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क्या एक ही महीनें में दूसरी बार पीरियड आ गया? जानिए कारण..
दो पीरियड के बीच की औसत अवधि 28 दिनों की होती है, लेकिन ये 21 से 35 दिनों के बीच बदल सकती है। हालांकि, आप पिछली बार जिस दिन पीरियड में हुए थे उससे 14 दिनों के बाद वो फिर से आ सकते है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपके साथ कुछ गलत हो रहा है। कुछ महिलाओं में नियमित रूप से दो सप्ताह का मासिक चक्र होता है, जबकि कुछ महिलाओं के लिए ये एक अस्थायी समस्या है। अगर आप अपने मासिक चक्र में आकस्मिक बदलाव का अनुभव कर रहे है तो जितना जल्दी संभव हो सकें अपनी गाइनोलॉजिस्ट से मिले।
वे कारण जिसकी वजह से आपके पीरियडस महीने में दो बार आते है
जब आप यौवन अवस्था में पहुंचते है और आप में कई तरह के शारीरिक परिवर्तन आते है- तब आप का पहला पीरियड शुरू होता है, आपके चेहरे पर मुंहासे निकल आते है और ऐसी जगह पर बाल नजर आते है जहां आप ना चाहते हो। हालांकि मुंहासे और बाल हटाने के कई उपाय है जो आपकी बालों की समस्या को हल कर सकते है, लेकिन अपने पीरियड की अवधि को नियमित करने के लिए आप बहुत कुछ नहीं कर सकते।
आप अपनी सहेलियों की तरह अपना पीरियड सर्कल रेगुलर होने का इंतजार करते है लेकिन जल्द ही आपको ये महसूस होता है हर दो सप्ताह में पीरियड आना आपके लिए सामान्य है। वहीं दूसरी ओर, पहले कभी आपको ये समस्या नहीं थी, तो यहां हम आपको वो संभावित कारण बताने जा रहे है जिसकी वजह से हर दो सप्ताह में आपके पीरियड आते है-
वजन में बदलाव
शरीर के वजन को नियंत्रित करने से लंबे समय तक मासिक चक्र की अवधि नियमित होगी।
वजन में भारी उतार-चढ़ाव या तो वजन कम होना या वजन बढ़ना मासिक चक्र में अनियमितता का कारण हो सकता है। कुछ महिलाओं के लिए ये एक अधिक लंबा चक्र होगा, लेकिन अन्य के लिए ये एक शॉर्टर मासिक चक्र हो सकता है, यहां तक कि दो सप्ताह का सर्कल भी। रिसर्च के अनुसार शरीर का वजन नियंत्रित करने से लंबे समय तक मासिक चक्र की अवधि नियमित होगी और इससे पीरियडस के लक्षण जैसे कि पेट में दर्द और सूजन को भी कम करने में सहायता मिल सकती है।

थाइराइड की समस्या
लो थाइराइड फंक्शन भी पीरियडस के दौरान वेजिनल ब्लीडिंग से संबद्ध है। प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन ये दो हार्मोन मिलकर आपके मासिक चक्र को कंट्रोल करते है। ये हार्मोन थाइराइड ग्रंथि से उत्पादित होते है, यही वजह है कि अक्सर थायरॉइड की समस्याओं को मासिक चक्र की अनियमितताओं से जोड़ा जाता है। अधिकतर मामलों में, हाइपरथायराडिज्म मासिक चक्र में विलंब का कारण बनता है, जबकि हाइपरथायराडिज्म मासिक चक्र के दौरान अत्यधिक रक्त स्त्राव का कारण बनता है। लो थायराइड फंक्शन भी पीरियडस के दौरान वेजिनल ब्लीडिंग से संबद्ध है - अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो, तो आप ऐसा सोच सकते है कि ये आपके पीरियडस है।

गर्भनिरोधक में बदलाव
गर्भनिरोधक में बदलाव पीरियडस के दो सप्ताह बाद ही ब्लीडिंग का कारण हो सकता है। अगर आप सिर्फ गोली पर निर्भर है या आपने अपनी गर्भनिरोधक गोली बदल दी हो तो आप कम अवधि में ही ब्लीडिंग होने का अनुभव कर सकते है इसे अनवरत ब्लीडिंग कहेंगे। ये लास्ट पीरियड की अवधि के दो सप्ताह बाद होने लगती है और यदि वो भारी मात्रा में हो रही हो एवं एक-दो दिन तक रहती हो तो आप स्पष्ट रूप से सोचेंगे कि एक बार फिर से आपके पीरियडस आ गए है। ये एक अस्थायी समस्या है जो कि हार्मोन में बदलाव के कारण हो रही है अतः जब आपका हार्मोन लेवल फिर से सही ट्रेक पर आ जाएगा तो आपका मासिक चक्र भी फिर से नियमित हो जाएगा।

अल्सर की समस्या
पीरियडस के दौरान अल्सर की समस्या भारी ब्लीडिंग का कारण हो सकती है। इस ब्लीडिंग को अक्सर गलती से मासिक चक्र की ब्लीडिंग समझा जाता है क्यूंकि ये एक नियमित अवधि तक हो सकती है और इसमें रक्त के थक्के भी निकल सकते है। पीसीओएस अनियमित पीरियडस का सबसे सामान्य कारण है। अधिकतर मामलों में ये लंबे मासिक चक्र का कारण बनता है लेकिन दुर्लभ मामलों में, यह लगातार दो बार हो सकता है या उससे अधिक।

तनाव
वे महिलाएं जो अत्यधिक तनाव से गुजरती है वे मासिक चक्र की अवधि कम होने का अनुभव कर सकती है। हालांकि, हम इस बात को पूरी तरह नहीं समझ सकते कि कैसे तनाव का असर हमारे प्रोडेक्टिव सिस्टम पर पड़ता है लेकिन हम ये जानते है कि अत्यधिक उच्च स्तर का तनाव अनियमित मासिक चक्र से जोड़ दिया गया है। रिसर्च के अनुसार जो महिलाएं अत्यधिक उच्च स्तर के तनाव से गुजरती है वे मासिक चक्र की अवधि में कमी या कम ब्लीडिंग होने का अनुभव करती है। केवल तनाव ही दो सप्ताह बाद ही मासिक चक्र आने का कारण नहीं बनता लेकिन ये एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।

बोटम लाइन
कुछ मामलों में, एसटीआईएस यानि सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से गर्भाशय में सूजन आ सकती है। इसके कारण मासिक धर्म की अवधि असामान्य रूप से और साथ ही अधिक दर्दनाक हो सकती है। आपकी गाइनिक आपको ये बताने में सक्षम होगी कि महीने में दो बार आपके पीरियडस क्यूं आते है। वो आपको ब्लड टेस्ट, थाइराइड फंक्शन के टेस्ट और अन्य जरूरी सुझाव दे सकती है ताकि इस समस्या के मूल कारण को पहचाना जा सकें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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