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World Hemophilia 2024: हीमोफीलिया और ब्रिटिश राजघराने का क्या हैं कनेक्शन, जानें इस दुर्लभ बीमारी के लक्षण
World Hemophilia 2024: हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। इस दिन हीमोफिलिया और अन्य रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता फैलाई जाती है। दुनिया भर में एक बड़ी तादाद इस बीमारी से ग्रसित हैं।
क्या आप जानते हैं हीमोफिलिया को शाही बीमारी यानी रॉयल डिजीज भी कहा जाता है। दरअसल ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को ये बीमारी थी। आइए जानते हैं कि क्यों इस दुलर्भ किस्म की आनुवांशिक बीमारी को शाही बीमारी बुलाया जाने लगा। क्या है इसके लक्षण-

क्या है रॉयल डिजीज (What is Royal diseases in hindi)
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया हीमोफीलिया बी से ग्रसित थीं। यह एक तरह से जेनेटिक बीमारी है। इस बीमारी के बारे में तब पता चला जब धीरे-धीरे करके एक के बाद एक सदस्य इस बीमारी की चपेट में आने लगे। आनुवांशिकता की वजह से हीमोफीलिया से शाही परिवार के कई सदस्य ग्रसित हुए।
हीमोफिलिया शरीर में थ्राम्बोप्लास्टिन (Thromboplastin) नामक तत्व की कमी की वजह से होने वाली बीमारी है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को तुरंत थक्का में बदल देने की क्षमता होती है। इसकी कमी से खून का बहना बंद नहीं होता है। जिससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
आनुवाशिंक रुप से जड़े फैलाने लगी ये बीमारी
महारानी विक्टोरिया के अलावा उनकी दो बेटियों और 1 बेटे को भी हीमोफीलिया की बीमारी थी। एक दुघर्टना में घायल होने की वजह से विक्टोरिया के बेटे प्रिंस लियोपोल्ड की खून का बहाव न रुकने से मौत हो गई थी। बाद में जब महारानी विक्टोरिया की दोनों बेटियों की शादी अलग-अलग देशों के राजाओं हुई। यह बीमारी जेनेटिक रूप से अलग-अलग देशों के राजघराने में फैल गई। रॉयल फैमिली के मेंबर जब इस बीमारी से ग्रस्त होने लगे तो बाद में इसे रॉयल डिजीज के नाम से पुकारा जाने लगा।
हीमोफीलिया के लक्षण (Hemophilia Symptoms)
- छोटी सी खरोंच पर खून बहना
- खून का बहाव नहीं रुकना
- नाक से लगातार खून बहना
- मसूड़ों से ख़ून आना
- स्किन आसानी से छिलना
- शरीर में आंतरिक रूप से ब्लीडिंग होना
- जोड़ों में दर्द होना
- कुछ स्थितियों में हीमोफीलिया में सिर के अंदर भी रक्तस्राव हो सकता
हीमोफीलिया का इलाज (Hemophilia Treatment)
- हीमोफीलिया के इलाज में मिसिंग क्लॉटिंग फैक्टर को रिप्लेस किया जाता है। इसमें मरीजों को बार-बार इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। ये इंजेक्शन बेहद महंगा आता है।
- हीमोफीलिया के मरीजों को आयरन रिच फूड खाने की सलाह दी जाती है।
- खून में थक्का बनाने के लिए प्रोटीन आवश्यक है। इसलिए डाइट में दही, कच्चे पनीर और अंडे शामिल करे।
- हीमोफीलिया के मरीजों अब जीन थेरेपी को लेकर ट्रायल शुरू किए गए हैं। इसमें क्लॉटिंग वाले फैक्टर को ट्रांसफर किया जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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