन्य रूप में हार्मोन के सेवन से शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन लेवल अनियमित होने लगते है जिससे हाइपरप्लासिया (Hyperplasia) की समस्या होने लगती है। इसके अलावा पालीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और मोटापे के कारण भी पीरियड्स में अनियमितता होती है।

5- गर्भ निरोधक दवाइयां:

5- गर्भ निरोधक दवाइयां:

अगर आप इन दवाइयों का सेवन करती हैं तो एडेन ओम्योसिस होने का ख़तरा बढ़ जाता है। इस अवस्था में इंडोमेट्रिअल ग्लैंड यूटेरिन मसल्स के अंदर ही बढ़ने लगता है। जिसके परिणामस्वरूप हैवी पीरियड की समस्या होने लगती है। ताज्जुब की बात यह है कि कुछ महिलाओं में इन गर्भ निरोधक दवाइयों के सेवन से उनका पीरियड साइकिल नियंत्रित भी हो जाता है।

6- प्लेटलेट फंक्शन डिसऑर्डर :

6- प्लेटलेट फंक्शन डिसऑर्डर :

अगर आप प्लेटलेट फंक्शन डिसऑर्डर या विलेब्रांड डिजीज से पीड़ित हैं तो आपको पीरियड के दौरान ब्लीडिंग सामान्य से कई गुना हो सकती है। अमेरिकन आबादी का लगभग एक प्रतिशत हिस्सा विलेब्रांड डिजीज से पीड़ित है। इससे पीड़ित महिलायें बच्चे को जन्म देने के बाद भी अनियमित पीरियड और हैवी ब्लीडिंग से शिकार रहती हैं।

7- कैंसर :

7- कैंसर :

कुछ मामलों में कैंसर के कारण भी हैवी ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। उदहारण के तौर पर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इंडोमेट्रिअल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है हालांकि यह यंग महिलाओं में भी हो सकता है। इसलिए ज़रूरत से ज्यादा ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवाएं।

8 - दवाइयां:

8 - दवाइयां:

कुछ एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीकागलेंट्स दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी हैवी ब्लीडिंग और अनियमित पीरियड की समस्या हो सकती है। इसलिए ऐसी कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर से अपनी दवाइयों की जांच करवाएं।

9- डिलीवरी या गर्भपात :

9- डिलीवरी या गर्भपात :

अगर आपने हाल ही में किसी बच्चे को जन्म दिया है तो अगले कुछ हफ़्तों तक ब्लीडिंग होना सामान्य है। शुरुवात में ब्लड का रंग बिल्कुल गाढ़ा लाल होता है लेकिन समय बीतने के साथ इसका रंग गुलाबी होने लगता है और वो काफी पतला भी हो जाता है।

वहीँ गर्भपात के कारण होने वाली ब्लीडिंग में खून का रंग ब्राउन या चटक लाल होता है साथ ही उसमें गुलाबी रंग के वाइट म्यूकस और टिश्यू भी उपस्थित रहते हैं। इस दौरान लोवर बैक में कई दिनों तक तेज दर्द बना रहता है। कई महिलाओं ने बताया कि गर्भपात होने के बाद ब्लीडिंग का दौर अगले पीरियड के आने तक चलता रहता है।

10- पीसीओएस :

10- पीसीओएस :

पीसीओएस की समस्या होने पर भी महिलाओं को कई दिनों तक पीरियड का दौर चलता रहता है। इससे बचाव के लिए आप नियमित एक्सरसाइज करें और खानपान में हेल्दी चीजों को शामिल करें।

11- अन्य बीमारियाँ:

11- अन्य बीमारियाँ:

ऊपर बतायी हुई समस्याओं के अलावा अगर आप डायबिटीज, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसऑर्डर या थायराइड से पीड़ित हैं तो भी पीरियड के दौरान तेज दर्द और हैवी ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इसके सही कारण का पता लगाने के लिए नजदीकी डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

कब-कब ऐसा होता है : अगर आपको हर बार के पीरियड में हैवी ब्लीडिंग की समस्या हो रही है तो तो आप प्लेटलेट डिसऑर्डर की शिकार हो सकती हैं। वहीँ अगर ऐसा कभी कभी हो रहा है तो फिब्रोइड्स, पालीप्स, इंडोमेट्रिअल हाइपरप्लासिया होने की संभावना ज्यादा है। यह भी जान लें कि फिब्रोइड्स के कारण होने वाली ब्लीडिंग में खून के बड़े बड़े थक्के मौजूद रहते हैं वहीँ हाइपरप्लासिया में ऐसा कुछ भी नहीं होता है।

Story first published: Friday, June 16, 2017, 15:15 [IST]
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